महंगाई से बिगड़ा बजट, MP के 12 लाख कर्मचारियों ने सरकार से मांगा 60 फीसदी डीए और एरियर
Amresh Kushwaha | Sept 21, 2026, 08:16 IST
मध्य प्रदेश में कर्मचारियों ने मांगा 60% डीए और एरियर
मध्य प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने सरकार से डीए 60% करने की मांग की है। अभी 58% भत्ता मिल रहा है। महंगाई से बजट बिगड़ने का हवाला दिया गया है। त्योहार से पहले आदेश जारी करने की चेतावनी दी गई है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने डीए बढ़ाने की मांग रखी है।
- संगठनों ने 01 जनवरी 2026 से डीए 60% करने को कहा है।
- अभी कर्मचारियों को सिर्फ 58% महंगाई भत्ता मिल रहा है।
- महंगाई के कारण कर्मचारियों का घर खर्च बढ़ गया है।
- संगठनों ने त्योहार से पहले आदेश जारी करने की मांग की है।
क्या है पूरी मांग
संगठनों का कहना है कि डीए 60% किया जाए। उनका तर्क है कि यह मांग जायज है। क्योंकि केंद्र सरकार पहले ही यह बढ़ोतरी दे चुकी है। ऐसे में मध्यप्रदेश सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है। कर्मचारी नेताओं ने सरकार से जल्द फैसला लेने को कहा है।
58% डीए पर विवाद क्यों
संगठनों का कहना है कि केंद्र और राज्य के डीए में अंतर सही नहीं है। संगठनों ने इसे कर्मचारियों के साथ भेदभाव बताया है। उनका मानना है कि यह फर्क जल्द खत्म होना चाहिए।
सरकारी कर्मचारियों का यह भी कहना है कि रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गई हैं। गैस, पेट्रोल और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़े हैं। इससे घर का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। कर्मचारियों का कहना है कि तनख्वाह उतनी नहीं बढ़ी, जितनी महंगाई बढ़ी है। यही वजह है कि वे डीए बढ़ाने पर अड़े हैं।
9 महीने में कितना नुकसान
तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को तीन हजार 510 रुपए से आठ हजार 838 रुपए तक का नुकसान बताया गया है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को भी दो हजार 790 रुपए से तीन हजार 240 रुपए तक का असर हुआ है। यह पूरा आंकड़ा कर्मचारी संगठनों की तरफ से दिया गया है।
संगठनों का कहना है कि यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि डीए न बढ़ने का असर कितना बड़ा है। हर वर्ग के कर्मचारी को हर महीने नुकसान हो रहा है। इसलिए उनकी मांग है कि यह भरपाई जल्द से जल्द हो।
एरियर पर भी जोर
उनका तर्क है कि यह रकम सरकार के लिए बहुत बड़ी नहीं है। संगठनों ने सरकार के दूसरे खर्च से इसकी तुलना भी की है। उनका कहना है कि लाड़ली बहना योजना पर हर महीने एक हजार 857 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इसलिए कर्मचारियों की मांग भी पूरी की जानी चाहिए। संगठनों ने चेतावनी दी है कि त्योहारों से पहले आदेश जारी हों। उनका कहना है कि देरी से कर्मचारियों में और नाराजगी बढ़ेगी।
कर्मचारी नेताओं की राय
उनका कहना है कि अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। उमाशंकर तिवारी ने भी अपनी बात रखी है। उनके मुताबिक महज 650 करोड़ रुपए खर्च कर एरियर की राहत दी जा सकती है। तीनों नेताओं की राय एक जैसी है। सभी का कहना है कि सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए।
सरकार पर दबाव क्यों
इस बार संगठनों ने साफ चेतावनी दी है। यदि मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन भी हो सकता है। सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कर्मचारी वर्ग को अब सरकार के फैसले का इंतजार है।
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