MP में एक पते से बने 20 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट, पहचान छिपाने बौद्ध धर्म का लिया सहारा

Aman Vaishnav | Sept 07, 2026, 12:57 IST
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20 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट
20 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट

मध्य प्रदेश में 20 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनाए गए। इन विदेशी नागरिकों के लिए स्थानीय स्तर पर आधार, वोटर कार्ड और अंकसूची जैसे फर्जी कागज तैयार किए गए थ। फर्जी पासपोर्ट से इन लोगों ने थाईलैंड, चीन और भूटान जैसे देशों की यात्राएं भी की हैं।

मध्य प्रदेश से एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है। यह मामला सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। स्पेशल टास्क फोर्स ने एक गिरोह को पकड़ा है। इस गिरोह ने फर्जी तरीके से भारतीय पासपोर्ट बनवाए।

गिरोह ने ग्वालियर जिले की डबरा तहसील के एक ही पते का इस्तेमाल किया। इसी पते पर 20 बांग्लादेशी नागरिकों (अवैध बांग्लादेशी नागरिक) के भारतीय पासपोर्ट तैयार करवाए गए।

जांच में सामने आया कि इन विदेशी नागरिकों को दस्तावेजों में भारतीय बताया गया। इसके लिए स्थानीय स्तर पर कई फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। इनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की अंकसूची शामिल हैं। इन्हीं दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया।

मुख्य आरोपी गिरफ्तार

जानकारी के अनुसार STF ने इस मामले में रियाल चौधरी नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि रियाल पूरे नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार है।

पूछताछ के दौरान उसने अपने एक साथी का नाम भी बताया। अब पुलिस उस साथी की तलाश कर रही है। साथ ही नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों को भी खोजा जा रहा है। उन बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान भी की जा रही है। इन्हीं लोगों ने फर्जी दस्तावेज के दम पर भारतीय पहचान हासिल की थी।

एक ही गवाह, बीस पासपोर्ट

जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। सभी 20 पासपोर्ट डबरा स्थित बौद्ध विहार के पते पर बनवाए गए। दस्तावेजों में इन लोगों ने खुद को भारतीय नागरिक बताया। साथ ही खुद को बौद्ध धर्म का अनुयायी भी बताया गया। सबसे अहम बात यह है कि इन सभी पासपोर्ट में एक ही गवाह है। हर पासपोर्ट में गवाह के तौर पर रियाल चौधरी का नाम दर्ज है।

गिरोह ने पहले इन विदेशी नागरिकों के लिए दस्तावेज तैयार किए। ये दस्तावेज भारतीय पहचान से जुड़े थे। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट के लिए आवेदन करवाया गया।

पासपोर्ट बनने की प्रक्रिया में पते और पहचान का सत्यापन भी होता है। इसके बावजूद किसी भी स्तर पर सच्चाई सामने नहीं आ सकी। किसी को भी इनके विदेशी नागरिक होने का पता नहीं चला।

पांच साल पुराना है मामला

STF अधिकारियों के मुताबिक, ये सभी 20 पासपोर्ट करीब पांच साल पहले बने थे। जांच आगे बढ़ने पर इसी तरह के 44 और पासपोर्ट सामने आए हैं। ये सभी पासपोर्ट अब एजेंसी की नजर में हैं।

इनकी भी बारीकी से जांच की जा रही है। एजेंसियां यह पता लगाना चाहती हैं। क्या इनके लिए भी फर्जी दस्तावेज बने थे, यह देखा जा रहा है। इसी नेटवर्क का हाथ है या नहीं यह भी जांचा जा रहा है।

जांच एजेंसियां अब पता लगा रही हैं कि गिरोह ने कुल कितने लोगों के लिए फर्जी पहचान पत्र बनाए। यह पता लगाया जा रहा है। इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है यह भी देखा जा रहा है।

दस्तावेज से पासपोर्ट जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया जांच के दायरे में है। किस स्तर पर चूक हुई, इसका भी पता लगाया जा रहा है।

विदेश यात्रा का भी हुआ इस्तेमाल

फर्जी भारतीय पासपोर्ट (पासपोर्ट रैकेट) पाने वाले कुछ लोगों ने विदेश यात्रा भी की। इसके लिए इन्हीं पासपोर्ट का इस्तेमाल हुआ। इनमें थाईलैंड, चीन और भूटान जैसे देशों की यात्रा शामिल है। इससे यह मामला सिर्फ फर्जी दस्तावेज तक सीमित नहीं रह जाता। यह अंतरराष्ट्रीय यात्रा और सुरक्षा से भी सीधे जुड़ जाता है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है। फर्जी पासपोर्ट के सहारे विदेशी नागरिक का दूसरे देश में प्रवेश जोखिम भरा है। सुरक्षा एजेंसियां इसे गंभीरता से देख रही हैं।

अब जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं। इन लोगों ने किन-किन देशों की यात्रा की यह भी पता लगाया जा रहा है। यात्रा का मकसद क्या था यह भी देखा जा रहा है। वहां पासपोर्ट का इस्तेमाल किस तरह हुआ इसकी भी जांच जारी है।

पुलिस वेरिफिकेशन पर उठे सवाल

इस मामले ने पुलिस वेरिफिकेशन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पासपोर्ट जारी होने से पहले आवेदक के पते की जांच होती है। पहचान का सत्यापन भी इसी दौरान किया जाता है। स्थानीय पुलिस जांच के बाद रिपोर्ट आगे भेजती है। इसके बाद पासपोर्ट कार्यालय में दस्तावेजों की जांच होती है।

इतनी परतों वाली प्रक्रिया के बावजूद एक बड़ी चूक हो गई। एक ही पते से 20 विदेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बन गए। यह बात जांच व्यवस्था की एक गंभीर खामी को सामने लाती है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच और गहराई तक जा सकती है। इससे कई और नाम और दस्तावेज सामने आ सकते हैं।

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