एमपी की बिजली कंपनियों के 6500 संविदा कर्मी होंगे नियमित, परीक्षा से खुलेगा रास्ता
समझें क्या है पूरा मामला
- बिजली कंपनियों के 6500 संविदा कर्मी अब नियमित होंगे।
- नियमित होने के लिए ऑनलाइन परीक्षा पास करनी होगी।
- परीक्षा अक्टूबर महीने से पहले आयोजित की जाएगी।
- अनुभव के आधार पर अधिकतम 30 बोनस अंक मिलेंगे।
- यह मौका हर संविदा कर्मचारी को सिर्फ एक बार मिलेगा।
मध्यप्रदेश की बिजली कंपनियों में काम करने वाले साढ़े छह हजार से ज्यादा संविदा कर्मचारियों (MP Power Workers) के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। अब यह अधिकारी और कर्मचारी नियमित पदों पर नियुक्त हो सकेंगे।
इसके लिए ऊर्जा विभाग एक विशेष परीक्षा आयोजित करेगा। यह परीक्षा पास करने वाले कर्मचारियों को उनकी संविदा सेवा के आधार पर बोनस अंक भी मिलेंगे। यह बोनस अंक उनकी मेरिट सूची में जगह तय करने में मदद करेंगे।
ऊर्जा विभाग ने इस योजना को खास नाम दिया है। इसे संविदा आधार पर कार्यरत कार्मिकों की समकक्ष नियमित पदों पर नवीन नियुक्ति योजना 2026 कहा गया है। इस योजना के तहत पात्र संविदा कर्मचारियों को नियमित रिक्त पदों पर नई नियुक्ति का मौका मिलेगा।
किन कंपनियों में मिलेगा फायदा
एमपी सरकार के ऊर्जा विभाग मध्य प्रदेश शासन ने राज्य विद्युत मंडल की उत्तरवर्ती कंपनियों के लिए यह फैसला (MP Power Recruitment) लिया है। ऊर्जा विभाग के आदेश के मुताबिक पांच कंपनियों (बिजली कंपनी भर्ती एमपी) के संविदा कर्मचारी इस योजना का लाभ ले सकेंगे। इनमें एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड शामिल है। इसके अलावा मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर भी शामिल है।
पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर और मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल भी इस सूची में हैं। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी जबलपुर के कर्मचारी भी पात्र होंगे। हालांकि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी को इस योजना से बाहर रखा गया है। इसका मतलब है कि इस कंपनी के संविदा कर्मचारी (बिजली कंपनी भर्ती अपडेट) फिलहाल इस स्कीम का लाभ नहीं ले पाएंगे।
किन पदों के कर्मचारी होंगे शामिल
इस योजना (MP Power Management Company) में कई तरह के संविदा कर्मचारी और अधिकारी शामिल किए गए हैं। इनमें लाइन अटेंडेंट और टेस्टिंग अटेंडेंट का काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर काम कर रहे संविदा कर्मी भी पात्र होंगे। इस आदेश को लागू करने की जिम्मेदारी संबंधित कंपनियों के प्रबंध संचालकों को सौंपी गई है। यानी हर कंपनी का प्रबंध संचालक अपने स्तर पर इस योजना को लागू करवाएगा।
कौन कर्मचारी होंगे पात्र
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। जिन संविदा कर्मचारियों ने संबंधित कंपनी में कम से कम दो साल की सेवा पूरी कर ली है वही आवेदन कर सकेंगे। यह सेवा योजना की स्वीकृति तिथि तक पूरी होनी चाहिए। अगर किसी कर्मचारी के दो अनुबंधों के बीच कुछ समय का अंतर रहा है तो उसे सेवा में रुकावट नहीं माना जाएगा। लेकिन उस बीच की अवधि को अनुभव में नहीं जोड़ा जाएगा। यानी सिर्फ काम किए गए सालों का ही हिसाब लगेगा।
