ESB सिपाही भर्ती रिजल्ट में Z और T फॉर्मूले की गुत्थी से कैसे कम हो गए उम्मीदवारों के अंक

Sanjay Gupta | Apr 13, 2026, 09:51 IST
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ईएसबी सिपाही भर्ती रिजल्ट में Z और T फॉर्मूले से उम्मीदवारों के अंक घट गए। कई के 10 से 15 अंक तक कम हो गए। लाखों अभ्यर्थियों पर असर पड़ा। इस फॉर्मूले को लेकर विवाद बढ़ गया है। MLA हीरालाल अलावा ने जांच की मांग के साथ परीक्षाएं ऑफलाइन करने की मांग की है।

एमपी कर्मचारी चयन मंडल परीक्षा की सिपाही भर्ती परीक्षा में साढ़े नौ लाख से ज्यादा उम्मीदवार थे। इसमें 6500 से ज्यादा उम्मीदवार 87 प्रतिशत फॉर्मूले से चयनित हुए हैं। यह परीक्षा 7500 पदों के लिए थी।



बाकी पद 13 प्रतिशत फॉर्मूले में होल्ड हैं। वहीं, इस रिजल्ट में कई उम्मीदवार सफल होते-होते रह गए। इसकी वजह है ईएसबी द्वारा इस बार लागू किया गया Z और T वाला फॉर्मूला।



इस तरह बना है रिजल्ट

परीक्षा दो चरणों में हुई थी। इसमें 100 अंक की लिखित परीक्षा थी और 100 अंक का फिजिकल था। यह फॉर्मूला लिखित परीक्षा में लगा है, जो 100 अंक की थी। मेरिट 200 अंकों से बनी है।



क्यों हो रहा है विवाद

दरअसल इस फॉर्मूले के तहत जो मूल अंक थे, उनमें किसी के 10 तो किसी के 15 तक अंक कम हो गए। जैसे एक उम्मीदवार राहुल के 90 अंक थे, उसके 75 अंक हो गए। इसी तरह एक उम्मीदवार के 80 अंक थे, उसके 74 हो गए। इसी तरह यह असर कई उम्मीदवारों के अंकों पर पड़ा है।



अब आपको बताते हैं Z और T फॉर्मूला

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  • इस फॉर्मूले में X उम्मीदवार द्वारा प्राप्त किए गए अंक हैं।
  • Mu (म्यू) मीन है, यानी उस शिफ्ट में जिसमें उम्मीदवार शामिल हुआ था, उस शिफ्ट में सभी उम्मीदवारों का औसत क्या रहा। जैसे उस शिफ्ट में 100 उम्मीदवार थे और उन सभी के कुल अंक 5000 थे, तो मीन 50 होगा।
  • इसके बाद स्टैंडर्ड डेविएशन, यानी इस शिफ्ट में उम्मीदवारों के अंकों में औसत से कितना विचलन हुआ है।

इस तरह निकलेगी Z वैल्यू

मान लिया कि किसी उम्मीदवार के अंक 80 थे, उस शिफ्ट में Mu (म्यू) औसत अंक 70 आया और स्टैंडर्ड डेविएशन 5 था, तो Z = 80 - 70 / 5 यानी Z-वैल्यू 2 होगी।



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अब T वैल्यू कैसे निकलेगी

इसका फॉर्मूला है:



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  • इसमें स्टैंडर्ड ग्लोबल मीन सभी उम्मीदवारों के अंक का औसत है।
  • स्टैंडर्ड डेविएशन पूरे उम्मीदवारों के अंकों का विचलन है।
  • ईएसबी के अनुसार स्टैंडर्ड ग्लोबल मीन 50 और स्टैंडर्ड डेविएशन 10 है।
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अब उम्मीदवार के अंक कैसे निकले

जैसे किसी उम्मीदवार के 80 अंक थे और उसकी Z वैल्यू 2 आई, तो वह 80 अंक से घटकर 70 रह जाएगा। इस फॉर्मूले से समझें...



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देखिए किस तरह उम्मीदवारों के अंकों पर हुआ असर

अधिकांश उम्मीदवारों के अंक कम हुए हैं। जानकारों के मुताबिक सबसे कठिन पेपर को आधार बनाया गया, जिससे स्टैंडर्ड डेविएशन बढ़ा और Z वैल्यू कम हुई। इससे T अंक भी घट गए।



जिनका Z शून्य से अधिक है, उनके अंक औसत से ज्यादा थे। जिनका Z माइनस में है, उनके अंक औसत से कम हैं और Z शून्य होने का मतलब औसत के बराबर अंक हैं।



ऐसे कम हुए अंक:

  • एक उम्मीदवार के अंक 67 थे, Z वैल्यू 1.44 थी। T फॉर्मूले से अंक 64.40 हो गए।
  • एक उम्मीदवार के अंक 80.80 थे, Z वैल्यू 2.428 थी। T से अंक घटकर 74.26 हो गए।

ये तो 90 अंक के बाद भी बाहर हो गए:

  • एक उम्मीदवार के 89.36 अंक थे, Z वैल्यू 2.57 थी। T से अंक 75.75 हो गए।
  • एक उम्मीदवार के 90.62 अंक थे, Z वैल्यू 2.55 थी, लेकिन T से अंक घटकर 75.59 हो गए और वह चयन से बाहर हो गया।

विधायक अलावा ने लगाए आरोप

इस मामले में मनावर विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने ईएसबी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि Z वैल्यू और T स्कोर के नाम पर हजारों युवाओं के अंक 1 से 17 तक कम कर दिए गए, बिना स्पष्ट आधार बताए।



ऑफलाइन हो परीक्षा, अलावा की मांग

विधायक अलावा ने मांग की कि बार-बार हो रहे विवाद से साफ है कि ऑनलाइन और मल्टी-शिफ्ट परीक्षाओं में पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। सभी भर्ती परीक्षाएं ऑफलाइन, एक दिन और एक शिफ्ट में कराई जाएं, ताकि नॉर्मलाइजेशन की जरूरत न पड़े और सभी को समान अवसर मिले। साथ ही पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी की गई है।



क्या बोल रहे उम्मीदवार

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फिजिकल में ज्यादा नंबर वालों को हुआ फायदा

इस Z-T फॉर्मूला को सिर्फ लिखित परीक्षा के 100 अंकों पर लागू किया गया था, यानी जिनके फिजिकल में अच्छे अंक थे, उन्हें इसका ज्यादा फायदा हुआ। फिजिकल के नंबर सीधे-सीधे जोड़ दिए गए थे, जिससे उन्हें काफी लाभ हुआ। वहीं, जो लोग लिखित परीक्षा में अच्छे थे, लेकिन फिजिकल में थोड़े पीछे थे, वे चयन से बाहर हो गए। इस फॉर्मूले ने एक तरह से लिखित परीक्षा वालों को पीछे कर दिया और फिजिकल वाले उम्मीदवारों को आगे कर दिया।



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