MP के अधिकारी-कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, बढ़कर आएगी अगस्त की सैलरी
समझें क्या है पूरा मामला...
- प्रदेश के करीब 2 लाख अधिकारी-कर्मचारियों को इंक्रीमेंट का फायदा मिलेगा।
- यह इंक्रीमेंट जुलाई से लागू होगा और अगस्त सैलरी में दिखेगा।
- मूल वेतन में सीधे 3% की बढ़ोतरी होगी।
- इससे महंगाई भत्ता और पेंशन राशि पर भी असर पड़ेगा।
- साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में इंक्रीमेंट तय होता है।
क्या है पूरा मामला
मध्यप्रदेश के करीब दो लाख अधिकारी और कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। इन सभी को जुलाई महीने से वार्षिक इंक्रीमेंट का फायदा मिलने वाला है। इसका सीधा असर अगस्त में मिलने वाले वेतन में दिखेगा। यानी अगस्त की सैलरी पहले से बढ़कर आएगी।
यह इंक्रीमेंट सातवें वेतनमान के नियमों के तहत दिया जाता है। इसमें मूल वेतन में सीधे तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है। मूल वेतन बढ़ने का असर सिर्फ बेसिक सैलरी तक सीमित नहीं रहता। इसका फायदा महंगाई भत्ते पर भी दिखता है।
इसके अलावा एनपीएस (National Pension System) या पेंशन अंशदान की राशि पर भी असर पड़ता है। मूल वेतन बढ़ने से इन दोनों मदों में जमा होने वाली राशि भी बढ़ जाती है। यानी कर्मचारियों को कई स्तर पर इसका लाभ मिलेगा।
किन्हें मिलेगा जुलाई का इंक्रीमेंट
जुलाई में इंक्रीमेंट पाने वाले कर्मचारियों की संख्या भी सामने आई है। इनमें करीब एक लाख 50 हजार कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा करीब 50 हजार अधिकारी भी इस दायरे में आते हैं। इस तरह कुल मिलाकर करीब दो लाख अधिकारी-कर्मचारियों को जुलाई से इंक्रीमेंट मिलेगा।
यह वे कर्मचारी और अधिकारी हैं, जिनकी नियुक्ति या पदोन्नति एक तय समय सीमा में हुई है। इनका वार्षिक इंक्रीमेंट जुलाई की तारीख से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से इन्हें अगस्त के वेतन में बढ़ी हुई राशि मिलेगी।
साल में दो बार तय होता है इंक्रीमेंट
सरकारी कर्मचारियों के इंक्रीमेंट के लिए साल में दो तारीखें तय की गई हैं। यह तारीखें हैं 1 जनवरी और 1 जुलाई। यानी हर कर्मचारी का इंक्रीमेंट इन्हीं दो तारीखों में से किसी एक पर तय होता है।
जिन कर्मचारियों की नियुक्ति या पदोन्नति 1 जनवरी से 30 जून के बीच होती है, उनका इंक्रीमेंट 1 जनवरी को तय होता है। प्रदेश में इस दायरे में आने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या करीब पौने दो लाख बताई गई है। यानी इतने कर्मचारियों को उनका वार्षिक इंक्रीमेंट पहले ही जनवरी में मिल चुका होता है।
वहीं दूसरी तरफ, जिन कर्मचारियों की नियुक्ति या पदोन्नति 1 जुलाई से 31 दिसंबर के बीच होती है, उनका इंक्रीमेंट 1 जुलाई से प्रभावित माना जाता है। यही वजह है कि इस बार जुलाई से जुड़े कर्मचारियों को इंक्रीमेंट का फायदा मिल रहा है, जो अगस्त की सैलरी में नजर आएगा।
अलग-अलग होगी बढ़ी हुई राशि
हर कर्मचारी और अधिकारी को मिलने वाली बढ़ी हुई राशि एक जैसी नहीं होगी। इसका कारण यह है कि इंक्रीमेंट की गणना मूल वेतन के आधार पर होती है। अलग-अलग पे-लेवल के कर्मचारियों का मूल वेतन भी अलग-अलग होता है।
इसी वजह से किसी कर्मचारी को कम राशि का फायदा मिलेगा तो किसी अधिकारी को ज्यादा राशि का फायदा मिलेगा। हालांकि सभी के वेतन में तीन प्रतिशत का ही इंक्रीमेंट जुड़ेगा। लेकिन असल में मिलने वाली रकम पे-लेवल के हिसाब से अलग-अलग होगी।
क्यों बनाई गई यह व्यवस्था
सातवें वेतनमान में साल में दो निश्चित तारीखों पर इंक्रीमेंट देने की व्यवस्था बनाई गई है। इसका मकसद पूरी प्रक्रिया को आसान और व्यवस्थित बनाना है। यदि हर कर्मचारी की नियुक्ति तारीख के हिसाब से अलग-अलग समय पर इंक्रीमेंट तय करना पड़े, तो यह काम काफी जटिल हो जाएगा।
इसी वजह से सिर्फ दो तारीखें तय की गई हैं, जनवरी और जुलाई। इससे विभागों को साल भर अलग-अलग तारीखों पर इंक्रीमेंट तय करने की प्रक्रिया नहीं करनी पड़ती। यह व्यवस्था कर्मचारियों और प्रशासन दोनों के लिए सुविधाजनक मानी जाती है।
अब आगे क्या होगा
अगस्त का वेतन आने पर कर्मचारियों को यह बदलाव सीधे उनकी सैलरी स्लिप में दिखाई देगा। मूल वेतन बढ़ने के साथ महंगाई भत्ता भी बढ़ी हुई राशि के हिसाब से जुड़ेगा। जिन कर्मचारियों की पेंशन या एनपीएस कटौती होती है, उनकी वह राशि भी बढ़ेगी।
इस तरह जुलाई से जुड़ा यह इंक्रीमेंट प्रदेश के करीब दो लाख अधिकारी-कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। आने वाले महीनों में जनवरी वाले इंक्रीमेंट का फायदा पहले ही पौने दो लाख कर्मचारियों को मिल चुका है। अब जुलाई वाला हिस्सा पूरा होने से साल भर की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
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