सिंधिया संपत्ति विवाद: प्रतिमा देवी की आपत्ति और पुराने समझौते की वैधता पर सुनवाई आज
Amresh Kushwaha | Sept 10, 2026, 10:23 IST
सिंधिया संपत्ति विवाद
सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति विवाद में आज जिला कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। प्रतिमा देवी की आपत्ति और पुराने समझौते की वैधता पर बहस होगी। वसीयत न दिखाने और गलत पते पर नोटिस भेजने का आरोप लगाया गया है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति का बंटवारा विवादित है।
- यह मामला गुरुवार, 10 सितंबर को जिला कोर्ट में फिर सुनवाई के लिए पहुंचा है।
- प्रतिमा देवी ने पुराने समझौते और नोटिस पर आपत्ति जताई है।
- ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे इसमें मुख्य पक्ष हैं।
- अदालत में आज दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।
इस सुनवाई में प्रतिमा देवी की ओर से दर्ज आपत्ति और पहले तैयार किए गए समझौते की वैधता पर बहस होगी। यह मामला कई सालों से अदालत में चल रहा है और अब यह अपने अहम मोड़ पर पहुंच गया है।
वसीयत की जानकारी नहीं मिली
प्रतिमा देवी का दावा है कि उनकी मां पद्मावती राजे सिंधिया संपत्ति में हिस्सेदार थीं। इसलिए उनके उत्तराधिकारियों के अधिकारों को नजरअंदाज करके कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
कौन हैं प्रतिमा देवी
प्रतिमा देवी अकेली नहीं हैं, उनकी बहन कनिका देवी भी इस विवाद की पक्षकार हैं। प्रतिमा देवी का कहना है कि उनकी मां की कम उम्र में मृत्यु हो गई थी। इसके बावजूद परिवार में उनकी हिस्सेदारी की अनदेखी की गई।
गलत पते पर नोटिस भेजने का आरोप
उनका कहना है कि यह नोटिस उन्हें कभी मिले ही नहीं। इसी आधार पर उन्होंने खुद को एकतरफा कार्रवाई से बाहर किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिला।
तीन बहनों का जवाब पहले आ चुका
उनका यह भी कहना है कि अंतिम चरण में आपत्ति उठाने का कोई औचित्य नहीं है। पिछली सुनवाई में वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे के वकील प्रशांत शर्मा भी कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने बहस के लिए और समय मांगा था।
मां के हिस्से पर दावा
उन्होंने यह भी दावा किया कि जब वह अपनी मौसी ऊषा राजे के पास पहुंचीं, तो उन्हें संतोष करने की सलाह दी गई। प्रतिमा देवी इस बंटवारे से सहमत नहीं हैं और अपने हक की लड़ाई लड़ रही हैं।
दस्तावेजों पर भी सवाल
हालांकि इस दावे पर अभी दूसरे पक्षों की तरफ से जवाब सामने नहीं आया है। प्रतिमा देवी के अनुसार, परिवार पर मौजूद कर्ज चुकाने के लिए कुछ संपत्तियां बेचने की तैयारी भी चल रही है। दिल्ली स्थित एक फार्म हाउस को लेकर भी विवाद बताया जा रहा है।
पुराना है यह विवाद
इससे पहले हुई सुनवाई में करीब 1000 पन्नों के दस्तावेज भी कोर्ट में पेश किए जा चुके हैं। संपत्ति के बंटवारे को लेकर एक 78 साल पुराना कोवेनेंट दस्तावेज भी इस मामले में अहम माना जा रहा है।
आज की सुनवाई में क्या तय होगा
अदालत यह भी देखेगी कि प्रतिमा देवी को एकतरफा कार्रवाई से बाहर रखना सही था या नहीं। फिलहाल संपत्ति के बंटवारे पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
राजघराने की संपत्ति क्यों अहम
इस मामले में भी मुख्य सवाल यही है कि संपत्ति में किस-किस का कितना हक बनता है। आने वाली सुनवाइयों में यह तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने की उम्मीद है।
यह खबर क्यों जरूरी है
वसीयत और नोटिस जैसे दस्तावेजों की सही प्रक्रिया न अपनाना अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है। अदालत का काम सभी पक्षों को बराबर मौका देना है, जो कानून के राज का आधार है। इसलिए यह खबर सामाजिक और कानूनी दोनों नजरिए से पाठकों के लिए उपयोगी है।
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