अब कर्मचारियों की छुट्टी से तबादले तक सब कुछ होगा ऑनलाइन,जानें पूरी खबर
Sanjay Dhiman | Sept 10, 2026, 21:18 IST
mp-e-hrms-de-portal-employees
मध्यप्रदेश में कर्मचारियों की नियुक्ति से रिटायरमेंट तक के काम अब ऑनलाइन होंगे। ई-एचआरएमएस और डीई पोर्टल लागू होगा। डेडलाइन 30 सितंबर तय की गई है।
मध्यप्रदेश सरकार ने कर्मचारियों से जुड़े कामकाज को ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। इसके लिए ई-एचआरएमएस और डीई पोर्टल लागू होगा। नियुक्ति से रिटायरमेंट तक हर काम इसी पोर्टल पर होगा। सभी विभागों को 30 सितंबर तक यह व्यवस्था लागू करनी होगी। इसके लिए एक कमेटी भी बनाई गई है।
मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों का कामकाज जल्द ही आसान होने वाला है। राज्य सरकार ने इसके लिए बड़ा फैसला लिया है। अब कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर सेवानिवृत्ति तक की हर प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इसके लिए फाइलों और कागजी काम पर निर्भरता घटाई जाएगी।
अभी तक कर्मचारियों को छोटी जानकारी के लिए फाइलों का इंतजार करना पड़ता था। कई बार महीनों तक कागज एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमते रहते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी। इससे समय और मेहनत दोनों बचेंगे।
सभी सरकारी विभागों में दो पोर्टल लागू किए जाएंगे। पहला है ई-एचआरएमएस (e-HRMS – Electronic Human Resource Management System)। दूसरा है डीई पोर्टल, जो विभागीय जांच के मामलों को संभालेगा। दोनों पोर्टल मिलकर कर्मचारियों के पूरे सेवाकाल का डिजिटल रिकॉर्ड रखेंगे।
अभी तक कर्मचारियों को छोटी-छोटी जानकारी के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। नई व्यवस्था में यह परेशानी खत्म हो जाएगी। हर अधिकारी और कर्मचारी की जानकारी एक डिजिटल प्रोफाइल में मिलेगी।
इस प्रोफाइल में सेवा-वृत्त और वेतन पर्ची की जानकारी रहेगी। जीपीएफ (GPF – General Provident Fund) और अवकाश का ब्योरा भी मिलेगा। यानी एक ही जगह से कर्मचारी अपनी पूरी सर्विस हिस्ट्री देख सकेगा। बार-बार शाखाओं में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस तरह की डिजिटल प्रोफाइल से कर्मचारियों को अपने रिकॉर्ड पर भी भरोसा रहेगा। गलत एंट्री या गुम फाइल जैसी शिकायतें भी कम होने की उम्मीद है। साथ ही अधिकारी किसी भी समय जरूरी जानकारी तुरंत देख सकेंगे। इससे फैसले लेने में देरी नहीं होगी।
पोर्टल लागू होने के बाद अवकाश और सरकारी दौरे से जुड़े मामले भी ऑनलाइन निपटेंगे। इससे फाइल के इंतजार में लगने वाला समय बचेगा। दफ्तरों पर काम का बोझ भी कम होगा।
पदोन्नति, परिवीक्षा अवधि और सेवा पुष्टि जैसे मामले भी समय पर निपटाए जा सकेंगे। तबादले, पदस्थापना और कैडर प्रबंधन से जुड़े काम भी अब व्यवस्थित तरीके से होंगे। इससे प्रशासनिक कामकाज में देरी घटने की उम्मीद है।
अभी तबादले या पदस्थापना में अक्सर अलग-अलग स्तर पर फाइल भेजनी पड़ती है। इसमें समय भी लगता है। कई बार जानकारी अपडेट करने में चूक भी हो जाती है। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद हर स्टेज की जानकारी दर्ज रहेगी। इससे गलती की गुंजाइश कम होगी।
नया पोर्टल आईएफएमआईएस-स्पैरो (IFMIS-SPARROW – Integrated Financial Management Information System) जैसे अन्य सरकारी प्लेटफॉर्म से भी जुड़ेगा। इससे अलग-अलग सिस्टम में दर्ज जानकारी को एक साथ इस्तेमाल करना आसान होगा। डुप्लीकेट डेटा एंट्री की समस्या भी कम होगी।
