जिंदा शिक्षक बन गए मृत, मध्य प्रदेश एजुकेशन पोर्टल की बड़ी लापरवाही आई सामने
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश के सरकारी एजुकेशन पोर्टल पर एक बहुत बड़ी लापरवाही सामने आई है।
- स्कूल में पढ़ा रहे कई जीवित शिक्षकों को पोर्टल पर मृत दर्ज कर दिया गया है।
- सेवानिवृत्त और मृत हो चुके पुराने शिक्षकों को आज भी कार्यरत दिखाया गया है।
- लोक शिक्षण संचालनालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए।
- सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को 29 मई तक डेटा सुधारने का समय मिला है।
मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग से एक बहुत ही हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से जुड़ा ऑनलाइन डेटा पूरी तरह गड़बड़ा गया है। इस लापरवाही के सामने आने के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है।
दरअसल सरकारी सिस्टम की इस बड़ी चूक के कारण कई शिक्षक परेशान घूम रहे हैं। जो शिक्षक रोज़ स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है।
एजुकेशन पोर्टल पर दर्ज हुआ गलत डेटा
यह पूरी गड़बड़ी एमपी शिक्षा विभाग के आधिकारिक एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर दिखाई दी है। इस ऑनलाइन पोर्टल पर राज्य के सभी शिक्षकों की पूरी जानकारी अपलोड की गई थी। इसके तहत हर स्कूल में स्वीकृत पद और खाली पदों का ब्योरा देना था।
पोर्टल पर शिक्षकों के नाम, उनके विषय और पदस्थापना की जानकारी भी दर्ज की गई थी। लेकिन जब इस पूरे डेटा का मिलान किया गया, तो इसमें भारी कमियां पाई गईं।
जिंदा शिक्षक बने मृत और रिटायर्ड हुए कार्यरत
पोर्टल पर कई ऐसे शिक्षक मिले जो आज भी पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं। लेकिन सरकारी सॉफ्टवेयर में उन्हें मृत या सेवानिवृत्त यानी रिटायर्ड दिखा दिया गया है। इसके विपरीत कुछ ऐसे मामले भी सामने आए जो और भी चौंकाने वाले हैं।
जो शिक्षक दुनिया छोड़ चुके हैं या सालों पहले रिटायर हो चुके हैं, उन्हें पोर्टल पर आज भी नौकरी करते हुए दिखाया गया है। इस अव्यवस्था से स्कूलों में शिक्षकों की सही संख्या का पता लगाना मुश्किल हो गया है।
आयुक्त ने जिला शिक्षा अधिकारियों को डांटा
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने सख्त रुख अपनाया है। आयुक्त ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों यानी डीईओ को एक पत्र जारी किया है। उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने स्तर पर जानकारी का दोबारा सत्यापन करने को कहा है।
विभाग ने निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूलों में जाकर शिक्षकों की वास्तविक स्थिति जांची जाए। इसके बाद ही पोर्टल पर नया और सही डेटा फीड किया जाए।
विभाग ने आदेश दिया है कि शिक्षक किस संस्था में हैं, इसकी सही जांच की जाए। साथ ही उनके पदनाम और पढ़ाए जाने वाले विषय का भी दोबारा वेरिफिकेशन होगा। इससे स्कूलों में विषयवार शिक्षकों (सरकारी शिक्षक) की वास्तविक और सही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।
कई स्कूलों में गलत जानकारी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। अब इस नई जांच से किस स्कूल में कौन सा पद खाली है, इसकी सही जानकारी मिल पाएगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अधिकारियों को मिले निर्देश
इस पूरे मामले को लेकर बीते 25 मई को एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई थी। इसमें सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों के साथ खाली पदों के सत्यापन पर गंभीर चर्चा की गई।
इसके बाद ही सभी जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे विकासखंड स्तर पर जाकर पदों की स्थिति का तुरंत वेरिफिकेशन पूरा करें।
जिला शिक्षा अधिकारी रद्द करेंगे गलत एंट्री
संचालनालय ने सुधार की प्रक्रिया को लेकर नियम भी पूरी तरह साफ कर दिए हैं। जिन शिक्षकों को गलती से मृत या रिटायर्ड लिख दिया गया है, उन्हें डराने की जरूरत नहीं है। जिला शिक्षा अधिकारी खुद अपने स्तर पर इस गलत एंट्री को रद्द करेंगे।
इसके लिए वे पहले स्कूल के दस्तावेजों से शिक्षक के जीवित होने का प्रमाण लेंगे। इसके बाद पोर्टल पर जाकर पुरानी गलत जानकारी को हटाकर नई एंट्री करेंगे।
कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों के लिए विशेष योजना
मध्य प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और नेटवर्क की भारी समस्या रहती है। इस वजह से कई स्कूलों का डेटा समय पर ऑनलाइन अपडेट नहीं हो सका था। विभाग ने इस समस्या को दूर करने के लिए भी निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों से कहा गया है कि वे स्थानीय स्तर पर तालमेल बिठाकर काम करें। जहां नेटवर्क नहीं है, वहां का डेटा जिला मुख्यालय लाकर ऑनलाइन फीड कराया जाएगा।
29 मई तक सूची भेजने का आखिरी मौका
शिक्षा विभाग ने सभी जिला कार्यालयों के लिए एक समय सीमा तय कर दी है। जिन विद्यालयों के डेटा में सुधार किया जाना है, उनकी एक अलग सूची बनेगी। यह पूरी संशोधित सूची 29 मई तक लोक शिक्षण संचालनालय को भेजनी होगी।
अधिकारियों को साफ चेतावनी दी गई है कि इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय पर काम पूरा न करने वालों पर कार्रवाई होगी।
30 मई को कमिश्नर करेंगे बड़ी समीक्षा बैठक
इस पूरी सुधार प्रक्रिया के ठीक बाद 30 मई 2026 को एक बड़ी बैठक होगी। इस बैठक की अध्यक्षता खुद शिक्षा विभाग के कमिश्नर करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी जिला शिक्षा अधिकारी और आईटी समन्वयक शामिल रहेंगे।
बैठक में जिलों से आई अंतिम सूची की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस सुधार के बाद शिक्षकों का ट्रांसफर और प्रमोशन पूरी पारदर्शिता से हो सके।
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