कुर्सी जाने के बाद भी सरकारी बंगले में जमे पूर्व मंत्री, बेदखली का नोटिस जारी

Amresh Kushwaha | Sept 10, 2026, 12:40 IST
mp ex ministers eviction
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मध्य प्रदेश में पद हटने के बाद भी बी-टाइप सरकारी बंगलों में जमे पूर्व मंत्रियों को बेदखली का नोटिस जारी किया गया है। अब उनसे भारी पेनल्टी और 10 गुना तक किराया वसूलने की तैयारी है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश के 3 पूर्व मंत्रियों को बंगला खाली करने का नोटिस मिला है।
  • ये तीनों अभी भी बी-टाइप शासकीय बंगलों में रह रहे हैं।
  • नोटिस के बाद भी उन्होंने अब तक बंगला खाली नहीं किया।
  • अब सरकार उनसे किराया भी वसूल सकती है।
  • वहीं पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 2028 तक नया बंगला मिल गया है।

मध्य प्रदेश में बी-टाइप बंगलों में रह रहे तीन पूर्व मंत्रियों को अब बेदखली का नोटिस थमाया गया है। यह नोटिस मध्यप्रदेश लोक परिसर बेदखली अधिनियम 1974 के तहत जारी हुआ है। नोटिस में साफ लिखा है कि शासकीय आवास तुरंत खाली करके पेंशन संपदा कार्यालय को सौंपा जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो अधिनियम के तहत बंगला जबरन खाली करा लिया जाएगा। यह मामला भोपाल से जुड़ा है, जहां कई पूर्व मंत्री और नेता वर्षों से सरकारी बंगलों में रह रहे हैं।



किन्हें मिला नोटिस

जिन तीन पूर्व मंत्रियों को नोटिस भेजा गया है, उनमें प्रभुराम चौधरी, अरविंद भदौरिया और मीना सिंह शामिल हैं। प्रभुराम चौधरी सांची से भाजपा विधायक हैं और उन्हें बंगला नंबर बी-25 के लिए नोटिस मिला है। मीना सिंह मानपुर, उमरिया से विधायक हैं और उनका बंगला नंबर बी-27 है। अरविंद भदौरिया पूर्व मंत्री हैं और उन्हें बंगला नंबर बी-20 के लिए नोटिस दिया गया है। तीनों अभी भी मंत्री पद छोड़ने के बाद भी इन्हीं बंगलों में रह रहे थे।



नोटिस में क्या लिखा है

नोटिस में साफ कहा गया है कि इन नेताओं को भोपाल में बी-टाइप बंगले मंत्री पद पर रहने की वजह से दिए गए थे। अब चूंकि ये तीनों मंत्री नहीं हैं, इसलिए इनका आवंटन अपने आप निरस्त हो जाता है। नोटिस में यह भी बताया गया है कि इन्हें कितने समय तक बंगले में रहने की अनुमति दी गई थी।



यह नोटिस जुलाई 2026 के आखिरी हफ्ते में जारी किया गया था। हालांकि इसे कुछ समय तक संपदा विभाग ने दबाकर रखा। नोटिस के बाद भी तीनों पूर्व मंत्रियों ने बंगला खाली नहीं किया।



अब वसूला जाएगा किराया

संपदा के निष्कासन अधिकारी की ओर से नोटिस में एक अहम बात और कही गई है। कहा गया है कि जब से पूर्व मंत्री बिना पात्रता के बंगले में रह रहे हैं, तब से किराए की गणना की जाए। इसके बाद पत्र जारी करके किराए की वसूली की जाएगी। यानी अब इन तीनों नेताओं से पिछले समय का किराया भी लिया जा सकता है।



कुछ महीने पहले भी इसी तरह की कार्रवाई हुई थी। पूर्व सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहे स्व. प्रभात झा को आवंटित बंगला खाली कराया गया था। बंगला खाली होने के बाद यह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और बीजेपी विधायक गिरीश गौतम को दे दिया गया।



नरोत्तम मिश्रा को नया बंगला

इसी बीच एक और अहम खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को राज्य सरकार ने नए सिरे से बंगला आवंटित कर दिया है। यह आवंटन 2028 तक के लिए किया गया है। बताया जा रहा है कि दतिया उपचुनाव से पहले नरोत्तम मिश्रा ने करीब नौ लाख रुपए किराए के रूप में जमा भी करा दिए थे। यानी वे नियमों के दायरे में रहकर पहले ही अपना बकाया चुका चुके हैं। इसी वजह से उन्हें बंगला दोबारा मिल गया।



कौन-कौन विधायक बी-टाइप बंगलों में

आवास आवंटन नियमों के अनुसार सामान्य विधायकों को बी-टाइप बंगले आवंटित नहीं किए जा सकते। नियम के हिसाब से विधायक इसके पात्र नहीं होते। इसके बावजूद वर्तमान में कई विधायक इन बंगलों में रह रहे हैं। नीना वर्मा को बंगला नंबर बी-18 आवंटित है। यादवेंद्र सिंह बी-23 में रह रहे हैं।



वहीं पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर बंगला नंबर बी-29 में रह रही हैं। राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी डी-टाइप आवास में रह रही हैं। यह पूरी सूची दिखाती है कि नियमों के बावजूद कई नेता अपात्र होने पर भी सरकारी बंगलों में जमे हुए हैं।



पिछले साल ही बदले थे नियम

यह पूरा मामला सिर्फ पूर्व मंत्रियों तक सीमित नहीं है। करीब दस महीने पहले कैबिनेट ने शासकीय आवास आवंटन नियम 2000 में बड़ा संशोधन किया था। इस संशोधन में तय किया गया कि जो लोग समय पर आवास नहीं छोड़ते, उनसे सामान्य किराए का 10 गुना वसूला जाएगा।



इसके अलावा 30 गुना तक पेनल्टी भी लगाई जा सकती है। यह नियम इसलिए बनाया गया क्योंकि राजधानी भोपाल में अलग-अलग विभागों के अधिकारी तबादले के बाद भी बंगले खाली नहीं कर रहे थे।



कई ऐसे नेता भी शामिल हैं, जो चुनाव हारने के बाद भी सरकारी बंगलों में रह रहे हैं। इस वजह से नए आवास आवंटन में लगातार दिक्कत आ रही थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए यह सख्त प्रावधान लाया गया।



क्यों जरूरी है यह कार्रवाई

सरकारी बंगले सीमित संख्या में होते हैं और इन्हें पद के हिसाब से आवंटित किया जाता है। जब पद छूटने के बाद भी बंगला खाली नहीं होता, तो नए पात्र अधिकारियों और नेताओं को परेशानी होती है। यही वजह है कि सरकार अब सख्ती बरत रही है। संपदा विभाग की यह कार्रवाई आने वाले समय में और तेज हो सकती है। इससे साफ संकेत मिलता है कि अब बड़े नेताओं पर भी नियम बराबर लागू होंगे।



आगे क्या हो सकता है

अब देखना होगा कि तीनों पूर्व मंत्री कब तक बंगला खाली करते हैं। यदि तय समय में बंगला नहीं छोड़ा गया, तो प्रशासन जबरन कार्रवाई कर सकता है। इसके साथ ही बकाया किराए की वसूली भी शुरू हो सकती है। नए नियमों के तहत यह रकम काफी बड़ी हो सकती है। यह मामला आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है।



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