इंदौर HC - कैबिनेट विचार करे, अधिकारी अड़ियल रवैए से III, IV श्रेणी कर्मचारियों को कर रहे परेशान

Sanjay Gupta | Mar 14, 2025, 10:45 IST
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मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के अड़ियल रवैए पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि ये अधिकारी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से परेशान कर रहे हैं।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मप्र सरकार के प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के रवैए पर गहरी नाराजगी जताई है। यह अधिकारी अपने रवैए के चलते लगातार मप्र के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को परेशान कर रहे हैं। हद तो तब हो गई जब एक मामले में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर रिटायरमेंट के बाद 94 हजार की वसूली निकाली गई। इस पर हाईकोर्ट ने शासन को जमकर फटकार लगाई।



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यह है मामला

नोटशीट आई तो हाईकोर्ट हैरान

जब नोटशीट आई तो हाईकोर्ट हैरान रह गया। इसमें एजी ऑफिस या विधि विभाग से कोई मंजूरी ही नहीं थी और विभाग आदेश के खिलाफ अपील में आ गया। चीफ इंजीनियर द्वारा अपील कर दी गई। साल 2017-18 के दौरान 16 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तो केवल पीएचई विभाग में ही ऐसे सामने आए जिनके वेतन लाभ रोके गए। हाईकोर्ट ने कहा कि कैबिनेट विचार करे कि आखिर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को क्यों परेशान किया जा रहा है। इससे कोर्ट का भी कीमती समय बर्बाद होता है।



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अधिकारी यहां तक बोले कि हम कैबिनेट में रख रहे हैं

जब हाईकोर्ट ने वर्चुअल जुड़े अधिकारी से इस संबंध में सवाल किया तो अधिकारी यहां तक बोल गए कि इस मामले को हम कैबिनेट में रख रहे हैं। इस पर हाईकोर्ट हैरान हो गया और कहा कि क्या कैबिनेट को इतनी फुर्सत है कि वह 94 हजार के मामले पर चर्चा करेगा। हाईकोर्ट ने कहा कि बेवजह इन कर्मचारियों को उच्च अधिकारी अपने अड़ियल रवैए के कारण परेशान कर रहे हैं।



इसके बाद हाईकोर्ट ने यह दिए आदेश

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साल 2018 की नीति का पालन क्यों नहीं

हाईकोर्ट ने साल 2018 की मुकदमा नीति का भी हवाला दिया और कहा कि छोटे-मोटे मामले निपटाने के लिए राज्य, जिला व विभागीय स्तर पर समिति का प्रावधान था, लेकिन यह कागजों में ही सिमट कर रह गई। इसे लागू किया जाना चाहिए जिससे कर्मचारी परेशान न हों और कोर्ट का समय भी बर्बाद न हो।



20 हजार की कास्ट लगाई

हाईकोर्ट ने इस मामले में 20 हजार की कास्ट भी लगाई, जिसने रिट अपील दायर करने की अनुशंसा की थी। यह कास्ट चीफ इंजीनियर, पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से वसूली जाएगी।



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