मध्यप्रदेश सरकार ने अपनाया स्वदेशी मेल प्लेटफॉर्म जोहो, 45 दिन में ईमेल नहीं किया तो अकाउंट होगा इनएक्टिव
मध्य प्रदेश सरकार का स्वदेशी मेल प्लेटफॉर्म
यह पहल केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के राष्ट्रीय प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसका मकसद भारत की विदेशी क्लाउड स्टोरेज पर निर्भरता कम करना है।
हाल ही में भोपाल में राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (MP-SEDC) और NIC के अधिकारियों की अहम बैठक हुई थी। इसके बाद इस व्यवस्था को लेकर आधिकारिक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए।
45 दिन नहीं खुले तो खाता होगा बंद
नई व्यवस्था को लेकर सरकार ने काफी कड़े नियम बनाए हैं ताकि कोई भी ईमेल आईडी लावारिस न पड़ी रहे।
- महीने में एक बार लॉगिन: हर सरकारी कर्मचारी और अधिकारी को 30 दिन के अंदर कम से कम एक बार अपनी ईमेल आईडी खोलकर देखनी होगी।
- 45 दिन का नियम: अगर कोई कर्मचारी लगातार 45 दिनों तक अपने इनबॉक्स में लॉगिन नहीं करता है, तो सुरक्षा कारणों से वह ईमेल खाता अपने आप बंद यानी इनएक्टिव हो जाएगा।
- सालाना खर्च: सरकार इस सुरक्षित ईमेल व्यवस्था के रख-रखाव के लिए प्रति यूजर 2 हजार रुपए सालाना सेवा शुल्क चुकाएगी।
- डोमेन में कोई बदलाव नहीं: कर्मचारियों का ईमेल पता पहले की तरह ही रहेगा। इसमें कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा।
ईमेल आईडी का पता नहीं बदलेगा
अक्सर लोगों को लगता है कि नया प्लेटफॉर्म आने से उनका ईमेल पता भी बदल जाएगा, लेकिन यहां ऐसा बिल्कुल नहीं है। अधिकारियों और कर्मचारियों के ईमेल पते के पीछे लगने वाला आधिकारिक डोमेन पहले की तरह ही रहेगा।
बदलाव केवल पर्दे के पीछे हुआ है। पहले इसका बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर विदेशी कंपनियों जैसे गूगल या माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर पर चलता था, लेकिन अब यह भारतीय प्लेटफॉर्म जोहो के सुरक्षित क्लाउड पर चलेगा।
खुद का सुरक्षित इनबॉक्स और स्टोरेज
पुरानी व्यवस्था में कई सरकारी ईमेल आईडी केवल एक फॉरवर्डिंग एड्रेस की तरह काम करती थीं। उनका अपना कोई निजी इनबॉक्स या अलग से सर्वर स्टोरेज नहीं होता था, जहां पुराने सरकारी दस्तावेज लंबे समय तक सुरक्षित रह सकें।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर अधिकारी को एक अलग इनबॉक्स और सुरक्षित क्लाउड स्पेस मिलेगा। इससे कोई भी जरूरी ईमेल गायब नहीं होगा। साथ ही डेटा लीक होने का खतरा भी पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
स्वदेशी कंपनी जोहो को ही क्यों चुना गया?
जोहो भारत की एक जानी-मानी निजी आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनी है। इसकी सेवाएं काफी हद तक जीमेल और माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक जैसी हैं। इसमें ईमेल भेजने, फाइलें ऑनलाइन रखने और मीटिंग तय करने के लिए कैलेंडर जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
केंद्र सरकार ने खुली टेंडर प्रक्रिया और सुरक्षा जांच के बाद जोहो को सरकारी ईमेल सेवा देने के लिए चुना है।
इसके पीछे मुख्य वजहें ये हैं...
- देश के भीतर सर्वर: जोहो के सारे डेटा सर्वर भारत की सीमाओं के अंदर ही स्थित हैं।
- सरकारी नियंत्रण: यह पूरा सिस्टम एनआईसी (NIC) की सीधी निगरानी में काम करता है।
- सख्त सुरक्षा नियम: यह कंपनी कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) के सुरक्षा नियमों और जीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर के मानकों का पूरा पालन करती है।
इस पूरे कदम से मध्य प्रदेश सरकार का सारा जरूरी और गोपनीय कामकाज अब देश के भीतर ही पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।