भोपाल गोमांस केस: SIT ने पेश किया 500 पन्नों का चालान, गोमांस की पुष्टि

भोपाल के चर्चित गोमांस मामले में SIT ने कोर्ट में 500 पन्नों का चालान पेश किया है। मथुरा लैब की रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि जब्त मांस गाय का ही था। इसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Amresh Kushwaha
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BHOPAL. राजधानी भोपाल के चर्चित गोमांस से भरे कंटेनर मामले में एसआईटी (SIT) ने अपनी जांच पूरी कर ली है।

पुलिस मुख्यालय (PHQ) के सामने 26 टन से ज्यादा मांस पकड़े जाने के इस मामले में अब सबूत भी सामने आ गए हैं।

मथुरा स्थित लैब की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि कंटेनर में जो मांस था, वह किसी और जानवर का नहीं, बल्कि गाय का ही था।

गुपचुप तरीके से कोर्ट में चालान पेश

आरोपी की गिरफ्तारी के ठीक 56 दिन बाद, गुरुवार, 05 मार्च को एसआईटी ने स्थानीय अदालत में अपना चालान पेश किया था।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने काफी गोपनीय तरीके से करीब 500 पन्नों का दस्तावेज न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया।

इस चालान में पुलिस ने पूरी कोशिश की है कि वो सभी कड़ियों को जोड़ सके, जो इस पूरे षड्यंत्र (Conspiracy) की तरफ इशारा करती हैं।

17 दिसंबर की वो रात और 26 टन मांस का जखीरा

यह पूरा मामला 17 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ था। इस दौरान जय मां भवानी हिंदू संगठन के प्रमुख भानू हिंदू और उनकी टीम ने एक संदिग्ध कंटेनर को रोका था।

जांच करने पर पता चला कि उसमें 265 क्विंटल (करीब 26.5 टन) मांस अलग-अलग पैकेट में भरा हुआ था। यह मांस भोपाल नगर निगम के स्लॉटर हाउस से निकला था। इसका संचालन असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा कर रहा था।

मथुरा लैब की रिपोर्ट ने खोली पोल

घटना के अगले दिन 18 दिसंबर को वेटनरी डॉक्टरों की टीम ने मांस के 5 अलग-अलग सैंपल लिए थे। इन सैंपल्स को जांच के लिए फॉरेंसिक लेबोरेटरी, मथुरा भेजा गया था। 5 जनवरी को आई रिपोर्ट ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

रिपोर्ट में साफ लिखा था कि जब्त किया गया मांस गोवंश का है। इसी रिपोर्ट के आधार पर 7 जनवरी को मुख्य आरोपी असलम और ड्राइवर शोएब को गिरफ्तार किया गया था।

डॉक्टर के दावे और जमीनी हकीकत में अंतर

हैरानी की बात यह है कि इस मामले में वेटनरी डॉक्टर गौर ने 17 दिसंबर 2025 को एक प्रमाण पत्र जारी किया था। इसमें दावा किया गया था कि स्लॉटर हाउस में बीते दो हफ्तों में 15 वर्ष से अधिक उम्र की 85 भैंसों को मारा गया है।

वहीं, लैब रिपोर्ट ने इस दावे को पूरी तरह झुठला दिया है। इसी लापरवाही के चलते डॉ. गौर को सस्पेंड कर दिया गया है। अब सवाल यह है कि क्या स्लॉटर हाउस में वास्तव में गायों की हत्या हो रही थी या निगम स्तर पर गलत सर्टिफिकेट जारी किए गए?

जल्दबाजी में अधूरा चालान?

जानकारी के अनुसार, कानूनी गलियारों में चर्चा है कि पुलिस ने चालान पेश करने में थोड़ी जल्दबाजी दिखाई है। हालांकि मथुरा लैब की रिपोर्ट को आधार बनाया गया है।

वहीं, खबर है कि हैदराबाद लैब की विस्तृत जांच रिपोर्ट अभी तक चालान का हिस्सा नहीं बन पाई है। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफमध्यप्रदेश गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

भोपाल गोमांस मामले की टाइमलाइन

17 दिसंबर 2025:

पुलिस मुख्यालय (PHQ) के सामने एक ट्रक को रोका गया था। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने हंगामा और तोड़-फोड़ की थी। मौके पर पहुंची पुलिस और अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया था। गोमांस के दावे के बाद ट्रक को जब्त कर लिया गया था। सैंपल राज्य पशु चिकित्सालय, जहांगीराबाद भेजे गए थे।

18 दिसंबर 2025:

26 टन मांस के सैंपलिंग की गई और जांच के लिए मथुरा की लैब भेजा गया था।

12 जनवरी 2026:

लैब की रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई थी। इसमें गोमांस की पुष्टि हुई थी। स्लॉटर हाउस संचालक असलम चमड़ा और ड्राइवर शोएब को गिरफ्तार किया गया था। हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया था। आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया था।

19 जनवरी 2026:

SIT गठित की गई थी। इसमें ACP उमेश तिवारी सहित 2 टीआई को जांच सौंपी गई थी।

21 जनवरी 2026:

महापौर मालती राय के इस्तीफे की मांग उठी थी। साथ ही, हिंदू संगठनों ने हंगामा किया था।

22 जनवरी 2026:

SIT ने असलम चमड़ा और ड्राइवर शोएब को 25 जनवरी तक रिमांड पर लिया था।

05 मार्च 2026:

एसआईटी ने स्थानीय अदालत में करीब 500 पन्नों का चालान पेश किया था।

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