अब गरुड़ पोर्टल रखेगा गंदे पानी पर नजर: MP में सीवेज प्लांट्स की रीयल-टाइम निगरानी शुरू
मध्यप्रदेश में अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की निगरानी हाईटेक हो गई है। पुराने तरीकों को छोड़कर अब रीयल-टाइम डिजिटल सिस्टम अपना लिया गया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने इसके लिए गरुड़ पोर्टल लॉन्च किया है।
इस पोर्टल से पूरे राज्य के प्लांट्स की एक जगह से निगरानी होगी। अब अधिकारियों को हर प्लांट पर खुद जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे अपने ऑफिस से ही गंदगी की सफाई का स्टेटस देख पाएंगे। पानी की शुद्धता और सफाई की जांच अब और भी सटीक होगी।
क्या है ‘गरुड़ पोर्टल’ और क्यों खास?
अभी तक सीवेज प्लांट का डेटा वहीं तक सीमित रहता था। इससे पूरी व्यवस्था की निगरानी करना काफी मुश्किल काम था। "गरुड़ पोर्टल" अब इस पुरानी कमी को पूरी तरह खत्म करता है। यह एक खास और केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया गया है।
यहां सभी प्लांट्स का डेटा लाइव देखा जा सकता है। अब अधिकारी एक ही जगह से सब कुछ देख सकेंगे। इससे काम में पारदर्शिता और रफ्तार दोनों ही बढ़ेगी।
पारदर्शिता के साथ कंट्रोल
आयुक्त संकेत भोंडवे ने इस सिस्टम को विभाग की बड़ी टेक्नोलॉजिकल छलांग बताया है। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि सिस्टम की कार्यक्षमता भी पहले से बेहतर होगी। उनके अनुसार, अब हर प्लांट के प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। इससे जिम्मेदारी तय करना आसान होगा और गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई भी संभव होगी।
कैसे काम करता है नया सिस्टम?
राज्य के 42 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (Sewage Treatment Plant - STP) में एससीएडीए (Supervisory Control and Data Acquisition - SCADA) और
ओसीईएमएस (Online Continuous Effluent Monitoring System - OCEMS) तकनीक लागू की गई है।
- SCADA: प्लांट की पूरी गतिविधियों की डिजिटल मॉनिटरिंग
- OCEMS: पानी की गुणवत्ता का लगातार ऑनलाइन विश्लेषण
इन दोनों सिस्टम से मिलने वाला डेटा सीधे “गरुड़ पोर्टल” पर अपलोड होता है।
किन पैरामीटर्स पर रहेगी नजर?
अब पानी की गुणवत्ता के अहम मानकों को रीयल-टाइम में ट्रैक किया जा रहा है:
- बीओडी (Biochemical Oxygen Demand - BOD)
- सीओडी (Chemical Oxygen Demand - COD)
- पीएच (Potential of Hydrogen - pH)
- टीएसएस (Total Suspended Solids - TSS)
इससे तुरंत पता चलेगा कि ट्रीटमेंट सही हो रहा है या नहीं।
कितना बड़ा है नेटवर्क?
मध्यप्रदेश में फिलहाल करीब 52 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (Sewage Treatment Plant - STP) संचालित हैं। इनमें से 42 प्लांट्स का डेटा पहले ही पोर्टल से जुड़ चुका है। बाकी 12 प्लांट्स को भी जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है, ताकि पूरा सिस्टम एक ही प्लेटफॉर्म पर आ सके।
क्या बदलेगा इस पहल से?
इस पहल से तीन बड़े बदलाव साफ नजर आते हैं:
- पारदर्शिता बढ़ेगी – डेटा अब छिपा नहीं रहेगा
- फैसले तेज होंगे – रीयल-टाइम जानकारी मिलेगी
- पर्यावरण को फायदा – पानी की गुणवत्ता बेहतर होगी
बड़ा असर: शहरों की सफाई और जल गुणवत्ता
यह सिस्टम सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि शहरी स्वच्छता से सीधे जुड़ा है। बेहतर सीवेज मैनेजमेंट का मतलब है साफ नदियां, बेहतर पानी और स्वस्थ शहर। सरकार को उम्मीद है कि यह मॉडल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
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