एमपी में रोजाना 130 महिलाएं लापता, आंकड़े छिपाने पर सरकार समेत आठ को नोटिस

Aman Vaishnav | Aug 14, 2026, 09:00 IST
एमपी में रोजाना 130 महिलाएं लापता
एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने राज्य में लापता महिलाओं और बच्चों के आंकड़े छिपाने के मामले पर सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में राज्य सरकार समेत 8 पक्षों को नोटिस भेजा है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • इंदौर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
  • मामला लापता महिलाओं और बच्चों से जुड़ा है।
  • एक जनहित याचिका में सरकारी आंकड़े सार्वजनिक न करने का आरोप लगाया गया है।
  • याचिका के मुताबिक 2020 से अब तक करीब 2.74 लाख महिलाएं लापता हुई हैं।
  • कोर्ट ने राज्य सरकार समेत 8 प्रतिवादियों से जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में एक जनहित याचिका दायर हुई थी। इसमें महिलाओं और बच्चों के लापता होने के मामलों का जिक्र है।



याचिका में सरकारी आंकड़े सार्वजनिक न करने की बात कही गई है। कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और 7 अन्य प्रतिवादियों को नोटिस भेजा है। सभी से जवाब मांगा गया है।





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किसने दायर की याचिका

यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत पांडे ने दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता शुभम मांडल ने पैरवी की। याचिका में एनसीआरबी (NCRB – National Crime Records Bureau) का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि 2024 के बाद लापता महिलाओं और बच्चों के अपडेट आंकड़े जारी नहीं किए गए।



2.74 लाख महिलाएं लापता

याचिका में एक चौंकाने वाला आंकड़ा दिया गया है। इसके मुताबिक 2020 से 28 जनवरी 2026 तक प्रदेश में 2 लाख 74 हजार 311 महिलाएं और लड़कियां लापता हुईं।



यह आंकड़ा औसतन रोज करीब 130 महिलाओं के लापता होने के बराबर बताया गया है। याचिका में इन आंकड़ों की सत्यता जांचने की मांग की गई है। साथ ही तलाश और बरामदगी की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया है।





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आरटीआई से भी नहीं मिला जवाब

जानकारी के अनुसार याचिकाकर्ता ने पहले आरटीआई का सहारा लिया था। तीन अलग-अलग एजेंसियों से जानकारी मांगी गई थी। इनमें जिला अपराध अभिलेख ब्यूरो, राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो और राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो शामिल हैं।



इनसे 1 जनवरी 2021 से 30 जून 2026 तक का डेटा मांगा गया था। यह डेटा इंदौर जिले के लिए माहवार और वर्षवार मांगा गया था।



तलाश और लंबित मामलों की जानकारी भी मांगी

याचिका में तलाश अभियान की जानकारी भी मांगी गई है। इसमें बताया जाना है कि कितने लापता लोगों को अब तक ढूंढा गया।



साथ ही यह भी पूछा गया कि कितने मामले अभी भी लंबित हैं। इन लंबित मामलों की मौजूदा स्थिति भी स्पष्ट करने को कहा गया है। लेकिन याचिकाकर्ता के मुताबिक आरटीआई से भी यह जानकारी नहीं मिल सकी।





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याचिका में क्या मांग की गई

याचिका में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई हैं। पहली, लापता लोगों के पूरे आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं। दूसरी, तलाश और बरामदगी की जानकारी नियमित रूप से जारी हो।



तीसरी, इस पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की जाए। कोर्ट के नोटिस के बाद अब सरकार को इन सवालों का जवाब देना होगा।





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