50 हजार करोड़ के एक्सप्रेस-वे से बदलेगी MP की तस्वीर: आपस में जुड़ेंगे 4 बड़े शहर!
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में सिंहस्थ से पहले 50 हजार करोड़ रुपए के सड़क प्रोजेक्ट शुरू होंगे।
- भोपाल से इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और मंदसौर तक सीधी सड़कें बनेंगी।
- नए ग्रीनफील्ड रूट से सफर में डेढ़ से 4 घंटे तक बचत होगी।
- भोपाल के दोनों तरफ बायपास और भोपाल-विदिशा फोरलेन भी बनेगा।
- ज्यादातर सड़कें हैम मॉडल पर सरकार और निजी कंपनियां मिलकर बनाएंगी।
सिंहस्थ 2028 से पहले नई सड़कें
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल जल्द सड़कों का बड़ा केंद्र बनेगी। राज्य सरकार सिंहस्थ मेले से पहले नया रोड नेटवर्क तैयार करना चाहती है। इस पर करीब 50 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। भोपाल से चार बड़े शहरों तक सीधी सड़कें बनाई जाएंगी। इनमें इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और मंदसौर शामिल हैं। सरकार का मकसद यात्रा का समय कम करना है। नई सड़कें व्यापार और आम लोगों दोनों के लिए फायदेमंद होंगी।
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चार शहरों को जोड़ेगा रूट
भोपाल-मंदसौर रूट की मौजूदा दूरी 366 किलोमीटर है। अभी इस सफर में 8 से 9 घंटे लगते हैं। नया ग्रीनफील्ड रूट सिर्फ 320 किलोमीटर का होगा। इससे ढाई से 3 घंटे का समय बचेगा। इस प्रोजेक्ट पर करीब 11 हजार 550 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
भोपाल-इंदौर रूट पर एनएचएआई (National Highway Authority Of India) यानी नेशनल हाईवे अथॉरिटी 160 किलोमीटर सड़क को सिक्सलेन बनाएगी। इससे दूरी 20 से 25 किलोमीटर कम होगी। सफर का समय भी 1 से डेढ़ घंटे घटेगा।
भोपाल-ग्वालियर की मौजूदा दूरी 400 किलोमीटर है। अभी इसमें करीब साढ़े 6 घंटे लगते हैं। नया रूट सिर्फ 320 किलोमीटर का होगा। इससे 80 किलोमीटर दूरी और करीब 2 घंटे का समय बचेगा।
भोपाल-जबलपुर की दूरी अभी 286 किलोमीटर है। इसमें करीब 5 घंटे लगते हैं। नया प्रस्तावित रूट 239 किलोमीटर का होगा। सफर सिर्फ साढ़े 3 घंटे में पूरा होगा। यानी 47 किलोमीटर दूरी और डेढ़ घंटे बचेंगे।
भोपाल-जबलपुर और भोपाल-ग्वालियर रूट पर टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भोपाल-मंदसौर की डीपीआर (Detailed Project Report) अभी बनाई जा रही है। भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू होगा।
भोपाल में बनेंगे बायपास
भोपाल के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में नए बायपास बनेंगे। पश्चिमी भोपाल बायपास 35.61 किलोमीटर लंबा फोरलेन होगा। इस पर करीब चार हजार 594 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
पूर्वी भोपाल बायपास करीब 52 किलोमीटर लंबा सिक्सलेन होगा। इस पर लगभग चार हजार करोड़ रुपए खर्च का अनुमान है। इसका रिवाइज्ड प्रस्ताव फिर से उच्च स्तर पर भेजा गया है।
भोपाल-विदिशा रोड को भी फोरलेन किया जाएगा। यह सड़क स्टेट हाइवे-18 पर बनेगी। इसकी लंबाई 44.83 किलोमीटर होगी। इस पर करीब एक हजार 617 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस प्रोजेक्ट को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है।
हैम मॉडल से होगा निर्माण
इनमें से ज्यादातर सड़कें हैम मॉडल पर बनेंगी। हैम यानी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (Hybrid Annuity Model) में सरकार और निजी कंपनी मिलकर काम करती हैं। कुल लागत का 40 फीसदी हिस्सा सरकार देती है। बाकी 60 फीसदी पैसा निजी कंपनी अपनी पूंजी या कर्ज से लगाती है। सरकार अपना हिस्सा पांच किस्तों में देती है। निजी कंपनी का पैसा ब्याज समेत 15 से 20 साल में चुकाया जाता है। सड़क बनने के बाद टोल सरकार खुद वसूलती है।
