MP हाई कोर्ट ने IAS विवेक पोरवाल और संदीप जीआर के खिलाफ जारी किया गिरफ्तारी वारंट

Neel Tiwari | Sept 13, 2026, 07:32 IST
आईएएस विवेक पोरवाल और आईएएस संदीप जीआर
आईएएस विवेक पोरवाल और आईएएस संदीप जीआर
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने आदेश का पालन नहीं होने पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने दो IAS अधिकारियों विवेक पोरवाल और संदीप जीआर पर गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। दोनों को 21 सितंबर को कोर्ट में पेश करना होगा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • शीला सेन ने नियमितीकरण को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी।
  • कोर्ट ने 19 मार्च 2025 को 90 दिन में फैसला करने को कहा था।
  • तय समय बीतने के बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ।
  • इसके बाद शीला सेन ने अवमानना याचिका दायर कर दी।
  • अब कोर्ट ने दोनों अधिकारियों की पेशी के लिए वारंट जारी किया है।

विवेक पोरवाल और संदीप जीआर पर हाईकोर्ट सख्त

हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर ने दो IAS अधिकारियों पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इनमें आईएएस विवेक पोरवाल और आईएएस संदीप जीआर शामिल हैं। दोनों को 21 सितंबर को हाईकोर्ट में पेश करना होगा। यह आदेश जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने दिया है। मामला कोर्ट के पुराने आदेश के पालन से जुड़ा है।



शीला सेन के नियमितीकरण से जुड़ा है पूरा विवाद

शीला सेन सागर कलेक्टर कार्यालय में सेक्शन ऑफिसर हैं। उन्होंने नियमितीकरण को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले में हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2025 को आदेश दिया था। कोर्ट ने सरकार और सागर कलेक्टर को फैसला करने को कहा था। इसके लिए अदालत ने 90 दिन का समय दिया था। समय बीत गया, लेकिन आदेश पर कार्रवाई नहीं हुई।



आदेश नहीं मानने पर अवमानना तक पहुंचा मामला

आदेश पर समय से कार्रवाई नहीं होने पर शीला सेन फिर कोर्ट पहुंचीं। उन्होंने अवमानना याचिका दायर कर दी। यह याचिका क्रमांक 4449/2025 के तहत दर्ज हुई। मामले में विवेक पोरवाल और संदीप जीआर भी पक्षकार हैं। याचिका पर जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने सुनवाई की। शीला सेन की ओर से अधिवक्ता कविता गुप्ता ने पैरवी की। उनके साथ विद्या प्रसाद भी अदालत में मौजूद रहे।





नोटिस मिलने के बाद भी दोनों अधिकारी नहीं पहुंचे

कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। यह नोटिस सितंबर 2025 में तामील हो चुका था। यानी दोनों अधिकारियों को मामले की जानकारी थी। इसके बावजूद कोर्ट में उनकी ओर से कोई वकील नहीं आया। अदालत में कोई अनुपालन रिपोर्ट भी पेश नहीं की गई। इसी बात पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।



सागर कलेक्टर ने सिर्फ संपर्क अधिकारी नियुक्त किया

सागर कलेक्टर ने 3 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट को पत्र भेजा था। इस पत्र में तहसीलदार को संपर्क अधिकारी बताया गया था। उन्हें अवमानना मामले की निगरानी के लिए जिम्मेदारी दी गई थी। कोर्ट के मुताबिक इसके बाद जरूरी कार्रवाई नहीं हुई। कोई वकील नियुक्त नहीं किया गया। अदालत में अनुपालन रिपोर्ट भी पेश नहीं हुई।



कोर्ट ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए

हाईकोर्ट ने अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि दोनों अधिकारी मामले से पूरी तरह परिचित थे। उन्हें नोटिस मिलने की जानकारी भी थी। इसके बावजूद अदालत में जरूरी कदम नहीं उठाए गए। कोर्ट ने प्रशासन की इस स्थिति को बेहद खेदजनक बताया। अदालत ने सिर्फ पत्र भेजने के तरीके पर भी सवाल उठाया।



कोर्ट ने कहा, अब वारंट के अलावा विकल्प नहीं

अदालत ने अपने आदेश में बेहद सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि अब दूसरा रास्ता नहीं बचा है। इसके बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। कोर्ट ने उनकी पेशी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यह आदेश 10 सितंबर 2026 को जारी हुआ। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।



भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर एसपी करेंगे पेशी सुनिश्चित

कोर्ट ने दोनों अधिकारियों की पेशी की जिम्मेदारी पुलिस को दी है। विवेक पोरवाल के लिए भोपाल पुलिस कमिश्नर जिम्मेदार होंगे। संदीप जीआर के लिए सागर एसपी जिम्मेदार होंगे। दोनों पुलिस अधिकारियों को पेशी सुनिश्चित करनी होगी। दोनों अधिकारियों को 21 सितंबर को अदालत के सामने पेश करना है। अब अगली सुनवाई पर उनकी मौजूदगी अहम होगी।



कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर साफ संदेश

इस मामले में हाईकोर्ट का रुख बेहद अहम है। अदालत ने आदेशों के पालन को लेकर सख्त संदेश दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद समय पर कार्रवाई जरूरी होती है। कार्रवाई नहीं होने पर अवमानना का मामला बन सकता है। इस मामले में पुराना आदेश भी नहीं माना गया। अवमानना मामले में भी जरूरी कदम नहीं उठे। इसके बाद अदालत ने व्यक्तिगत पेशी का रास्ता चुना।



21 सितंबर की सुनवाई पर रहेगी नजर

अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी। उस दिन दोनों अधिकारियों की पेशी होनी है। पुलिस को उनकी पेशी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामला काफी गंभीर हो गया है। अब अगली सुनवाई में आगे की स्थिति साफ होगी।



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