प्रमोशन मिला, लेकिन मनचाही पोस्टिंग नहीं... वन विभाग में अब पदस्थापना पर विवाद
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- वन विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया के बाद कर्मचारियों में नाराजगी।
- प्रमोशन के साथ दूसरे जिलों में पदस्थापना पर उठे सवाल।
- भोपाल, रीवा सहित कई जिलों से शिकायतें सामने आने का दावा।
- कर्मचारी संगठन वरिष्ठता और नियमों के पालन की मांग कर रहे हैं।
- संबंधित अधिकारियों को अभ्यावेदन देकर समीक्षा की मांग की गई।
मध्यप्रदेश के वन विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया इस समय नए विवाद की वजह बन गई है। कर्मचारियों का कहना है कि प्रमोशन मिलने के बाद बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके पसंदीदा या रिक्त स्थानों पर पदस्थ करने के बजाय दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है। इससे पूरे विभाग में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।
कर्मचारी संगठनों का दावा है कि यह समस्या सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है। भोपाल, रीवा समेत कई स्थानों से ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जहां पद रिक्त होने के बावजूद कर्मचारियों की पदस्थापना दूर-दराज के जिलों में की गई है। इसी मुद्दे को लेकर संगठन अब सरकार और विभाग से जवाब मांग रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों ने क्या उठाए सवाल?
मध्य प्रदेश वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष राम यश मौर्य का कहना है कि कई मामलों में सेवा अवधि और वरिष्ठता के अनुरूप पदोन्नति तथा पदस्थापना नहीं हुई। उनका आरोप है कि भोपाल में पद रिक्त होने के बावजूद कुछ कर्मचारियों को राजगढ़, सीहोर, विदिशा और अन्य जिलों में भेजा गया है।
संगठन का कहना है कि यदि किसी जिले में पद खाली हैं तो कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से दूसरे जिलों में भेजने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही पदस्थ किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर विभागीय अधिकारियों को अभ्यावेदन भी सौंपे गए हैं।
वरिष्ठता के पालन पर भी विवाद
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया में वरिष्ठता और निर्धारित नियमों का समान रूप से पालन होना चाहिए। उनका दावा है कि कुछ कर्मचारियों को अपेक्षित अवसर नहीं मिला, जबकि कुछ मामलों में प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। इसी कारण प्रमोशन सूची की समीक्षा की मांग लगातार तेज हो रही है।
पदोन्नति की समीक्षा की मांग
इसी बीच वन वृत्त खंडवा में जारी पदोन्नति सूची भी विवादों में आ गई है। 13 जुलाई 2026 को जारी सूची के बाद कई कर्मचारियों ने वरिष्ठता और नियमों के पालन को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है।
खंडवा वन वृत्त में दो अलग-अलग आदेशों के तहत 250 वनरक्षकों को वनपाल और 83 वनपालों को डिप्टी रेंजर पद पर पदोन्नत किया गया। कुल 333 पदोन्नतियों के बाद कर्मचारी संगठनों ने सूची की समीक्षा की मांग करते हुए संबंधित अधिकारियों को अभ्यावेदन सौंपा है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि पदोन्नति और पदस्थापना दोनों प्रक्रियाओं की निष्पक्ष समीक्षा हो। उनका कहना है कि वरिष्ठता, सेवा नियम और रिक्त पदों को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाएं, ताकि कर्मचारियों में बढ़ रही नाराजगी खत्म हो सके। विभाग की ओर से अब इन आपत्तियों पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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