इसी मॉडल पर उज्जैन के आसपास कई सड़कें बन रही हैं। इंदौर-उज्जैन सड़क को स्टेट हाइवे-31 पर सिक्सलेन किया जा रहा है। यह सड़क 45.18 किलोमीटर लंबी है और इस पर एक हजार 692 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इसका करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। उज्जैन-जावरा रूट पर भी 103 किलोमीटर लंबा फोरलेन बनेगा। इस पर करीब पांच हजार 017 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
डीपीआर और नए प्रोजेक्ट
कई और सड़कों की डीपीआर भी तैयार की जा रही है। नर्मदापुरम-पिपरिया के बीच 101 किलोमीटर लंबा फोरलेन बनेगा। इस पर करीब दो हजार 100 करोड़ रुपए खर्च होंगे। करेली-पिपरिया के बीच 71 किलोमीटर सड़क बनेगी। इसकी लागत करीब एक हजार 420 करोड़ रुपए आंकी गई है।
जबलपुर-नरसिंहपुर के बीच 84.5 किलोमीटर लंबा फोरलेन प्रस्तावित है। इस पर करीब एक हजार 690 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इंदौर-नेमावर के बीच 127 किलोमीटर लंबी सड़क बनेगी। इसकी लागत करीब दो हजार 540 करोड़ रुपए होगी।
इसके अलावा हरदा-आशापुर, राहतगढ़-खुरई-खिमलासा और रतना-मैहर-बरही रूट पर भी नई सड़कें प्रस्तावित हैं। ये सभी सड़कें अलग-अलग स्टेट हाइवे पर बनेंगी। इनसे छोटे शहर भी बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ जाएंगे।
सागर-सतना कॉरिडोर भी बनेगा
सागर-सतना के बीच भी नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर प्रस्तावित है। यह सड़क बीओटी मॉडल (Build Operate Transfer) पर बनेगी। इसकी अनुमानित सिविल लागत करीब नौ हजार 850 करोड़ रुपए है। मौजूदा दूरी 294 किलोमीटर है और अभी 6 से 7 घंटे लगते हैं। नया रूट सिर्फ 218 किलोमीटर का होगा। इससे सफर का समय घटकर साढ़े 3 घंटे रह जाएगा।
कटनी-सिंगरौली के बीच भी नई सड़क बनेगी। अभी इस रूट की दूरी 299 किलोमीटर है। इसमें करीब सवा 6 घंटे का समय लगता है। नया ग्रीनफील्ड रूट 232 किलोमीटर का प्रस्तावित है। इससे सफर साढ़े 3 घंटे में पूरा होगा।
मुख्य सचिव ने की समीक्षा
हाल ही में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने इन प्रोजेक्ट की समीक्षा की। उन्होंने अलग-अलग मॉडल पर प्रस्तावित सभी सड़क योजनाओं को परखा। अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने के निर्देश दिए गए। सिंहस्थ मेले की डीपीआर के लिए भी 50 करोड़ रुपए से ज्यादा मंजूर किए गए हैं।
ज्यादातर सड़कों का निर्माण मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन यानी एमपीआरडीसी (Madhya Pradesh Road Development Corporationn) करेगी। सिर्फ भोपाल-इंदौर रूट एनएचएआई के जिम्मे रहेगा।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर आम नागरिकों के रोजमर्रा के सफर और आर्थिक विकास से सीधे जुड़ी है। सड़क बुनियादी ढांचा राज्य की तरक्की का अहम आधार होता है। बेहतर सड़कें व्यापार, रोजगार और आवागमन को आसान बनाती हैं। सरकारी खर्च की जानकारी नागरिकों को पारदर्शिता का अधिकार देती है। सार्वजनिक धन के उपयोग पर जनता का जागरूक रहना जरूरी है।
FAQ
- हैम मॉडल क्या होता है और इससे सड़कें कैसे बनेंगी?
हैम यानी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल में सरकार और निजी कंपनी मिलकर सड़क बनाती हैं। कुल लागत का 40 फीसदी हिस्सा सरकार देती है और बाकी 60 फीसदी निजी कंपनी अपनी पूंजी या कर्ज से लगाती है। निर्माण के बाद सरकार टोल वसूल कर निजी कंपनी का पैसा 15 से 20 साल में ब्याज सहित चुकाती है।
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