MP में अब कोई बेटी नहीं रहेगी अनपढ़, 10 मार्च से शुरू होगा सरस्वती अभियान

Anjali Dwivedi | Mar 07, 2026, 15:50 IST
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मध्य प्रदेश सरकार 10 मार्च से सरस्वती अभियान शुरू करेगी। इसके तहत स्कूल छोड़ चुकी छात्राओं को ओपन स्कूल के माध्यम से दोबारा पढ़ाई पूरी करने और भविष्य संवारने का मौका मिलेगा।

News In Short

  • स्कूल छोड़ चुकीं लड़कियों को 8वीं, 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने का मौका मिलेगा।
  • 10 मार्च को मुख्यमंत्री मोहन यादव भोपाल में शुरुआत करेंगे।
  • राज्य ओपन स्कूल प्रणाली के जरिए पढ़ाई और परीक्षाएं होंगी।
  • छात्राओं को मुफ्त स्टडी मटेरियल, काउंसलिंग और मार्गदर्शन मिलेगा।
  • महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा और बाल विवाह पर अंकुश लगेगा।

News In Detail

MP News. मध्य प्रदेश की उन बेटियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगी है, जिनकी पढ़ाई किन्हीं कारणों से बीच में ही छूट गई थी। राज्य सरकार जल्द हीसरस्वती अभियानशुरू करने जा रही है। इसका लक्ष्य सामाजिक, पारिवारिक या आर्थिक तंगी के कारण स्कूल छोड़ चुकी लड़किओं को दोबारा शिक्षा से जोड़कर उनका भविष्य संवारना है।



10 मार्च को सीएम करेंगे शुरुआत

इस महत्वपूर्ण अभियान का शुभारंभ 10 मार्च को होने जा रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में इसकी शुरुआत करेंगे। इस मौके पर शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित शिक्षा जगत की कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहेंगी।



बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को मिलेगी नई ताकत

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित यह अभियान केंद्र सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का ही एक हिस्सा है। अक्सर देखा गया है कि आर्थिक तंगी या घरेलू जिम्मेदारियों के बोझ तले लड़कियां 8वीं, 10वीं या 12वीं के बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं। सरकार अब इन्हीं ड्रॉप-आउट छात्राओं को तलाश कर उन्हें फिर से किताबों से जोड़ने का लक्ष्य बना रही है।



ओपन स्कूल बनेगा छात्राओं का सहारा

छात्राओं को नियमित स्कूल जाने की बाध्यता न रहे, इसलिए उन्हें राज्य ओपन स्कूल प्रणाली के जरिए पढ़ाई पूरी करने का विकल्प दिया जाएगा। इसके माध्यम से वे 8वीं, 10वीं और 12वीं की परीक्षा दे सकेंगी। सरकार छात्राओं को अध्ययन सामग्री, संपर्क कक्षाएं और विशेषज्ञों से शैक्षणिक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराएगी। ताकि वे बेहतर अंकों के साथ सफल हो सकें।



घर-घर पहुंचेगी सरकार

अभियान को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए सरकार सबसे पहले एक विस्तृत सर्वेक्षण करेगी। इसमें उन लड़कियों को चिन्हित किया जाएगा जिन्होंने स्कूल छोड़ दिया है। पहचान होने के बाद उनका नामांकन ओपन स्कूल में कराया जाएगा। परीक्षा पास करने के बाद उन्हें आधिकारिक सर्टिफिकेट भी मिलेगा, जो उनके भविष्य के रोजगार और उच्च शिक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा।



अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से न केवल स्कूल छोड़ने की दर में कमी आएगी, बल्कि लड़कियों के आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होगी। जब बेटियां शिक्षित होंगी, तो बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी समाज खड़ा हो सकेगा। यह अभियान सिर्फ साक्षरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम है।



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