डीई पोर्टल के जरिए विभागीय जांच के मामलों को भी ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा। जांच शुरू होने से लेकर अंतिम फैसले तक की स्थिति ऑनलाइन दिखेगी। इससे लंबित मामलों की जानकारी लेना आसान होगा। अधिकारी उनकी प्रगति पर आसानी से नजर रख सकेंगे।
एसीआर और एपीएआर (APAR – Annual Performance Appraisal Report) का प्रबंधन भी डिजिटल होगा। यह वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन कहलाता है। इससे रिपोर्ट तैयार करना आसान हो जाएगा। इसकी निगरानी भी पहले से बेहतर हो सकेगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की स्वीकृति के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों और उनके क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिए हैं। इन्हें 30 सितंबर तक यह पोर्टल व्यवस्था लागू करनी होगी। इसके लिए विभागवार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। पोर्टलों की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से पारदर्शिता बढ़ेगी। कागजी प्रक्रिया घटेगी और कर्मचारियों के मामले पहले से तेजी से निपटेंगे।
पोर्टल के सही क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने एक कमेटी बनाई है। इसकी अध्यक्षता उप सचिव, सामान्य प्रशासन अंकित अस्थाना कर रहे हैं। यह कमेटी मॉड्यूलों की टेस्टिंग और चरणबद्ध लागू करने का काम देखेगी। जरूरत पड़ने पर नियमों में बदलाव के सुझाव भी देगी।
कमेटी में मुख्यमंत्री कार्यालय के उप सचिव सुधीर कोचर को सदस्य बनाया गया है। एमपीएसईडीसी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रमुख भी सदस्य हैं। अवर सचिव सचिन्द्र राव को सदस्य-सचिव बनाया गया है। यह टीम पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी करेगी।
MP शराबकांड-3 और मरीजों ने तोड़ा दम:अब तक 31 मौतें, सरकारी आंकड़ा 15 का, आरोपियों के घर पर चला बुल्डोजर
कुर्सी जाने के बाद भी सरकारी बंगले में जमे पूर्व मंत्री, बेदखली का नोटिस जारी
एमपी पुलिस में बड़ा फेरबदल, 150 टीआई बने डीएसपी, देखें लिस्ट
एमपी में मुफ्त या टैक्स फ्री दिखाएं हनुमान अंश, इन विधायकों की सीएम से मांग
अब नहीं भटकेंगे दफ्तर
अभी तक कर्मचारियों को छोटी जानकारी के लिए फाइलों का इंतजार करना पड़ता था। कई बार महीनों तक कागज एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमते रहते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी। इससे समय और मेहनत दोनों बचेंगे।
सभी सरकारी विभागों में दो पोर्टल लागू किए जाएंगे। पहला है ई-एचआरएमएस (e-HRMS – Electronic Human Resource Management System)। दूसरा है डीई पोर्टल, जो विभागीय जांच के मामलों को संभालेगा। दोनों पोर्टल मिलकर कर्मचारियों के पूरे सेवाकाल का डिजिटल रिकॉर्ड रखेंगे।
एक जगह मिलेगी पूरी जानकारी
इस प्रोफाइल में सेवा-वृत्त और वेतन पर्ची की जानकारी रहेगी। जीपीएफ (GPF – General Provident Fund) और अवकाश का ब्योरा भी मिलेगा। यानी एक ही जगह से कर्मचारी अपनी पूरी सर्विस हिस्ट्री देख सकेगा। बार-बार शाखाओं में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस तरह की डिजिटल प्रोफाइल से कर्मचारियों को अपने रिकॉर्ड पर भी भरोसा रहेगा। गलत एंट्री या गुम फाइल जैसी शिकायतें भी कम होने की उम्मीद है। साथ ही अधिकारी किसी भी समय जरूरी जानकारी तुरंत देख सकेंगे। इससे फैसले लेने में देरी नहीं होगी।
छुट्टी और तबादले होंगे आसान
