हाईकोर्ट की भर्ती में ही आरक्षण नियमों पर सवाल, OBC को कम सीटें महिला आरक्षण नदारद

Neel Tiwari | Jul 29, 2026, 13:25 IST
एमपी हाईकोर्ट भर्ती में आरक्षण पर विवाद
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की 130 पदों वाली वरिष्ठ कंप्यूटर प्रोग्रामर सहायक भर्ती में ओबीसी आरक्षण को लेकर विवाद शुरू हो गया है। भर्ती में ओबीसी वर्ग के लिए सिर्फ 3 पद आरक्षित किए गए हैं। इसे लेकर ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने आपत्ति जताई है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • हाईकोर्ट ने 130 वरिष्ठ कंप्यूटर प्रोग्रामर सहायक पदों पर भर्ती निकाली है।
  • भर्ती में ओबीसी वर्ग के लिए केवल तीन पद आरक्षित किए गए हैं।
  • ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इसे नियमों के खिलाफ बताया है।
  • एसोसिएशन ने ज्ञापन नहीं, बल्कि शिकायती पत्र भेजकर आपत्ति दर्ज कराई है।
  • शिकायत में भर्ती में सुधार करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

हाईकोर्ट की अपनी भर्ती में ही आरक्षण नियमों का पूरा पालन नहीं हुआ? यही सवाल अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की नई भर्ती प्रक्रिया पर उठने लगा है। 130 पदों की भर्ती में ओबीसी वर्ग को केवल तीन पद मिलने पर विवाद गहरा गया है। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इसे आरक्षण कानून के विपरीत बताते हुए औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।



हाईकोर्ट की भर्ती पर क्यों उठे सवाल

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर, जहां पूरे प्रदेश के ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई चल रही है, उसी हाईकोर्ट की भर्ती में आरक्षण नियमों पर सवाल खड़े हो गए हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के परीक्षा प्रकोष्ठ ने जिला न्यायालयों के लिए वरिष्ठ कंप्यूटर प्रोग्रामर सहायक के 130 पदों पर सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी किया है।



विज्ञापन के अनुसार 85 पद अनारक्षित, 21 पद अनुसूचित जाति, 21 पद अनुसूचित जनजाति और केवल तीन पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इसी आरक्षण व्यवस्था को लेकर विवाद शुरू हुआ है।



ओबीसी को सिर्फ तीन पद, यहीं से शुरू हुआ विवाद

ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि भर्ती में राज्य के आरक्षण कानून का पालन नहीं किया गया है। एसोसिएशन का दावा है कि यदि 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए तो ओबीसी वर्ग को लगभग 35 पद मिलने चाहिए। वहीं 14 प्रतिशत के आधार पर भी करीब 19 पद आरक्षित होने चाहिए। ऐसे में केवल तीन पद तय करना नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।



महिलाओं के आरक्षण पर भी उठाई आपत्ति

शिकायत में यह भी कहा गया है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से कोई पद आरक्षित नहीं दिखाया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में सभी वर्गों के लिए लागू नियमों का समान रूप से पालन होना चाहिए।



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चीफ जस्टिस समेत कई अधिकारियों को भेजा गया शिकायती पत्र

एसोसिएशन ने एमपी हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्रार परीक्षा प्रकोष्ठ, मुख्य सचिव, विधि विभाग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को आपत्ति दर्ज कराते हुए शिकायती पत्र भेजा है। इस पत्र में भर्ती विज्ञापन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए आरक्षण अधिनियम के अनुसार पदों का दोबारा निर्धारण करने की मांग की गई है।



जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग

एसोसिएशन के सचिव रामभजन लोधी ने बताया कि शिकायत में कहा गया है कि यदि भर्ती विज्ञापन नियमों के विपरीत जारी किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि जांच के बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ आरक्षण अधिनियम की धारा 6(2) के तहत आपराधिक कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि इससे भविष्य में ऐसे विवाद नहीं होंगे।



अब हाईकोर्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल यह मामला आपत्ति पत्र के जरिए उठाया गया है। अभी तक हाईकोर्ट की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि आपत्ति पर विचार होता है तो भर्ती विज्ञापन में बदलाव संभव है। वहीं मांग नहीं मानी गई तो मामला अदालत तक भी पहुंच सकता है।



भर्ती से पहले बढ़ा आरक्षण का विवाद

यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि सवाल किसी दूसरे विभाग की भर्ती पर नहीं, बल्कि हाईकोर्ट की अपनी भर्ती प्रक्रिया पर उठे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि शिकायत की जांच के बाद हाईकोर्ट और संबंधित प्राधिकारी क्या फैसला लेते हैं।



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