IAS तबादले: मुकेश गुप्ता का वनवास खत्म हुआ, विवेक पोरवाल का भी कम बैक
Harish Divekar | Jun 17, 2026, 21:32 IST
आईएएस तबादले की इनसाइड स्टोरी
मध्य प्रदेश के IAS तबादले के पीछे की असली कहानी सामने आई है। मुकेश गुप्ता और विवेक पोरवाल की वापसी हुई है। आलोक सिंह को माइनिंग विभाग से शिकायतों के चलते हटाया गया। शिलेंद्र सिंह को अवार्ड के बदले रीवा कमिश्नर बनाया गया।
मध्य प्रदेश में हुए हाल के IAS (Indian Administrative Service) अफसरों के तबादले की सतह के नीचे एक दिलचस्प कहानी छिपी है। यह तबादला सिर्फ रूटीन प्रशासनिक बदलाव नहीं है। इसके पीछे कई महीनों की राजनीति, विवाद और इंतजार जुड़ा हुआ है। कुछ अधिकारियों की लंबे समय बाद मुख्यधारा में वापसी हुई है। वहीं कुछ अधिकारियों को अचानक साइड कर दिया गया है।
इस पूरे फेरबदल में सबसे दिलचस्प नाम मुकेश गुप्ता का है। वे लंबे समय से लूप लाइन में थे। इससे पहले सहकारिता विभाग में एक विवाद के बाद उन्हें हटाया गया था। उस समय उन्हें राजभवन भेज दिया गया था। हालांकि राज्यपाल ने कुछ समय के अंदर ही उनकी सेवाएं वापस लौटा दी थीं। इसके बाद उन्हें मानवाधिकार आयोग में भेजा गया था। यह एक तरह का प्रशासनिक वनवास माना जा रहा था। अब नए आदेश के साथ मुकेश गुप्ता की मुख्यधारा में वापसी हो गई है।
आईएएस विवेक कुमार पोरवाल की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। हर तबादला सूची में उनका नाम चर्चा में रहता था। लेकिन आदेश जारी होने से पहले ही उनका नाम सूची से हट जाता था। यह सिलसिला काफी समय से चल रहा था। अब इस बार उन्हें खनिज साधन विभाग की जिम्मेदारी मिल गई है। प्रशासनिक हलकों में इस विभाग को मलाईदार विभाग माना जाता है। इसलिए पोरवाल की यह नई पोस्टिंग खास मानी जा रही है।
भोपाल कमिश्नर की कुर्सी पर भी दिलचस्प घटनाक्रम हुआ। संजीव सिंह को भोपाल संभाग के आयुक्त पद से हटा दिया गया है। दरअसल, उनका हटना करीब चार महीने पहले ही तय हो गया था। उस समय आईएएस कर्मवीर शर्माका नाम भी भोपाल कमिश्नर के लिए फाइनल हो गया था। लेकिन एक बड़ी वजह से यह बदलाव टल गया था
दरअसल, उस दौर में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया था। इसका असर देश में गैस संकट जैसे हालात पर पड़ा था। इस वजह से सरकार ने कर्मवीर शर्मा को कुछ समय के लिए खाद्य विभाग में ही रोक दिया था। उस समय खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को संभालना ज्यादा जरूरी समझा गया। अब हालात सामान्य होने के बाद कर्मवीर शर्मा को भोपाल कमिश्नर की कुर्सी मिल गई है।
दीपक सिंह की कहानी भी मुख्यधारा में वापसी की है। पहले उन्हें इंदौर कमिश्नर पद से हटाया गया था। इसके बाद उन्हें राज्य निर्वाचन आयोग में भेज दिया गया था, जिसे लूप लाइन पोस्टिंग माना जाता है। दीपक सिंह लंबे समय से सहकारिता विभाग में पोस्टिंग पाने की कोशिश में थे। अब इस तबादले में उन्हें यह विभाग मिल गया है।
इस पूरे तबादले में सबसे चौंकाने वाला नाम आलोक कुमार सिंह का रहा। वे मुख्यमंत्री के सचिव थे और साथ ही खनिज साधन जैसा भारी भरकम विभाग भी संभाल रहे थे। यह विभाग प्रशासनिक नजरिए से बहुत अहम माना जाता है। लेकिन अचानक उन्हें इस जिम्मेदारी से हटा दिया गया। उन्हें पंजीयन महानिरीक्षक एवं अधीक्षक का पद दिया गया है।
बताया जा रहा है कि खनिज साधन विभाग में मिली शिकायतों के चलते उनकी यह रवानगी हुई है। यह बदलाव प्रशासनिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधा जुड़ाव खत्म होना किसी भी अधिकारी के लिए बड़ा संकेत माना जाता है।
दिनेश श्रीवास्तव का तबादला भी चर्चा में है। उनकी कार्यप्रणाली को धीमा बताया जा रहा था। इसी वजह से उन्हें राज्य निर्वाचन आयोग भेज दिया गया, जो एक तरह की लूप लाइन पोस्टिंग मानी जाती है। यह बदलाव दिखाता है कि सरकार कामकाज की गति को लेकर भी सख्त नजर रख रही है।
शिलेंद्र सिंह को रीवा संभाग का नया आयुक्त बनाया गया है। इसके पीछे एक खास वजह बताई जा रही है। छिंदवाड़ा में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने वाश ऑन व्हील्स नाम से एक सफाई अभियान चलाया था। इस अभियान को बाद में प्रधानमंत्री एक्सीलेंस अवार्ड मिला था। इसी उपलब्धि के आधार पर उन्हें कमिश्नर का पद दिया गया है।
