इंदौर हाईकोर्ट में 6 जस्टिस की कमी, 1.22 लाख केस लंबित, बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को बताईं समस्याएं
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन मिला चीफ जस्टिस से
चीफ जस्टिस ने इंदौर प्रवास के दौरान विभिन्न मामलों की सुनवाई भी की। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (High Court Bar Association) के अध्यक्ष मनीष यादव ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान एसोसिएशन की पूरी कार्यकारिणी भी मौजूद रही। एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस को विभिन्न समस्याओं की जानकारी दी। अध्यक्ष यादव ने जस्टिस की कमी से जुड़े आंकड़े भी प्रस्तुत किए। उन्होंने मामलों की सुनवाई में हो रही देरी की जानकारी दी। एसोसिएशन ने इंदौर में तीन अतिरिक्त जजों की नियुक्ति की मांग की।
इंदौर में 14 पद, केवल 8 जस्टिस पदस्थ
अध्यक्ष यादव ने बताया कि इंदौर हाईकोर्ट में जस्टिस के 14 पद स्वीकृत हैं। फिलहाल केवल आठ जस्टिस पदस्थ हैं। छह पद खाली होने से मौजूदा जस्टिस पर काम का बोझ बढ़ रहा है। एसोसिएशन ने तीन अतिरिक्त जस्टिस की नियुक्ति की मांग की। इससे लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आ सकेगी। एसोसिएशन के अनुसार मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में वर्तमान में कुल 38 जस्टिस पदस्थ हैं। जबकि वर्षों पहले जस्टिस के 54 पद स्वीकृत किए गए थे।
प्रदेश के कुल लंबित मामलों में इंदौर की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत है। केस पंजीयन करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी कम है। एसोसिएशन ने कर्मचारियों के नए पद सृजित करने की मांग की। इन पदों पर जल्द भर्ती करने का भी आग्रह किया गया। चीफ जस्टिस ने इंदौर में दो जस्टिस की नियुक्ति का आश्वासन दिया।
इंदौर में रोज आ रहे 300 नए केस
एसोसिएशन के अनुसार इंदौर हाईकोर्ट(Indore High Court) में फिलहाल 1 लाख 22 हजार 729 मामले लंबित हैं। यहां प्रतिदिन करीब 300 नए मामले दर्ज हो रहे हैं। जस्टिस की कमी से मौजूदा बेंचों पर काम का बोझ बढ़ रहा है। इससे मामलों की सुनवाई में लगातार देरी हो रही है।
बेदखली और संपत्ति विवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई भी प्रभावित हो रही है। दीवानी मामलों के निपटारे में भी देरी हो रही है। एफआईआर निरस्त करने और जमानत संबंधी मामलों का भी काफी बोझ है। इसके चलते कई बार रोजाना सूचीबद्ध सभी मामलों की सुनवाई नहीं हो पाती।
छह हजार सदस्यों के लिए जगह कम
बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट परिसर में अतिरिक्त जगह उपलब्ध कराने की मांग भी की। एसोसिएशन के अनुसार अधिवक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में एसोसिएशन के करीब छह हजार सदस्य हैं। इनके लिए केवल एक हॉल और दो छोटे कमरे उपलब्ध हैं।
एसोसिएशन ने अपील अनुभाग का खाली परिसर उपलब्ध कराने का आग्रह किया। इससे अधिवक्ताओं को बैठने और अन्य गतिविधियों के लिए अतिरिक्त जगह मिल सकेगी।
हाईकोर्ट में पार्किंग की समस्या भी उठाई
एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस के सामने पार्किंग की समस्या भी रखी। हाईकोर्ट परिसर में वाहनों की पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। कार पार्किंग की व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों की भी कमी है। एसोसिएशन ने इन समस्याओं के जल्द समाधान की मांग की। चीफ जस्टिस ने मांगों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।