पदोन्नति, परिवीक्षा अवधि और सेवा पुष्टि जैसे मामले भी समय पर निपटाए जा सकेंगे। तबादले, पदस्थापना और कैडर प्रबंधन से जुड़े काम भी अब व्यवस्थित तरीके से होंगे। इससे प्रशासनिक कामकाज में देरी घटने की उम्मीद है।
अभी तबादले या पदस्थापना में अक्सर अलग-अलग स्तर पर फाइल भेजनी पड़ती है। इसमें समय भी लगता है। कई बार जानकारी अपडेट करने में चूक भी हो जाती है। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद हर स्टेज की जानकारी दर्ज रहेगी। इससे गलती की गुंजाइश कम होगी।
हर सिस्टम आपस में जुड़ेगा
जांच के मामलों पर रहेगी नजर
एसीआर और एपीएआर (APAR – Annual Performance Appraisal Report) का प्रबंधन भी डिजिटल होगा। यह वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन कहलाता है। इससे रिपोर्ट तैयार करना आसान हो जाएगा। इसकी निगरानी भी पहले से बेहतर हो सकेगी।
30 सितंबर है आखिरी तारीख
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से पारदर्शिता बढ़ेगी। कागजी प्रक्रिया घटेगी और कर्मचारियों के मामले पहले से तेजी से निपटेंगे।
जिम्मेदारी संभालेगी खास कमेटी
कमेटी में मुख्यमंत्री कार्यालय के उप सचिव सुधीर कोचर को सदस्य बनाया गया है। एमपीएसईडीसी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रमुख भी सदस्य हैं। अवर सचिव सचिन्द्र राव को सदस्य-सचिव बनाया गया है। यह टीम पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी करेगी।
FAQ
- ई-एचआरएमएस पोर्टल क्या है?
यह एक डिजिटल सिस्टम है जिसमें कर्मचारियों की नियुक्ति से रिटायरमेंट तक की पूरी जानकारी रहेगी। इसमें सेवा रिकॉर्ड, वेतन और अवकाश जैसी जानकारी शामिल होगी। यह मध्यप्रदेश के सभी सरकारी विभागों में लागू होगा। - डीई पोर्टल किस काम आएगा?
डीई पोर्टल विभागीय जांच के मामलों को ऑनलाइन ट्रैक करेगा। इससे जांच प्रकरण दर्ज होने से लेकर फैसले तक की स्थिति दिखेगी। लंबित मामलों की निगरानी भी आसान होगी। - यह व्यवस्था कब तक लागू होगी?
सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को 30 सितंबर तक यह पोर्टल लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग भी होगी।
MP शराबकांड-3 और मरीजों ने तोड़ा दम:अब तक 31 मौतें, सरकारी आंकड़ा 15 का, आरोपियों के घर पर चला बुल्डोजर
कुर्सी जाने के बाद भी सरकारी बंगले में जमे पूर्व मंत्री, बेदखली का नोटिस जारी
एमपी पुलिस में बड़ा फेरबदल, 150 टीआई बने डीएसपी, देखें लिस्ट
एमपी में मुफ्त या टैक्स फ्री दिखाएं हनुमान अंश, इन विधायकों की सीएम से मांग
MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें, MP शिक्षक भर्ती पर गरमाई सियासत, कूनो में फिर गूंजी किलकारी...
By Sandeep Kumar
Rajasthan Top News: 3605 पंचायतों में चुनाव तारीख बदलने की तैयारी: 6 नवंबर को धनतेरस
By Ashish Bhardwaj
EOW ने पेश किया 9500 पन्नों का पूरक चालान,रामगोपाल,देवेंद्र यादव और विनोद तिवारी समेत 12 आरोपी
By Arun Tiwari
13 से 16 अक्टूबर तक होगी सहायक निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी परीक्षा, जानें कब मिलेगा एडमिट कार्ड
By Ashish Bhardwaj
CG Top News : खरोरा अडानी फैक्ट्री में शराब बिक्री पर बवाल, बालोद में एसिड अटैक और हाईकोर्ट का अहम फैसला समेत पढ़े छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें
By Umeshwari Baghel
राजस्थान पुलिस की ऐतिहासिक पहल, हाइटेक होगी बीट पुलिसिंग, पहले चरण में 9 जिलों में होगी लागू
By Ashish Bhardwaj
जवाहर सर्किल के सब-वे की 20 दुकानें बनीं कबाड़घर: दो बार नीलामी फेल, अब बिजली पर ₹19.97 लाख का नया टेंडर
By Raghvendra Singh Rathore