हालांकि इस अवार्ड को लेकर एक विवाद भी हुआ था। अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी ने इस अभियान का क्रेडिट जिला पंचायत सीईओ रहे अग्रिम जैन को दिया था। इसके बाद डायरेक्ट IAS और प्रमोटी IAS अधिकारियों के बीच यह मुद्दा बन गया था। बाद में मुख्य सचिव ने इस विवाद को शांत करने के लिए IAS अधिकारियों के समूह में शिलेंद्र सिंह को बधाई भी दी थी। अब उन्हें रीवा कमिश्नर बनाकर एक तरह से पुरस्कृत किया गया है।
पूर्व मुख्य सचिव के बेटे अमनबीर सिंह को भी इस तबादले में लूप लाइन में भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव के साथ उनकी पटरी नहीं बैठ रही थी। इस आपसी तनाव का असर अंत में उनकी पोस्टिंग पर पड़ा।
अरविंद कुमार शाह को आयुष्मान भारत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। पहले वे स्मार्ट सिटी जबलपुर के सीईओ थे। अरविंद पहले भी एक विवाद के चलते चर्चा में आए थे। उन्होंने पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह के साथ विवाद के बाद मुख्य सचिव और IAS एसोसिएशन को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने मंत्री की शिकायत भी की थी। बाद में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद यह मामला शांत हो गया था। अब उन्हें नई जिम्मेदारी देकर एक तरह से सामान्य पोस्टिंग वापस की गई है।
साफ है कि प्रशासनिक बदलाव सिर्फ कागजी आदेश नहीं होते। इनके पीछे लंबा इंतजार, विवाद, इनाम और कभी कभी राजनीतिक समीकरण भी जुड़े होते हैं। आने वाले समय में इन अधिकारियों की नई जिम्मेदारियों पर सभी की नजर रहेगी।
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मुख्यधारा में लौटे मुकेश गुप्ता
विवेक पोरवाल का भी हुआ कमबैक
चार महीने पहले से तय था संजीव सिंह का जाना
दरअसल, उस दौर में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया था। इसका असर देश में गैस संकट जैसे हालात पर पड़ा था। इस वजह से सरकार ने कर्मवीर शर्मा को कुछ समय के लिए खाद्य विभाग में ही रोक दिया था। उस समय खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को संभालना ज्यादा जरूरी समझा गया। अब हालात सामान्य होने के बाद कर्मवीर शर्मा को भोपाल कमिश्नर की कुर्सी मिल गई है।
दीपक सिंह की कहानी भी मुख्यधारा में वापसी की है। पहले उन्हें इंदौर कमिश्नर पद से हटाया गया था। इसके बाद उन्हें राज्य निर्वाचन आयोग में भेज दिया गया था, जिसे लूप लाइन पोस्टिंग माना जाता है। दीपक सिंह लंबे समय से सहकारिता विभाग में पोस्टिंग पाने की कोशिश में थे। अब इस तबादले में उन्हें यह विभाग मिल गया है।
आलोक सिंह की कुर्सी जाने की असली वजह
बताया जा रहा है कि खनिज साधन विभाग में मिली शिकायतों के चलते उनकी यह रवानगी हुई है। यह बदलाव प्रशासनिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधा जुड़ाव खत्म होना किसी भी अधिकारी के लिए बड़ा संकेत माना जाता है।
दिनेश श्रीवास्तव की कार्यप्रणाली पर सवाल
शिलेंद्र सिंह को अवार्ड का मिला ईनाम
हालांकि इस अवार्ड को लेकर एक विवाद भी हुआ था। अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी ने इस अभियान का क्रेडिट जिला पंचायत सीईओ रहे अग्रिम जैन को दिया था। इसके बाद डायरेक्ट IAS और प्रमोटी IAS अधिकारियों के बीच यह मुद्दा बन गया था। बाद में मुख्य सचिव ने इस विवाद को शांत करने के लिए IAS अधिकारियों के समूह में शिलेंद्र सिंह को बधाई भी दी थी। अब उन्हें रीवा कमिश्नर बनाकर एक तरह से पुरस्कृत किया गया है।
अमनबीर सिंह की वरिष्ठ अधिकारी से नहीं बनी पटरी
मंत्री से विवाद के बावजूद अरविंद शाह को मिला नया मौका
साफ है कि प्रशासनिक बदलाव सिर्फ कागजी आदेश नहीं होते। इनके पीछे लंबा इंतजार, विवाद, इनाम और कभी कभी राजनीतिक समीकरण भी जुड़े होते हैं। आने वाले समय में इन अधिकारियों की नई जिम्मेदारियों पर सभी की नजर रहेगी।
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