गुजरात लाइन बंद, झाबुआ-आलीराजपुर की शराब दुकान में घाटा, इंदौर से 432 करोड़ की आय अधिक
Indore. शराब ठेकेदारों की आपसी लड़ाई और शासन की सख्ती के चलते गुजरात में जाने वाली अवैध शराब सप्लाई ठप हो गई है। इसके चलते इस सप्लाई से जुड़े गुजरात बॉर्डर के अहम जिले आलीराजपुर और झाबुआ की दुकानों में सबसे ज्यादा घाटा हुआ है। उधर इंदौर जिले ने इसकी जमकर भरपाई की है और प्रदेश में सर्वाधिक राजस्व दिया है।
मध्य प्रदेश में आखिरकार सभी 3 हजार 553 शराब दुकान बिक गई हैं। अब इन्हें चलाने के लिए निगम, मंडल बनाने की जरूरत नहीं होगी। इससे सरकार को 18 हजार 679 करोड़ की आय हुई है। यह वित्तीय साल 2025-26 के ठेके (16 हजार 627) से 12.34 फीसदी यानी 2050 करोड़ अधिक है।
इस अतिरिक्त 2 हजार 50 करोड़ की आय में इंदौर जिले का सर्वाधिक हिस्सा 432 करोड़ (21 फीसदी) है। कुल मिलाकर इंदौर जिले ने एमपी की आबकारी नीति को बहुत बड़ा सहारा दिया और घाटा होने से बचा लिया है।
झाबुआ, आलीराजपुर से गुजरात लाइन बंद
मध्य प्रदेश के 55 जिलों में से नौ जिले ऐसे रहे हैं जिसमें बीते साल से भी कम राजस्व आया और सरकार को तगड़ा झटका लगा। चौंकाने वाली बात रही है कि आलीराजपुर और झाबुआ में ही यह सबसे ज्यादा घाटा हुआ है। यह जिले गुजरात से लगे होने के चलते सबसे पहले सिंगल ठेके में जाते थे।
इसकी वजह है कि बीते एक साल से इन जिलों से गुजरात में जाने वाली अवैध शराब की सप्लाई ठप हो गई है। ठेकेदारों में आपस में कॉम्पिटिशन होने से एक-दूसरे को निपटाने का खेल चला, जिससे कई गाड़ियां पकड़ी गईं। उधर मोहन यादव की सरकार ने जमकर सख्ती की, इससे भी यह लाइन ठप हो गई।
झाबुआ, आलीराजपुर ने दिया झटका
आंकड़ों के हिसाब से देखें तो आलीराजपुर का शराब ठेका बीते साल 117 करोड़ में गया था। इस बार लक्ष्य 141 करोड़ रुपए था, लेकिन केवल 94 करोड़ रुपए में ही यह ठेके गए। बीते साल से भी 20 फीसदी राजस्व कम हो गया, जो पूरे प्रदेश में सर्वाधिक घाटा है।
वहीं झाबुआ में 287 करोड़ में ठेके गए थे और इस बार 345 करोड़ का लक्ष्य था, लेकिन ठेके केवल 243 करोड़ में गए। यहां भी 15 फीसदी घाटा हुआ है।
यह भी जिले घाटे में गए
इसके साथ ही मंदसौर, जबलपुर, आगर, छिंदवाड़ा, शाजापुर, रतलाम, नीमच जिले भी बीते साल के ठेके से कम भाव पर गए हैं। इससे सरकार को बड़ा झटका लगा है।
इन जिलों में सर्वाधिक बढ़ोतरी
वहीं बीते साल के ठेकों से सर्वाधिक आय छोटे जिलों में दिखी है। सबसे ज्यादा 61 फीसदी की बढ़ोतरी मैहर जिले में हुई। यहां पर ठेके बीते साल 80 करोड़ में गए थे, जो इस बार 130 करोड़ में गए हैं।
इसी तरह मंडला में 97 करोड़ में जो ठेके बीते साल गए थे, वह इस बार 52 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 148 करोड़ में गए। इसी तरह सीधी में 124 करोड़ के ठेके इस बार 186 करोड़ में गए और बीते साल से 50 फीसदी अधिक बढ़ोतरी हुई।
लेकिन खजाना तो इंदौर ने ही भरा
बीते साल से अधिक आय में प्रतिशत में भले ही मैहर, सीधी, मंडला जिले आगे हों, लेकिन राशि की बात की जाए तो इंदौर ने ही खजाना भरा है। दुकान को लेकर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और एसी आबकारी अभिषेक तिवारी की नई ग्रुपिंग नीति सफल हुई।
इंदौर का साल 2025-26 का ठेका 1752 करोड़ में गया था, जो इस बार 2 हजार 184 करोड़ में गया है। यह 432 करोड़ यानी करीब 25 फीसदी अधिक है। इस बार लक्ष्य 2 हजार 102 करोड़ था, जहां अन्य जिलों को छोटे लक्ष्य भी पार करने में पसीना आ गया, वहां इसे भी इंदौर पार कर गया है।
इन जिलों ने दिया एक हजार करोड़ से अधिक
इंदौर ने सर्वाधिक 2 हजार 184 करोड़ रुपए दिए। वहीं इसके बाद भोपाल ने एक हजार 206 करोड़ की आय शराब ठेकों से दी है। जबलपुर ने 910 करोड़ दिए। ग्वालियर ने 684 करोड़ दिए। उज्जैन से 605 करोड़ की आय हुई है। धार और सागर से 601-601 करोड़ की आय हुई है।
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