35 हजार शिक्षकों के 100% वेतन पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, जल्द आ सकता है बड़ा आदेश

Amresh Kushwaha | Aug 18, 2026, 07:56 IST
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35 हजार शिक्षकों के 100% वेतन पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित
35 हजार शिक्षकों के 100% वेतन पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 35 हजार शिक्षकों को प्रोबेशन पीरियड में 100% वेतन देने से जुड़े मामले में फैसला सुरक्षित रखा है। शिक्षकों ने पूरा वेतन, बकाया राशि और 7% ब्याज देने की मांग की है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षकों के वेतन मामले में फैसला सुरक्षित रखा है।
  • करीब 35 हजार शिक्षक परिवीक्षा अवधि में कम वेतन पाते हैं।
  • उन्हें 100% की जगह 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन मिलता है।
  • शिक्षकों ने पूरा वेतन और बकाया राशि मांगी है।
  • कोर्ट का बड़ा आदेश जल्द आने की उम्मीद है।

क्या है पूरा विवाद

मध्यप्रदेश के ट्राइबल एजुकेशन और स्कूल शिक्षा विभाग में हजारों शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। इन शिक्षकों को प्रोबेशन पीरियड के दौरान पूरा वेतन नहीं मिलता। पहले साल 70 प्रतिशत, दूसरे साल 80 प्रतिशत और तीसरे साल 90 प्रतिशत वेतन दिया जाता है। इसी व्यवस्था के खिलाफ शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सोमवार, 17 अगस्त को हाईकोर्ट जबलपुर में इस मामले पर सुनवाई हुई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुना। लंबी बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। यानी अब जल्द ही इस पर बड़ा आदेश आ सकता है। यह मामला Uma Wanshi & Others Vs. State of Madhya Pradesh के नाम से दर्ज है।

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता धीरज तिवारी ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह शिक्षक अस्थायी तौर पर नियुक्त नहीं हुए हैं। इन्होंने पात्रता परीक्षा पास करने के बाद नियमित चयन प्रक्रिया पूरी की है। इसके बावजूद इन्हें कम वेतन दिया जा रहा है।

अधिवक्ता तिवारी ने कोर्ट को बताया कि शिक्षकों से नियमित कर्मचारियों जैसा ही पूरा काम लिया जाता है। उनकी जिम्मेदारियां भी नियमित शिक्षकों जैसी ही होती हैं। ऐसे में सिर्फ परिवीक्षा के नाम पर वेतन रोकना गलत है। उन्होंने कहा कि यह समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के खिलाफ है। साथ ही यह संविधान में दी गई समानता की भावना के भी विपरीत है।

याचिका में यह भी कहा गया कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति नियमित पद पर हुई है, उन्हें स्टाइपेंड जैसी व्यवस्था में नहीं रखा जा सकता। स्टाइपेंड आमतौर पर प्रशिक्षु या अस्थायी कर्मचारियों को दिया जाता है। नियमित पद पर चयनित शिक्षकों पर यह नियम लागू नहीं होना चाहिए।

पुराने फैसलों का हवाला

अधिवक्ता धीरज तिवारी ने कोर्ट में पहले के मिलते जुलते फैसलों का भी हवाला दिया। उन्होंने 12 दिसंबर 2019 के सामान्य प्रशासन विभाग यानी GAD (General Administration Department) के परिपत्र से जुड़े फैसलों का जिक्र किया। उनका कहना था कि परिवीक्षा अवधि में घटे हुए वेतन का सवाल पहले भी कोर्ट में उठ चुका है। उस समय भी कोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में राहत दी थी।

याचिका में 24 दिसंबर 2019 और 24 फरवरी 2020 की उन अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी गई है, जिनके आधार पर मौजूदा स्टाइपेंड व्यवस्था लागू की गई। यह व्यवस्था 12 अक्टूबर 2019 के एक परिपत्र पर आधारित बताई जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि इसी वजह से उनका वेतन सालों तक कम मिलता रहा।

मांग: 100% वेतन व ब्याज

शिक्षकों ने कोर्ट से कई अहम मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि नियुक्ति की तारीख से ही उन्हें 100% वेतन दिया जाए। दूसरी मांग है कि 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन के कारण जो राशि रुकी रही, वह पूरी बकाया राशि उन्हें दी जाए।

शिक्षकों ने यह भी मांग की है कि बकाया राशि पर 7% सालाना ब्याज भी मिलना चाहिए। यह ब्याज उस तारीख से मांगा गया है, जब भुगतान होना था। शिक्षकों का तर्क है कि उन्हें सालों तक कम वेतन मिलने से आर्थिक नुकसान हुआ है। इसलिए उन्हें ब्याज के साथ पूरा भुगतान मिलना चाहिए।

याचिका में कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि उन्हें वे सभी परिणामी आर्थिक लाभ भी दिए जाएं, जो पूर्ण वेतन मिलने पर बनते हैं। इसमें आगे मिलने वाले भत्ते और अन्य लाभ भी शामिल हो सकते हैं।

अब आगे क्या होगा

फिलहाल कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामला Heard & Reserved कर दिया है। इसका मतलब है कि सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब कोर्ट अपना फैसला बाद में सुनाएगा। शिक्षक संगठनों को उम्मीद है कि फैसला जल्द आएगा।

यह मामला सिर्फ कुछ शिक्षकों तक सीमित नहीं है। इसका असर ट्राइबल एजुकेशन और स्कूल शिक्षा विभाग के करीब 35 हजार शिक्षकों पर पड़ेगा। अगर कोर्ट शिक्षकों के पक्ष में फैसला देता है, तो सभी को 100% वेतन का रास्ता खुल सकता है। साथ ही बकाया राशि और ब्याज मिलने की भी संभावना बनेगी। इससे प्रदेश के कई परिवारों को सीधा फायदा होगा।

यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि इसका सीधा असर मध्यप्रदेश के करीब 35 हजार शिक्षकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत भारतीय संविधान में समानता के अधिकार से जुड़ा है। यह मामला सरकारी नीतियों की पारदर्शिता और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

हाईकोर्ट का फैसला आने वाले समय में अन्य विभागों में भी परिवीक्षा वेतन नीति पर असर डाल सकता है। यह खबर आम जनता, शिक्षक समुदाय और नीति निर्माताओं के लिए जानकारीपूर्ण और उपयोगी है। इसमें तथ्यात्मक और संतुलित जानकारी दी गई है, जो जिम्मेदार पत्रकारिता के मानकों पर खरी उतरती है।

FAQ

  1. मध्यप्रदेश में परिवीक्षा अवधि के दौरान शिक्षकों को कितना वेतन मिलता है?
    फिलहाल परिवीक्षा अवधि के पहले साल में 70 प्रतिशत, दूसरे साल में 80 प्रतिशत और तीसरे साल में 90 प्रतिशत वेतन दिया जाता है। शिक्षकों ने इसे चुनौती देते हुए 100% वेतन की मांग की है। मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में विचाराधीन है और फैसला सुरक्षित रखा गया है।
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