मप्र आजीविका मिशन घोटाला: बेलवाल-बैस कनेक्शन पर बवाल, मंत्री की चिट्ठी से मचा हड़कंप
BHOPAL. मध्य प्रदेश के आजीविका मिशन में करोड़ों के घोटाले को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इस मामले में नेता और प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल की एक चिट्ठी सामने आने के बाद पूरा मामला फिर चर्चा में आ गया है। दरअसल, 9 मार्च को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल ने मुख्य सचिव अनुराग जैन को एक नोटशीट लिखी थी।इसमें उन्होंने पूछा कि जब लोकायुक्त इस मामले कीजांच कर रहा है तो पंचायत विभाग जरूरी जानकारी क्यों नहीं दे रहा है। मंत्री ने यह भी कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और पूरी जानकारी तुरंत दी जाए।
बेलवाल और बैस का नाम क्यों आया?
इस मामले में दो बड़े नाम सामने आ रहे हैं। पहला ललित मोहन बेलवाल (पूर्व सीईओ, आजीविका मिशन) और दूसरा इकबाल सिंह बैस (पूर्व मुख्य सचिव)। इन दोनों से जुड़े मामलों की जांच लोकायुक्त कर रहा है। लेकिन आरोप है कि इनके बारे में जरूरी जानकारी समय पर नहीं दी जा रही है।
विधानसभा में भी उठ चुका है मुद्दा
हाल ही में बजट सत्र के दौरान यह मामला विधानसभा में भी उठाया गया था। उस दौरान CM डॉ. मोहन यादव ने खुद माना कि पंचायत विभाग पूरी जानकारी नहीं दे रहा है। इसके बाद उम्मीद थी कि जल्द कार्रवाई होगी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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बैठक हुई, लेकिन नतीजा नहीं निकला
कुछ दिन पहले इस मामले पर एक बैठक भी हुई थी। लेकिन इसमें अधिकारियों ने लिखित जानकारी देने के बजाय सिर्फ मौखिक जवाब देकर मामला टाल दिया। इससे शक और बढ़ गया है कि कहीं कुछ छिपाया तो नहीं जा रहा।
अब उठ रहे बड़े सवाल
इस पूरे मामले में अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जैसे कि क्या किसी दबाव में कार्रवाई रोकी जा रही है? क्या किसी बड़े अधिकारी या नेता को बचाया जा रहा है? क्या विभाग के अंदर ही आपसी खींचतान चल रही है? द सूत्र को मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ लोग कार्रवाई चाहते हैं, जबकि कुछ अफसरों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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पुराना विवाद फिर आया सामने
बेलवाल और बैस से जुड़े विवाद पहले भी चर्चा में रहे हैं। इस मामले के सामने आने से पुरानी बातें फिर सामने आ गई हैं। अब ऐसा लग रहा है कि प्रशासनिक फैसले सिर्फ नियमों से नहीं, बल्कि राजनीति के असर से भी हो रहे हैं।
अब आगे क्या होगा?
मंत्री की चिट्ठी के बाद अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर मामला धीरे-धीरे दब जाएगा?
फिलहाल इतना साफ है कि यह मामला सिर्फ घोटाले का नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और ईमानदारी की भी परीक्षा बन गया है।