एमपी के सरकारी अस्पताल होंगे पूरी तरह पेपरलेस, सबकुछ होगा डिजिटल

Sandeep Kumar | Jul 12, 2026, 17:59 IST
एमपी के सरकारी अस्पताल होंगे पूरी तरह पेपरलेस
मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पताल 1 नवंबर से पेपरलेस होंगे। मरीजों को पर्चा और जांच रिपोर्ट सीधे मोबाइल पर मिलेगी। 15 अगस्त से भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • MP के सरकारी अस्पताल पेपरलेस सिस्टम अपनाएंगे।
  • डॉक्टर टैबलेट से मरीजों को दवा लिखेंगे।
  • मरीजों की रिपोर्ट मोबाइल पर भेजी जाएगी।
  • 15 अगस्त से चुनिंदा अस्पतालों में शुरुआत होगी।
  • एक नवंबर से सभी अस्पताल डिजिटल होंगे।

करोड़ों मरीजों को मिलेगी राहत

भोपाल सहित पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले करोड़ों लोगों के लिए यह बदलाव बड़ी राहत लेकर आएगा। स्वास्थ्य विभाग की योजना है कि इलाज की पूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बने। इसके लिए हर अस्पताल को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा।



15 अगस्त से पायलट प्रोजेक्ट

स्वास्थ्य विभाग पहले चुनिंदा सरकारी अस्पतालों में 15 अगस्त से यह व्यवस्था आजमाएगा। तैयारियां अभी अंतिम चरण में हैं। सफल परीक्षण के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक योजना का खाका तैयार हो चुका है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।



मरीजों को मिलेंगे ये 5 फायदे

पर्चा या रिपोर्ट खोने की परेशानी अब खत्म होगी। इलाज का पूरा रिकॉर्ड ई-फाइल में सुरक्षित रहेगा। मोबाइल पर ही डिजिटल पर्चा और जांच रिपोर्ट मिलेगी। डॉक्टर सिर्फ उपलब्ध दवाओं के आधार पर ही पर्चा लिखेंगे। इससे इलाज की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी।



एआइ करेगा हर अस्पताल की निगरानी

स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों को एआइ तकनीक से भी जोड़ेगा। इससे मुख्यालय को प्रदेशभर के अस्पतालों की दवा उपलब्धता और मरीजों की संख्या पर रियल टाइम नजर रखने में मदद मिलेगी। इलाज, जांच और प्रशासनिक कामकाज की निगरानी भी आसान होगी। अस्पतालों में खरीद और स्टॉक प्रबंधन जैसे काम भी ई-फाइल प्रणाली से होंगे।



अस्पताल के चक्कर होंगे कम

नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को अस्पताल के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पर्चा और रिपोर्ट मोबाइल पर मौजूद रहने से इलाज का रिकॉर्ड हमेशा सुरक्षित रहेगा। भविष्य में किसी भी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर मरीज का पुराना रिकॉर्ड आसानी से देख सकेंगे।



एम्स भोपाल में कैंसर का नया इलाज

भोपाल एम्स में अब एक ही बीमारी के हर मरीज का अलग तरीके से इलाज शुरू किया जाएगा। हर मरीज की शारीरिक स्थिति, जीन, जीवनशैली और पर्यावरण के आधार पर उपचार होगा। इस पद्धति को प्रिसिजन मेडिसिन (Precision Medicine – सटीक चिकित्सा पद्धति) कहा जाता है। इससे कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज और मनोरोग जैसी बीमारियों को जड़ से खत्म किया जा सकता है।


एम्स भोपाल में यह ट्रायल पिछले एक साल से चल रहा है। जीन आधारित जांच और उन्नत डायग्नॉस्टिक तकनीकों को धीरे-धीरे इसमें शामिल किया जा रहा है।



जीन के आधार पर तय होगी दवा

मान लीजिए दो मरीजों को कैंसर है, लेकिन दोनों के जीन अलग हैं। ऐसे में एक ही दवा दोनों पर समान असर नहीं करती। प्रिसिजन मेडिसिन में जीन जांच के आधार पर हर मरीज के लिए सही और अलग दवा चुनी जाती है।



FAQ

  1. एमपी के सरकारी अस्पताल पेपरलेस कब होंगे?
    मध्यप्रदेश के सभी सरकारी अस्पताल 1 नवंबर से पेपरलेस होंगे। इससे पहले 15 अगस्त से चुनिंदा अस्पतालों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। सफल परीक्षण के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
  2. प्रिसिजन मेडिसिन क्या है?
    यह एक आधुनिक चिकित्सा पद्धति है जिसमें हर मरीज का इलाज उसके जीन और शारीरिक स्थिति के आधार पर अलग तरीके से होता है। इससे कैंसर जैसी बीमारियों का सटीक इलाज संभव होता है। एम्स भोपाल में इसका ट्रायल चल रहा है।

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