MP मंडी बोर्ड में अवैध पदस्थापना : हाईकोर्ट ने GAD के आदेश को किया रद्द
मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (Mandi Board) में हाल ही में की गई पदस्थापना और ट्रांसफर के आदेशों पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है।
कोर्ट ने इन आदेशों को अवैध और नियमों के खिलाफ करार देते हुए उन्हें निरस्त कर दिया। इस फैसले के पीछे यह तर्क था कि इन पदस्थापनों में नियमों का उल्लंघन किया गया था और बिना उचित प्रक्रिया के कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी।
मप्र मंडी बोर्ड में क्या हुआ था
मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड में प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम ने कई अधिकारियों की पदस्थापना और ट्रांसफर बिना उचित प्रक्रिया के किए थे। जिनमें प्रमुख रूप से जबलपुर और ग्वालियर के आंचलिक कार्यालय शामिल थे। इन बदलावों को लेकर कुछ अधिकारियों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और याचिका दायर की।
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हाईकोर्ट का निर्णय
हाईकोर्ट ने इस मामले में आदेश दिया कि मंडी बोर्ड के अंचलिक कार्यालयों में पदस्थापना और ट्रांसफर के आदेशों को अवैध करार दिया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि GAD (General Administration Department) को इस तरह की नियुक्तियां करने का कानूनी अधिकार नहीं है। इन आदेशों को रद्द करते हुए न्यायालय ने सरकार को उचित प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए।
इन पॉइंट्स पर आया हाईकोर्ट का फैसला...👉 हाईकोर्ट का आदेश: मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रवंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम द्वारा की गई पदस्थापना को हाईकोर्ट ने अवैध करार दिया।👉 पदस्थापना में नियमों का उल्लंघन: जबलपुर और ग्वालियर के अंचलिक कार्यालयों में नियमों के खिलाफ पदस्थापना की गई थी। 👉 जबलपुर में बदलाव: जबलपुर कार्यालय में रोहणी प्रसाद चक्रवर्ती को 1 अगस्त 2025 को पदस्थापित किया गया था, लेकिन तीन दिन बाद इसे बदलकर शाहिद खान को पदस्थ किया गया। 👉 ग्वालियर से ट्रांसफर रद्द: ग्वालियर में सुरेश कुमार कुमरे का ट्रांसफर आदेश हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। 👉 GAD को अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश के GAD को मंडी बोर्ड में सीधे पदस्थापना करने का कानूनी अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने आदेश को रद्द किया। 👉 सुरेश कुमार की पदस्थापना बहाल: सुरेश कुमार कुमरे को ग्वालियर में उनकी पूर्ववर्ती पदस्थापना के अनुसार बरकरार रखा गया। 👉 प्रशासनिक अधिकारियों की जरूरत नहीं: हाईकोर्ट ने कहा कि मंडी बोर्ड में केवल विषय के जानकारों की आवश्यकता है, प्रशासनिक अधिकारियों की नहीं। |
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मंडी बोर्ड में पदस्थापना...
मंडी बोर्ड में नई पदस्थापना की प्रक्रिया काफी जटिल और निर्धारित है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा निर्धारित विज्ञापन और प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है। लेकिन कुमार पुरुषोत्तम ने बिना किसी विज्ञापन और कानूनी प्रक्रिया के अनेक अधिकारियों को पदस्थ कर दिया था। यह न केवल नियमों का उल्लंघन था बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार का संकेत भी था।
FAQ
- मंडी बोर्ड की पदस्थापना क्यों अवैध करार दी गई?
हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया क्योंकि मंडी बोर्ड के प्रवंध संचालक द्वारा नियुक्तियाँ बिना उचित प्रक्रिया के की गईं। GAD को इस प्रकार की नियुक्तियाँ करने का कानूनी अधिकार नहीं था। कोर्ट ने इन्हें अवैध करार देते हुए निरस्त किया। - हाईकोर्ट के फैसले से अधिकारियों की क्या स्थिति बनी?
हाईकोर्ट ने सुरेश कुमार कुमरे की ग्वालियर में पदस्थापना को बहाल किया। वहीं, अन्य अवैध पदस्थापना को रद्द कर दिया और संबंधित विभागों को आदेश दिया कि उचित प्रक्रिया अपनाए। - क्या मंडी बोर्ड में नियुक्तियां बिना विज्ञापन के की जा सकती हैं?
नहीं, मंडी बोर्ड में नियुक्तियां बिना किसी विज्ञापन और निर्धारित प्रक्रिया के नहीं की जा सकतीं। इस तरह की नियुक्तियाँ नियमों के खिलाफ होती हैं, और कोर्ट ने इन्हें रद्द कर दिया है।
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