MP में विजयादशमी पर होगा शस्त्र-पूजन कार्यक्रम, सीएम मोहन यादव इंदौर में करेंगे पूजा, 31 जिलों में मंत्री संभालेंगे जिम्मेदारी

Aman Vaishnav | Oct 19, 2026, 08:10 IST
मध्यप्रदेश में विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन कार्यक्रम होगा। सीएम मोहन इंदौर तो 24 जिलों में कलेक्टर-एसपी करेंगे पूजा
एमपी सरकार विजयादशमी के मौके पर पूरे प्रदेश में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित कर रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद इंदौर में होने वाले इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रदेश के 31 जिलों में मंत्री मौजूद रहकर शस्त्रों की विधिवत पूजा करेंगे। वहीं बाकी जिलों में कलेक्टर और एसपी शस्त्र-पूजन की जिम्मेदारी संभालेंगे।

एमपी सरकार का शस्त्र-पूजन उत्सव

बता दें कि हााल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस कार्यक्रम के महत्व पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा था कि शस्त्र-पूजन असल में हमारे देश की सैन्य ताकत, सुरक्षा और आजादी के प्रति सच्चे सम्मान का प्रतीक है। सीएम का कहना था कि विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की इस पुरानी परंपरा को हमें साहस, खुद की रक्षा और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की सीख से जोड़कर देखना चाहिए।



कौन सा दिग्गज किस जिले में करेगा शस्त्र पूजा

सरकार ने सभी प्रमुख मंत्रियों और नेताओं की जिम्मेदारियां पहले से तय कर दी हैं। प्रदेश के कुल 31 जिलों में सरकार के मंत्री खुद मौके पर मौजूद रहेंगे।



  • इंदौर: मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद इंदौर में शस्त्र-पूजन करेंगे।
  • ग्वालियर: विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर में शस्त्र-पूजन की अगुवाई करेंगे।
  • मंदसौर: डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा मंदसौर जिले के सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
  • रीवा: डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल रीवा में शस्त्र-पूजन करेंगे।
  • भोपाल: राजधानी भोपाल में मंत्री विश्वास सारंग पूजा-अर्चना करेंगे।
  • धार: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय धार में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे।
  • नरसिंहपुर: मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल नरसिंहपुर में पूजा करेंगे।
  • जबलपुर: मंत्री राकेश सिंह जबलपुर में शस्त्र-पूजन में शामिल होंगे।
  • सीहोर: मंत्री करण सिंह वर्मा सीहोर में मौजूद रहेंगे।
  • नर्मदापुरम: मंत्री उदय प्रताप सिंह नर्मदापुरम में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम की कमान संभालेंगे।

बाकी जिलों में कौन संभालेगा जिम्मेदारी?

प्रदेश के 31 जिलों में तो सरकार के मंत्रियों की सीधी मौजूदगी रहेगी। वहीं बाकी बचे 24 जिलों में मंत्रियों के शामिल न होने की वजह से प्रशासन को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मिलकर सरकारी शस्त्र-पूजन कार्यक्रम को पूरा कराएंगे।



शस्त्र पूजा का महत्व

बता दें कि सनातन परंपरा में शस्त्रों को सिर्फ हथियार नहीं माना जाता है। इन्हें शक्ति, साहस, अपनी रक्षा और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। शस्त्र पूजा का मकसद यह है कि ताकत का इस्तेमाल अन्याय के खिलाफ और धर्म की रक्षा के लिए किया जाए।



इसी वजह से विजयादशमी पर सैनिक, पुलिसकर्मी और सुरक्षा से जुड़े लोग अपने हथियारों की पूजा करते हैं। वहीं कारीगर, किसान और दूसरे कामों से जुड़े लोग अपने औजारों की पूजा करते हैं।



महाभारत से जुड़ी मान्यता

शस्त्र पूजा की परंपरा को महाभारत काल से भी जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने हथियार शमी के पेड़ के नीचे छिपा दिए थे। अज्ञातवास पूरा होने के बाद अर्जुन ने इसी पेड़ से अपने हथियार निकाले थे।



इसके बाद उन्होंने राजा विराट के राज्य की रक्षा के लिए कौरवों की सेना का सामना किया था। माना जाता है कि यह घटना आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हुई थी। इसी वजह से कई जगहों पर विजयादशमी के दिन शमी के पेड़ और शस्त्रों की पूजा की जाती है।



भगवान राम और दुर्गा की विजय

विजयादशमी का संबंध भगवान श्रीराम की रावण पर जीत से भी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीराम ने रावण का वध करके अधर्म का अंत किया था। वहीं, देवी महात्म्य की कथा में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने का जिक्र मिलता है। ये दोनों प्रसंग बुराई और अन्याय पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं। इसी भावना के साथ शस्त्र पूजा में शक्ति का इस्तेमाल सही कामों और धर्म की रक्षा के लिए करने का संकल्प भी लिया जाता है।



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