अगर किसी कर्मचारी की दोबारा संविदा नियुक्ति हुई है तो भी उसका अनुभव जोड़ा जाएगा। लेकिन बीच की खाली अवधि घटाकर ही कुल अनुभव निकाला जाएगा। अनुभव का प्रमाण पत्र कार्यपालन अभियंता स्तर या उससे बड़े अधिकारी द्वारा जारी किया जाएगा। यह प्रमाण पत्र आवेदन के समय जरूरी दस्तावेज होगा।
कैसे होगा चयन और कब होगी परीक्षा
नियमित पदों पर नियुक्ति के लिए पात्र संविदा कर्मचारियों की ऑनलाइन परीक्षा होगी। यह परीक्षा अक्टूबर महीने के पहले आयोजित की जाएगी। सिर्फ उन्हीं पदों पर भर्ती होगी जिनके बराबर के नियमित पद खाली हैं। परीक्षा में मिले अंकों के साथ सेवा अवधि के आधार पर बोनस अंक भी जोड़े जाएंगे। इन दोनों को मिलाकर ही अंतिम मेरिट सूची तैयार होगी।
बोनस अंक की पूरी गणना इस तरह तय की गई है। पहले दो साल की सेवा पर कर्मचारी को 10 अंक मिलेंगे। इसके बाद हर पूरे साल की सेवा पर 2 अतिरिक्त अंक जुड़ेंगे। अधिकतम बोनस अंक की सीमा 30 रखी गई है। अनुभव की गणना 31 मई 2026 की स्थिति के आधार पर होगी। मेरिट सूची में शामिल होने के लिए न्यूनतम अंक भी तय किए गए हैं। सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 50 अंक जरूरी होंगे। वहीं आरक्षित वर्ग के लिए यह सीमा 40 अंक रखी गई है।
आरक्षण और उम्र सीमा में मिलेगी छूट
सभी नियमित नियुक्तियां मध्यप्रदेश शासन (ऊर्जा विभाग में नई संविदा नीति लागू) के आरक्षण नियमों के अनुसार ही होंगी। हर श्रेणी के लिए अलग मेरिट सूची परीक्षा अंक और बोनस अंक जोड़कर बनाई जाएगी। संविदा कर्मचारियों को आवेदन के लिए अधिकतम उम्र सीमा में छूट भी दी जाएगी। यह छूट उन कर्मचारियों के लिए राहत का काम करेगी जो उम्र सीमा पार कर चुके हैं।
चयन के बाद देना होगा त्यागपत्र
अगर कोई संविदा कर्मचारी नियमित पद के लिए चुना जाता है तो उसे एक अहम प्रक्रिया पूरी करनी होगी। चयन के बाद उसे पहले अपने मौजूदा संविदा पद से त्यागपत्र देना होगा। आमतौर पर त्यागपत्र स्वीकार करने में एक महीने की सूचना अवधि लगती है। लेकिन इस योजना में इस नियम को शिथिल कर दिया गया है। इससे कर्मचारियों को जल्दी नई नियुक्ति मिलने में आसानी होगी।
त्यागपत्र देने के बाद संविदा सेवा पूरी तरह समाप्त मानी जाएगी। इसके बाद कर्मचारी अपनी पुरानी संविदा सेवा के आधार पर कोई दावा नहीं कर सकेगा। इसमें वरिष्ठता, पदोन्नति या किसी और तरह का लाभ शामिल है। यानी नई नियुक्ति के बाद कर्मचारी की सेवा नए सिरे से गिनी जाएगी। यह शर्त साफ करती है कि नियमित नियुक्ति के बाद पुराना रिकॉर्ड मान्य नहीं होगा।
FAQ
- सवाल 1- एमपी की बिजली कंपनियों में कितने संविदा कर्मी नियमित होंगे?
जवाब- मध्यप्रदेश की बिजली कंपनियों में साढ़े छह हजार से ज्यादा संविदा अधिकारी और कर्मचारी नियमित हो सकेंगे। इसके लिए उन्हें ऊर्जा विभाग की परीक्षा पास करनी होगी। - सवाल 2- एमपी में नियमितीकरण के लिए बोनस अंक कैसे मिलेंगे?
जवाब- पहले दो साल की सेवा पर 10 अंक मिलेंगे। इसके बाद हर पूरे साल पर 2 अतिरिक्त अंक जुड़ेंगे। अधिकतम बोनस अंक 30 तय किए गए हैं। - सवाल 3- एमपी की बिजली कंपनियों में नियमित पद पर चयन के बाद क्या करना होगा?
जवाब- चयनित कर्मचारी को अपने संविदा पद से त्यागपत्र देना होगा। इसके बाद उसकी पुरानी संविदा सेवा के आधार पर कोई भी दावा मान्य नहीं होगा।
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