बिना चेयरमैन बंद पड़ा रेरा कोर्ट, सरकार ने मांगे 4 महीने, HC ने याचिकाकर्ता के लोकस पर उठाए सवाल

Neel Tiwari | Apr 25, 2026, 14:33 IST
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मध्य प्रदेश में रेरा कोर्ट में चेयरमैन के रिटायर होने के बाद कामकाज ठप है। एक ओर जहां सरकार ने नियुक्ति के लिए चार महीने का समय मांगा, जिस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी। वहीं ताजा सुनवाई में याचिकाकर्ता की वैधता पर भी सवाल उठे हैं।

अध्यक्ष के रिटायर होते ही ठप पड़ा REAT

मध्यप्रदेश में रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण (REAT) में अध्यक्ष के 14 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त होते ही पूरा सिस्टम ठप हो गया। अध्यक्ष के बिना ट्रिब्यूनल में आवश्यक कोरम नहीं बचा, जिससे रियल एस्टेट से जुड़े अपील मामलों की सुनवाई पूरी तरह बंद हो गई। इसका असर सीधे उन लोगों पर पड़ रहा है जो अपने मामलों के निपटारे के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।



कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया में देरी पर दिखाई सख्ती

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि कानून के अनुसार अध्यक्ष के रिटायर होने से पहले ही नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी। वहीं, राज्य सरकार की ओर से समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अधिकारियों से जवाब तलब किया और पूछा कि आखिर तय नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ।





सरकार ने मांगा 4 महीने का समय, कोर्ट ने जताई नाराजगी

पहले हुई इस मामले की सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए 4 महीने का अतिरिक्त समय मांगा था। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई थी और कहा कि ऐसी देरी से न्यायिक व्यवस्था प्रभावित होती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि प्रशासनिक सुस्ती के कारण जनता को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।



ताजा सुनवाई में याचिकाकर्ता की वैधता पर उठे सवाल

24 अप्रैल 2026 की सुनवाई में जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की बेंच ने याचिकाकर्ता संस्था रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की लोकस यानी याचिका दायर करने के अधिकार पर सवाल उठाए।



कोर्ट ने पूछा कि संस्था कहां पंजीकृत है और उसे जनहित याचिका दाखिल करने का अधिकार कैसे मिला। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि वह रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसाइटीज में पंजीकृत संस्था है। इस संबंध में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा गया।



अंतरिम राहत की मांग पर भी स्पष्ट रुख

याचिकाकर्ता ने यह मांग रखी कि नई नियुक्ति होने तक पुराने अध्यक्ष को पद पर बने रहने दिया जाए, ताकि कामकाज जारी रह सके। हालांकि कोर्ट ने इस पर तुरंत कोई राहत नहीं दी और पहले याचिकाकर्ता की वैधता स्पष्ट करने पर जोर दिया।



29 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2026 को होगी। कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार पर जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही, याचिकाकर्ता को भी अपनी वैधता साबित करनी होगी।



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