एमपी सरकार ने अवैध उत्खनन नियमों में संशोधन कर दिया सख्ती का संकेत

Ramanand Tiwari | Mar 14, 2026, 22:39 IST
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BHOPAL.मध्यप्रदेश सरकार ने अवैध खनन रोकने के लिए नियमों में संशोधन किया है। ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जा सकेगा, लेकिन क्या यह कदम जमीन पर असरदार होगा?

मध्यप्रदेश में अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए सरकार ने नियमों में संशोधन कर सख्ती का संकेत दिया है। अगर कोई ठेकेदार अवैध खनन करते पकड़ा जाता है तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकेगा। नीलामी प्रक्रिया से भी बाहर किया जा सकता है। सवाल यह है कि क्या यह सख्ती जमीन पर भी दिखेगी या केवल सरकारी फाइलों में रह जाएगी।



क्या है सरकार का नया फैसला

एमपी सरकार ने खनिज विभाग के नियमों में बदलाव करते हुए यह स्पष्ट किया है कि अवैध उत्खनन करने वाले ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी। अब ऐसे मामलों में ठेकेदार को सीधे ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान जोड़ा गया है ताकि वह भविष्य की नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा न ले सके।



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नए नियम में क्या-क्या बदलाव

  • सरकार के संशोधित प्रावधानों में कुछ अहम बिंदु जोड़े गए हैं।
  • अवैध उत्खनन करने वाले रेत ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जा सकेगा।
  • संबंधित ठेकेदार को आगामी नीलामी प्रक्रिया से बाहर रखा जा सकता है।
  • गंभीर मामलों में अनुबंध रद्द करने की कार्रवाई भी संभव होगी।
  • प्रशासन को फील्ड स्तर पर निगरानी और कार्रवाई का अधिकार दिया गया है।
  • सरकार का दावा है कि इन बदलावों से अवैध खनन पर अंकुश लगेगा।

क्या जमीन पर दिखेगी सख्ती?

खनन माफिया के खिलाफ सख्त आदेश पहले भी कई बार जारी हुए हैं। हर बार शुरुआत में प्रशासन सक्रिय दिखाई देता है, लेकिन कुछ दिनों बाद कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। यही वजह है कि अवैध खनन का कारोबार कई जिलों में लगातार जारी रहता है।



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अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती

फील्ड में कार्रवाई करना आसान नहीं होता। कई बार खनन माफिया का दबाव इतना अधिक होता है कि प्रशासनिक अमले को सीधे टकराव की स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चा भी अक्सर होती रहती है, जिससे कार्रवाई की गति प्रभावित होती है।



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पहले भी हो चुकी हैं गंभीर घटनाएं

मध्यप्रदेश में अवैध खनन को लेकर कई बार हिंसक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मुरैना जिले में एक आईपीएस की गोली मारकर हत्या का मामला पूरे प्रदेश को झकझोर चुका है। इसके अलावा कई जिलों में एसडीएम, तहसीलदार और अन्य अधिकारियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने या हमला करने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।



खनन माफिया का बढ़ता दबदबा

रेत और खनिज के अवैध कारोबार में भारी पैसा होने के कारण इस क्षेत्र में माफिया का नेटवर्क मजबूत माना जाता है। इसी वजह से प्रशासनिक कार्रवाई कई बार जोखिम भरी हो जाती है और अधिकारी भी सतर्कता बरतते हैं।



पहले भी हुए कई ऐलान, लेकिन असर सीमित

सरकारें समय-समय पर अवैध खनन रोकने के लिए नई योजनाएं और सख्त आदेश जारी करती रही हैं। लेकिन कुछ समय बाद वही पुरानी स्थिति लौट आती है। कई मामलों में शुरुआती कार्रवाई के बाद मामला धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाता है।



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असली परीक्षा अब अमले की

नए नियम और सख्त आदेश तभी असरदार होंगे जब फील्ड में तैनात अधिकारी और प्रशासनिक अमला पूरी गंभीरता से कार्रवाई करेगा। अगर निगरानी मजबूत रही और दबाव के बावजूद कार्रवाई जारी रही तो ही खनन माफिया पर लगाम लग सकेगी। सरकार का नया संशोधन अवैध खनन पर सख्ती का संकेत जरूर देता है।असल सवाल यह है कि यह फैसला लागू होगा या नहीं। क्या यह सरकारी फाइलों में एक और आदेश बनकर रह जाएगा?



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