लाड़ली लक्ष्मी योजना की कड़वी सच्चाई: 20% लाड़लियों को पूरी राशि, 80% बीच में छोड़ रही पढ़ाई

Anjali Dwivedi | Feb 24, 2026, 11:50 IST
mp-ladli-laxmi-yojana-education-level-report-2025
मध्य प्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत सिर्फ 20% बेटियों को ही 1.43 लाख का पूरा फायदा मिल पा रहा है। विधानसभा में जो आंकड़े पेश किए गए, उनके मुताबिक, पढ़ाई छोड़ने के कारण 80% लाड़लियां उच्च शिक्षा से दूर हैं।

News In Short

  • लाड़ली लक्ष्मी योजना की 1.43 लाख रुपए की राशि का लाभ सिर्फ 20% लाड़लियों को मिल रहा है।
  • केवल 19.97% लाड़लियों ने ही 12वीं कक्षा में प्रवेश लिया है।
  • ग्रेजुएशन तक 5.83% और पीजी तक सिर्फ 0.33% बेटियां ही पहुंच पाई हैं।
  • साल 2012 के मुकाबले 2025 में पंजीयन की संख्या में बड़ी गिरावट आई है।
  • 6वीं कक्षा के बाद लगभग आधी लड़कियां पढ़ाई से बाहर हो जाती हैं।

News In Detail

भोपाल. मध्य प्रदेश में बेटियों का भविष्य संवारने के लिए यह योजना (लाड़ली लक्ष्मी योजना) शुरू हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य जेंडर बैलेंस और शिक्षा में सुधार करना था। दो दशक पहले शुरू हुई इस योजना पर अब बड़े सवाल उठ रहे हैं।



हाल ही में विधानसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने इन आंकड़ों को पेश किया है। उन्होंने बताया कि इन आंकड़ों ने योजना के सही तरीके से लागू न होने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही राज्य में लड़कियों के गिरते शैक्षिक स्तर पर भी चिंता जाहिर की गई है।



mp-ladli-laxmi-yojana-education-level-report-2025

80% बेटियों को नहीं मिल रहा योजना का लाभ

लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत राज्य सरकार एक लाड़ली को 1 लाख 43 हजार रुपए की आर्थिक मदद देती है।



असलियत ये है कि 80% छात्राएं सिर्फ शुरुआती किस्तों तक ही सीमित रह गई हैं, यानी करीब 43 हजार रुपए तक।



पूरा फायदा, यानी 1 लाख 43 हजार रुपए, केवल 20% बेटियों को ही मिल पा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि वे उच्च शिक्षा के कड़े मापदंड पूरे नहीं कर पातीं।



6वीं के बाद टूटने लगता है शिक्षा का सपना

एमपी विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल पर सरकार ने जो आंकड़े रखे, वे चिंताजनक हैं। आंकड़ों के मुताबिक-



  • रजिस्टर्ड लाड़लियों में से केवल 52.35% बेटियों ने ही कक्षा 6वीं तक की पढ़ाई पूरी की है।
  • कक्षा 12वीं में प्रवेश लेने वाली बेटियों का प्रतिशत गिरकर मात्र 19.97% रह गया है।
  • कॉलेज यानी स्नातक तक सिर्फ 5.83% बेटियां ही पहुंच पा रही हैं।
  • मास्टर्स तक का सफर तय करने वाली लाड़लियों की संख्या तो न के बराबर यानी महज 0.33% है।

रजिस्ट्रेशन के ग्राफ में भारी गिरावट

योजना की शुरुआत से लेकर अब तक के सफर पर नजर डालें, तो रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में भी उतार-चढ़ाव देखा गया है। 2007 से 2025 के बीच कुल 52.2 लाख लाड़लियों का पंजीयन हुआ।



साल 2012: इस साल सर्वाधिक 3 लाख 54 हजार 271 पंजीयन हुए थे।



साल 2021: यहां फिर उछाल आया और 3 लाख 44 हजार 649 पंजीयन दर्ज किए गए।



साल 2025: इस साल पंजीयन की संख्या घटकर 2 लाख 72 हजार 6 रह गई है।



मंत्री निर्मला भूरिया ने इस गिरावट का बचाव करते हुए कहा कि पात्रता के सख्त नियमों के कारण पंजीयन में कमी आई है।



उच्च शिक्षा का बढ़ता ड्रॉपआउट

योजना इस तरह से बनाई गई है कि जैसे-जैसे बेटी आगे बढ़ती है, उसे ज्यादा स्कॉलरशिप मिलती है। लेकिन जब 80% बेटियां तो स्कूल ही छोड़ देती हैं, तो उन्हें सरकार से ज्यादा पैसा नहीं मिल पाता।



ये आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ पैसे देने से पढ़ाई में सुधार नहीं हो रहा। असली समस्या तो ये है कि बीच में पढ़ाई छोड़ने की वजह से बेटियों को वो मदद ही नहीं मिल पा रही।



आखिर रजिस्ट्रेशन कम क्यों हुए?

विभाग के मुताबिक इसका बड़ा कारण योजना के नियम हैं। दरअसल, स्कॉलरशिप केवल उन बालिकाओं को दी जाती है जो 5वीं पास करने के बाद 6वीं क्लास में एडमिशन लेती हैं। इसके साथ ही स्कॉलरशिप की दूसरी सभी शर्तें पूरी करती हैं।



लाड़ली लक्ष्मी योजना से बेटियों को कैसे मिलता है फायदा

सरकार की इस योजना में आपकी बेटी को कुल 1 लाख 43 हजार रुपए की आर्थिक मदद और ग्रेजुएशन की मुफ्त पढ़ाई का तोहफा मिलता है। जैसे-जैसे बेटी बड़ी होती है, किश्तों में पैसा सीधे उसके काम आता है।



कब-कब और कितनी मिलेगी राशि?

पैसों का भुगतान बेटी स्कूल में की पढ़ाई के दौरान अलग-अलग चरणों में इस तरह किया जाता है-



  • 6वीं क्लास में आने पर: दो हजार रुपए
  • 9वीं क्लास में आने पर: चार हजार रुपए
  • 11वीं क्लास में आने पर: छह हजार रुपए
  • 12वीं क्लास में आने पर: छह हजार रुपए

कॉलेज या प्रोफेशनल कोर्स के लिए

अगर बेटी ग्रेजुएशन या किसी दो साल के प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन लेती है, तो उसे 25 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह पैसा कोर्स के पहले और आखिरी साल में दो बराबर किश्तों में मिलता है।



एकमुश्त बड़ी राशि (1 लाख रुपए)



जब बेटी 21 साल की हो जाए, उसने 12वीं की परीक्षा दी हो और उसकी शादी कानूनन सही उम्र में हो रही हो, तब सरकार उसे आखिरी किश्त के रूप में एक लाख रुपए का भुगतान करती है।



ये खबरें भी पढ़ें....



विधानसभा में लाड़ली बहना योजना पर बड़ा खुलासा, 6.28 लाख नाम घटे, हजारों लाड़लियों का अटका पैसा



MP Budget 2026 : विधानसभा बजट सत्र का सातवां दिन, विभागवार बजट पर होगी चर्चा



भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में छात्रा की मौत का मामला, विधानसभा में गरम बहस



MP News: इंडिया-यूएस ट्रेड डील पर एमपी कांग्रेस का विधानसभा में प्रदर्शन



Tags:
  • भोपाल
  • मध्य प्रदेश
  • लाड़ली लक्ष्मी योजना
  • एमपी विधानसभा
  • महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया
  • कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल