कोर्ट के आदेश नहीं मानते एमपी के अफसर, 5 महीने में 3 हजार से ज्यादा अवमानना केस

Amresh Kushwaha | May 30, 2026, 10:55 IST
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मध्यप्रदेश में 5 महीनों में हाईकोर्ट में 3656 सिविल अवमानना याचिकाएं दर्ज हुईं है। जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर तीनों बेंचों में मामले बढ़ रहे हैं। अफसर कोर्ट आदेश नहीं मानते हैं। व्यक्तिगत उपस्थिति और वारंट तक नौबत आ रही है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में अदालती आदेशों की अनदेखी लगातार बढ़ रही है।
  • 29 मई 2026 तक सिर्फ पांच महीनों में 3656 अवमानना याचिकाएं दर्ज हुईं है।
  • जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर तीनों हाईकोर्ट बेंचों में मामले सामने आए हैं।
  • कई अफसरों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने के निर्देश दिए गए हैं।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि जवाबदेही तय होने तक यह सिलसिला नहीं रुकेगा।

कोर्ट के आदेश, अफसरों की अनदेखी

मध्यप्रदेश में न्यायपालिका के आदेशों की पालना कराने में कार्यपालिका की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। नोटिस, व्यक्तिगत उपस्थिति और यहां तक कि जमानती वारंट जारी होने के बावजूद कई अफसर अदालत के आदेश नहीं मान रहे हैं।



स्थिति यह है कि 29 मई 2026 तक हाईकोर्ट की जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर बेंचों में कुल 3656 सिविल अवमानना (Contempt of Court) याचिकाएं दर्ज हो चुकी हैं। यह आंकड़ा सिर्फ पांच महीनों का है।



9 साल से वेतनमान का इंतजार

पहला मामला जबलपुर का है। न्यायिक कर्मचारियों ने वेतनमान से जुड़े मामले में 2016 में याचिका दायर की थी। 28 अप्रैल 2017 को कोर्ट ने आदेश का पालन करने के निर्देश दिए थे। वहीं, 2018 में अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी थी। कोर्ट ने 8 मई 2026 को तीन अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किया था। नौ साल बीत गए, न्यायिक कर्मचारी अभी भी इंतजार कर रहे हैं।



प्रमुख सचिव समेत तीन अफसर तलब

दूसरा मामला रीवा के जिला उद्योग केंद्र (DIC - District Industries Centre) का है। वहां पदस्थ एजीएम (AGM - Assistant General Manager) जयप्रकाश तिवारी को प्रमोशन न मिलने पर याचिका दायर की गई थी।



कोर्ट ने 4 नवंबर 2024 को 90 दिनों में फैसला लेने का आदेश दिया था। वहीं, आदेश पालन नहीं हुआ। इसके बाद फिर से अवमानना याचिका दर्ज हुई थी। अब प्रमुख सचिव समेत विभाग के तीन अफसरों को सीएस अनुराग जैन को तलब किया गया है।



कुलपति-रजिस्ट्रार पर कोर्ट सख्त

तीसरा मामला आरडीवीवी यानी रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) का है। पूर्व छात्रों के प्रतिनिधित्व से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट ने पहले भी सख्ती दिखाई थी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद विश्वविद्यालय ने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद कोर्ट ने कुलपति और कुलसचिव को 7 मई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे।



विशेषज्ञ बोले, जवाबदेही जरूरी

वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी का कहना है कि अवमानना की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण अधिकारियों की जवाबदेही नहीं होना है। उनके मुताबिक जब तक अधिकारियों को व्यक्तिगत उपस्थिति या वारंट का डर नहीं होता, वे आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते। उनका कहना है कि सरकार को अफसरों की जवाबदेही तय करनी चाहिए।



न्यायिक आदेशों की अनदेखी से अदालतों का रुख अब और सख्त होता जा रहा है। प्रशासनिक तंत्र की यह कार्यशैली सवालों के घेरे में है।



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