एमपी में एआई से बनी रही एमबीबीएस डिग्री, नकली डॉक्टर कर रहे इलाज, जांच के आदेश
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- दमोह जिले में नकली डॉक्यूमेंट्स के सहारे फर्जी डॉक्टर पकड़े गए हैं।
- आरोपियों ने एआई की मदद से नकली एमबीबीएस डिग्री बनाई थी।
- फर्जीवाड़े के बाद स्वास्थ्य विभाग के पूरे सिस्टम पर सवाल उठे हैं।
- सरकार ने वॉक-इन-इंटरव्यू से भर्ती सभी डॉक्टरों की जांच के आदेश दिए।
- एनएचएम अब सभी मेडिकल कॉलेजों और सीएमएचओ से वेरिफिकेशन करवाएगा।
मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य सिस्टम में फर्जी डॉक्टरों की एंट्री
मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से हैरान करने वाली खबर आई है। दमोह जिले में फर्जी डॉक्टरों का एक बड़ा गढ़ पकड़ा गया है। यहां कुछ लोग नकली एमबीबीएस (MBBS) डिग्री के सहारे मरीजों का इलाज कर रहे थे।
इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद पूरा सिस्टम हिल गया है। यह पूरा खेल बहुत शातिर तरीके से चल रहा था। अब सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाए हैं।
एआई से बनाई जा रही थीं नकली डिग्रियां
पुलिस की जांच में जो बात सामने आई, वह तकनीकी रूप से डराने वाली है। पकड़े गए आरोपियों के पास जो एमबीबीएस की डिग्रियां मिली हैं, वे असली नहीं हैं। पुलिस को शक है कि इन्हें एआई (AI) टूल्स से बनाया गया है।
एआई की मदद से यह डिग्रियां इतनी असली दिखती हैं कि पहली नजर में कोई भी धोखा खा जाए। ग्वालियर के सचिन यादव और सीहोर के राजपाल गौर को पुलिस ने दबोचा है। अब पुलिस इस फर्जी डिग्री बेचने वाले मुख्य गिरोह को तलाश रही है।
डॉक्यूमेंट्स जांचने में NHM की बड़ी लापरवाही
इस पूरे नकली डिग्री फर्जीवाड़े के पीछे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की लापरवाही भी सामने आई है। दरअसल, राज्य के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है। मेडिकल कॉलेजों में करीब 35 प्रतिशत डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं।
इस कमी को पूरा करने के लिए एनएचएम हर मंगलवार और बुधवार को वॉक-इन-इंटरव्यू रखता है। ऑनलाइन आवेदन के बाद विभाग केवल ऊपरी तौर पर कागजात देखता है और जॉइनिंग दे देता है। असली डाक्यूमेंट्स के वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी जिलों के सीएमएचओ (CMHO) को सौंप दी जाती है।
MPPSC को नहीं मिल रहे योग्य उम्मीदवार
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने डॉक्टरों की पक्की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की थी। हाल ही में घोषित परीक्षा परिणाम में 649 मेडिकल अफसरों के पद खाली रह गए। विशेषकर अनुसूचित जनजाति और ईडब्ल्यूएस वर्ग में योग्य उम्मीदवार ही नहीं मिले।
पक्के डॉक्टर न मिलने के कारण सरकार संविदा पर डॉक्टरों की भर्ती कर रही है। विभाग 'यू कोट, वी पे' जैसी योजनाओं से डॉक्टरों को बुला रहा है। इसी जल्दबाजी और ढीले सिस्टम का फायदा उठाकर फर्जी लोग अस्पतालों में घुस गए।
फर्जी डॉक्टर मरीजों के लिए जानलेवा
मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय ने इस पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि फर्जी डॉक्टरों का सिस्टम में घुसना एक बड़ी नाकामी है। डॉक्टरों की कमी से ज्यादा खतरनाक यह नकली डॉक्टर हैं जो गलत इलाज करेंगे।
यह स्थिति सीधे तौर पर गरीब मरीजों की जान के साथ बड़ा खिलवाड़ है। संजीवनी क्लीनिक जैसी सरकारी जगहों पर भी ये फर्जी डॉक्टर नौकरी कर रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने कई अन्य लोगों के नाम भी उगले हैं।
मिशन डायरेक्टर ने दिए जांच के कड़े निर्देश
दमोह के इस बड़े फर्जीवाड़े के बाद एनएचएम एक्शन मोड में आ गया है। एनएचएम के प्रभारी मिशन डायरेक्टर मयंक अग्रवाल ने नए आदेश जारी किए हैं। उन्होंने सभी जिलों के सीएमएचओ और मेडिकल कॉलेजों के डीन को पत्र लिखा है।
अब तक वॉक-इन-इंटरव्यू से नियुक्त हुए सभी डॉक्टरों के डाक्यूमेंट्स की जांच होगी। उनके मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन और डिग्री का दोबारा बारीकी से वेरिफिकेशन किया जाएगा। गड़बड़ी मिलने पर तुरंत पुलिस केस दर्ज करने की बात कही गई है।
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