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भोपाल- मध्य प्रदेश विधानसभा अब अपने 70वें साल में पूरी तरह डिजिटल हो गई है। नए साल का बजट अब 360 डिग्री घूमने वाले ई-टैबलेट्स पर पढ़ा जाएगा। इस नई व्यवस्था में विधायकों और मंत्रियों के लिए राजधानी भोपाल में मंगलवार 23 दिसंबर को एक खास ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा गया है।
मध्य प्रदेश देश का 15वां राज्य है, जहां विधानसभा अब पूरी तरह डिजिटल हो गई है। इसे नेशनल ई-विधान प्रोजेक्ट के तहत करीब 350 करोड़ रुपए के बजट से तैयार किया गया है। इसमें सैमसंग के अत्याधुनिक टैबलेट्स विधायकों को उनकी मेज पर मिलेंगे, जो काम करने में और भी आसान बनाएंगे।
360 डिग्री घूम सकेगा टैबलेट
विधायकों के लिए सदन में टैबलेट एक विशेष किस्म के रोज गोल्ड कलर स्टैंड पर फिट रहेगा। स्टैंड की खूबी यह है कि टैबलेट को विधायक अपनी सुविधा के मुताबिक, 360 डिग्री तक घुमा सकेंगे। करीब एक फीट लंबाई वाले टैबलेट का कवर भी रोज गोल्ड कलर में रखा गया है।
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पूरी तरह पेपरलेस होगी विधानसभा
नए साल में मध्य प्रदेश विधानसभा पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस होगी। विधानसभा के बजट सत्र में डिजिटल व्यवस्था देखने को मिलेगी। विधायकों को टैबलेट दिए जाएंगे, उनके प्रश्नों के उत्तर भी डिजिटल ही प्राप्त होंगे। मप्र का बजट उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा टैबलेट पर ही पढ़ेंगे। कार्यवाही को लाइव दिखाने बड़ी स्क्रीन भी सदन के गर्भगृह में होगी।
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कागज फ्री हुई मध्यप्रदेश विधानसभा👉 मध्यप्रदेश विधानसभा की पूरी कार्यवाही कागजों के बजाय अब डिजिटल तरीके से होगी। 👉 नए साल का बजट वित्त मंत्री टैबलेट पर पढ़ेंगे। हर विधायक की मेज पर 360 डिग्री घूमने वाला टैबलेट लगा होगा। 👉 इस नई व्यवस्था को चलाने के लिए 23 दिसंबर को मंत्रियों और विधायकों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा गया है। 👉 विधायकों के साथ अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी। 👉 नेशनल ई-विधान परियोजना के तहत करीब 350 करोड़ रुपए की लागत से पूरी विधानसभा को हाई-टेक बनाया गया है। | |
मंत्री, विधायकों के लिए ट्रेनिंग 23 को
विधानसभा की नई डिजिटल व्यवस्था में सदस्यों को पारंगत करने विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 23 दिसंबर को मानसरोवर सभागार में होगा। इसमें सभी मंत्रियों व विधायकों को अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए कहा गया है।
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अधिकारी, कर्मचारियों की भी होगी ट्रेनिंग
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सभी विभागीय मुख्यालयों के 5-5 अधिकारी, कर्मचारियों को भी बुलाया गया है। ये वे अधिकारी, कर्मचारी होंगे, जो सदन में पूछे जाने वाले सवालों के जवाब तैयार करने में अहम भूमिका अदा करते हैं।
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निक्सी को सौंपा गया है काम
नेशनल ई-विधान परियोजना NeVA भारत सरकार की एक ई-गवर्नेस पहल है, जिसका लक्ष्य देश की सभी विधानसभाओं को पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस बनाना है। मप्र विधानसभा को इसके लिए करीब 350 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया।
विधानसभा को डिजिटल स्वरूप देने का काम एनआईसी की एक सरकारी कंपनी निक्सी को दिया गया है। विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने बताया कि विधानसभा को ई-स्वरूप देने का काम तेज गति से किया जा रहा है। नए साल के बजट सत्र से इसकी शुरुआत होने के आसार हैं। samsung | अधीक्षक अरविंद शर्मा
NeVA क्या है?
नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) एक क्रांतिकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे 'वन नेशन-वन एप्लिकेशन' के लक्ष्य के साथ तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की संसद और सभी राज्यों की विधानसभाओं को एक साथ डिजिटल करना है।
Neva को आप नीचे बताए गए तरीकों से भी समझ सकते हैं।
रियल-टाइम संचालन: सदन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि, जैसे प्रश्न-उत्तर, विधेयक (Bills) और मतदान की प्रक्रिया अब सीधे ऑनलाइन उपलब्ध होती है।
पेपरलेस वर्कफ्लो: कार्यसूची से लेकर सदन की रिपोर्ट तक, सारा डेटा डिजिटल फॉर्मेट में रहता है, जिससे कागजों का इस्तेमाल खत्म हो जाता है।
पारदर्शिता: आम जनता और जनप्रतिनिधि एक ही क्लिक पर विधानसभा की उपस्थिति और कार्यवाही से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।
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