MP बनेगा और भी हाईटेक: एक फॉर्म पर मिलेगा घर का नक्शा और बिजली कनेक्शन
मध्यप्रदेश में अपना सपनों का घर बनाना अब सिरदर्द नहीं, बल्कि एक सुखद अनुभव होने वाला है। एमपी सरकार कागजी खानापूर्ति और दफ्तरों के चक्कर काटने की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदलने जा रही है। सीएम मोहन यादव की मंशा के अनुरूप, अब एक सिंगल विंडो के जरिए मकान का नक्शा पास कराने से लेकर बिजली कनेक्शन तक की सभी औपचारिकताएं एक साथ पूरी होंगी।
विभागों के चक्करों से मिलेगी मुक्ति
मध्य प्रदेश सरकार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए सिंगल एजेंसी क्लियरेंस सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसका पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है।
अब आपको फायर ब्रिगेड, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग या बिजली कंपनी के दरवाजे अलग-अलग नहीं खटखटाने होंगे। यह नया सिस्टम एक डिजिटल सेतु की तरह काम करेगा। यहां आवेदन से लेकर अंतिम मंजूरी तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होगी।
13 मई को मंत्रालय में होगा खास प्रजेंटेशन
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का विस्तृत प्रजेंटेशन 13 मई को मंत्रालय में दिया जाएगा। इस नई व्यवस्था में सबसे बड़ी राहत समय की होगी। जो काम पहले 30 से 90 दिनों में पूरा होता था, अब वह महज सात से 21 दिनों में सिमट जाएगा। सिस्टम ऐसा होगा कि नक्शा अपलोड होते ही सॉफ्टवेयर खुद-ब-खुद नियमों जैसे एफएआर (FAR - Floor Area Ratio), सेटबैक और ऊंचाई की जांच कर लेगा।
एक आवेदन पर ढेरों मंजूरियां
नए सिस्टम के तहत विभागों के अलग-अलग फॉर्म भरने की झंझट खत्म हो जाएगी। अब आवेदकों को सिर्फ एक कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म भरना होगा। इसमें फायर, पानी, सीवर, बिजली और पर्यावरण जैसे सभी विभागों की मंजूरियां एक साथ मिलेंगी।
सबसे खास बात यह है कि अब अलग-अलग विभागों के अधिकारी अलग-अलग समय पर निरीक्षण करने नहीं आएंगे। वहीं, सभी विभागों का एक संयुक्त दल एक ही बार में साइट विजिट करेगा।
तय समय सीमा और डीम्ड अप्रूवल का नियम
नगर निगम अब इस पूरी प्रक्रिया में नोडल एजेंसी की भूमिका निभाएगा। सरकार ने इसके लिए सख्त समय सीमा तय की है। यदि कोई विभाग तय समय में जवाब नहीं देता है, तो उसे डीम्ड अप्रूवल यानी स्वतः मंजूरी मान लिया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर, लेबर विभाग में जो काम 30 दिन लेता था, वह अब पांच दिन में होगा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी का समय 120 दिन से घटाकर 21 दिन करने का लक्ष्य रखा गया है।
आम आदमी को मिले राहत- सीएम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि बिल्डिंग परमिशन और कंपाउंडिंग की प्रक्रिया इतनी सरल होनी चाहिए कि एक आम आदमी उसे आसानी से समझ सके। उन्होंने कहा कि लोग अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी से घर बनाते हैं, ऐसे में उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्करों से बचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अधिकृत आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चरल इंजीनियरों के प्रमाणीकरण को भी इस सिस्टम में प्रमुखता दी गई है।
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