विभाग ने कर्मचारी को दो बार बूढ़ा मानकर किया रिटायर, अब एमपी हाईकोर्ट ने फिर दी नौकरी
समझें क्या है पूरा मामला...
- वन विभाग ने दैनिक वेतन भोगी चौकीदार को दो बार जबरन रिटायर किया था।
- मेडिकल बोर्ड ने 2017 में साहब सिंह की उम्र 50 साल तय की थी।
- विभाग ने मनमाने ढंग से उम्र 60 और फिर 62 साल घोषित कर दी थी।
- मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दोनों आदेश पूरी तरह रद्द कर दिए हैं।
- अब चौकीदार साहब सिंह ठाकुर अप्रैल 2029 तक नौकरी करेंगे।
31 साल की सेवा, फिर धोखा
दतिया के साहब सिंह ठाकुर की कहानी हैरान करने वाली है। उन्हें 12 अगस्त 1986 को दतिया वन परिक्षेत्र में दैनिक वेतन भोगी चौकीदार के तौर पर नियुक्त किया गया था। करीब 31 साल तक उन्होंने वफादारी से काम किया था। 25 अप्रैल 2017 को विभाग ने उनकी सेवा को नियमित यानी स्थायी भी कर दिया था।
वहीं, एक अड़चन थी। भर्ती के वक्त उनकी उम्र का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं था।
मेडिकल बोर्ड ने क्या कहा था?
तत्कालीन संभागीय वन अधिकारी ने नियमानुसार उनका एज डिटरमिनेशन टेस्ट यानी आयु परीक्षण कराने का फैसला किया था। डॉक्टरों के विशेषज्ञ पैनल यानी जिला मेडिकल बोर्ड ने 07 अप्रैल 2017 को पूरी वैज्ञानिक जांच के बाद साहब सिंह की उम्र 50 साल निर्धारित की थी। इस हिसाब से उनकी सेवानिवृत्ति 2029 में होनी थी।
वहीं, एमपी वन विभाग ने यह रिपोर्ट मानने से इनकार कर दिया था। अफसरों ने मनमाने तरीके से उनकी उम्र सीधे 60 साल मान ली और 2017 में ही रिटायरमेंट का आदेश थमा दिया था।
हाईकोर्ट ने लगाई रोक, विभाग ने फिर किया खेल
साहब सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने उस आदेश पर तुरंत स्टे यानी स्थगन दे दिया। वहीं, विभाग यहीं नहीं रुका।
17 अप्रैल 2018 को अफसरों ने एक और नया आदेश जारी किया था। इस बार साहब सिंह की उम्र 62 साल घोषित कर उन्हें फिर से नौकरी से बाहर करने की कोशिश हुई थी। यानी एक ही कर्मचारी को कागजों पर दो बार बूढ़ा बना दिया गया था। यह हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर की सीधी अवमानना थी।
हाईकोर्ट ने विभाग को जमकर फटकारा
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की सिंगल बेंच ने इस मामले की अंतिम सुनवाई की। कोर्ट ने वन विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है।
कोर्ट ने साफ कहा कि जब विभाग ने खुद साहब सिंह को मेडिकल बोर्ड के पास भेजा था। ऐसे में बोर्ड की रिपोर्ट को प्रशासनिक अधिकारी अपनी मेज पर बैठकर मनमाने ढंग से नहीं बदल सकते। विभाग कोर्ट के सामने कोई जन्म प्रमाण पत्र, कोई कानूनी दस्तावेज या कोई वैकल्पिक मेडिकल राय पेश नहीं कर सका। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर संदेह करने का कोई आधार नहीं था।
अब 2029 में होगा असली रिटायरमेंट
ग्वालियर हाईकोर्ट ने वन विभाग के दोनों आदेश पूरी तरह रद्द कर दिए हैं। कोर्ट ने आदेश दिया कि साहब सिंह ठाकुर अप्रैल 2029 तक सम्मानपूर्वक अपनी ड्यूटी करेंगे। यह उनकी कानूनी सेवाकाल की आयु 62 साल पूरी होने का समय है।
इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि विभाग की इस मनमानी की वजह से साहब सिंह को जो भी आर्थिक नुकसान हुआ, उसका भी हिसाब चुकाना होगा। उन्हें नियमित वेतनमान के साथ सभी बैक-वेजेस (Back Wages - सेवा लाभ और एरियर) का भुगतान तत्काल करने का आदेश दिया गया है।
यह मामला बताता है कि यदि कोई सरकारी विभाग किसी कर्मचारी के साथ मनमानी करे, तो न्यायपालिका उसकी ढाल बन सकती है।
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