राजेंद्र भारती ही नहीं... MP के ये MLA भी कानूनी जाल में उलझे, किसी की कुर्सी डांवाडोल तो किसी पर तलवार लटकी
मध्यप्रदेश की राजनीति इस वक्त बयानबाजी या चुनावी रणनीति तक सीमित नहीं है। अदालतों में भी कई नेताओं की किस्मत तय हो रही है। ताजा मामला दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का है, जिन्हें 27 साल पुराने एफडी हेराफेरी केस में दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई है, हालांकि उन्हें जमानत मिल गई है।
अब बड़ा सवाल उनकी विधायकी को लेकर है। कानून के मुताबिक यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे ज्यादा की सजा होती है तो उसकी सदस्यता स्वतः खत्म हो सकती है। ऐसे में तीन साल की सजा ने भारती की कुर्सी को खतरे में डाल दिया है।
हालांकि, उन्हें अपील के लिए 60 दिन का वक्त मिलेगा। यदि वे हाईकोर्ट से सजा पर स्थगन (स्टे) लेने में सफल हो जाते हैं तो उनकी विधायकी बच सकती है। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक उनकी सदस्यता पर संकट बना रहेगा।
इस फैसले के बाद दतिया सहित पूरे प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यदि उनकी सदस्यता खत्म होती है तो सीट खाली होगी और उपचुनाव की नौबत बनेगी।
आइए समझते हैं, कौन-कौन से विधायक (MLA) इस समय कानूनी संकट में हैं और उनकी स्थिति क्या है...
1. मुकेश मल्होत्रा: राहत मिली, पर खतरा टला नहीं
विजयपुर सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उन्हें राहत देते हुए उनकी विधायकी बरकरार रखी है। साथ ही शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के उस आदेश पर भी रोक लगा दी है, जिसमें रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया गया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा की दलीलों के बाद जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने मल्होत्रा को विधायक बने रहने की अनुमति दी है। यह राहत पूरी तरह से आजादी नहीं है। कोर्ट ने साफ किया है कि अंतिम फैसला आने तक वे राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे।
साथ ही उन्हें विधायक के तौर पर मिलने वाले वेतन और भत्ते भी फिलहाल नहीं मिलेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को तय की गई है। यानी उनकी कुर्सी अभी अनिश्चितता में है।
2. निर्मला सप्रे: दल-बदल का आरोप, कोर्ट में केस
सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे का मामला दल-बदल कानून से जुड़ा है। वर्ष 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाली निर्मला सप्रे 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के साथ बीजेपी कार्यक्रम में नजर आई थीं। इसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गईं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए स्पीकर के पास याचिका दायर की, जिसमें संविधान की 10वीं अनुसूची का हवाला दिया गया। जब इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ तो मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। हाल ही में सुनवाई के दौरान निर्मला सप्रे ने अदालत में कहा है कि वे अब भी कांग्रेस में हैं।
कोर्ट ने इस बयान को रिकॉर्ड में लिया है और सिंघार से सबूत पेश करने को कहा है। अब 20 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई होनी है, वहीं विधानसभा अध्यक्ष के सामने भी इसी दिन सुनवाई तय है। फिलहाल निर्मला सप्रे की विधायकी अधर में है।
3. अभय मिश्रा: हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप
रीवा की सेमरिया सीट से सिर्फ 637 वोटों से जीतने वाले कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा भी कानूनी संकट में हैं। जबलपुर हाईकोर्ट ने उनकी जीत को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करने से इनकार कर केस को ट्रायल के लिए आगे बढ़ा दिया है।
बीजेपी प्रत्याशी कृष्णपति त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि मिश्रा ने नामांकन के दौरान अपने शपथ पत्र (फॉर्म-26) में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई। आरटीआई के जरिए 9 मामलों का हवाला दिया गया है।
इसके अलावा उन पर ICICI बैंक से लिए गए लोन की जानकारी छिपाने का भी आरोप है। दावा है कि 23 लाख का लोन बढ़कर 50 लाख से ज्यादा हो गया था, जिसे उन्होंने घोषित नहीं किया।
हालांकि, मिश्रा का कहना है कि यह लोन व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कंपनी से जुड़ा था और वे 2008 में उस कंपनी से अलग हो चुके थे। कोर्ट ने इन सभी बिंदुओं को गंभीर मानते हुए सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है। संभावना है कि अप्रैल 2026 के अंत तक इस मामले में अगली सुनवाई होगी।
4. आरिफ मसूद: सुप्रीम कोर्ट से राहत, पर मामला खत्म नहीं
भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ फर्जी सेल डीड से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मामला इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के संचालन से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को एफआईआर दर्ज करने और डीजीपी को एसआईटी गठित करने तक के निर्देश दिए थे।
मसूद ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां उन्हें राहत मिली। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि सरकार का पक्ष सुने बिना ऐसा आदेश देना उचित नहीं था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है और वहीं मेरिट के आधार पर फैसला होगा। यानी मसूद को फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी जारी है।
5. गौतम टेटवाल: जाति प्रमाण पत्र विवाद में फंसे मंत्री
सारंगपुर से विधायक और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल जाति प्रमाण पत्र विवाद में घिरे हुए हैं। इंदौर हाईकोर्ट में इस मामले में कई विरोधाभासी दस्तावेज सामने आए हैं।
याचिकाकर्ता कोमलप्रसाद शाक्य का आरोप है कि टेटवाल ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा था। उनके अनुसार, पुराने रिकॉर्ड में उनकी जाति ‘जीनगर’ दर्ज है, जबकि नए दस्तावेजों में ‘मोची’ बताया गया है।
नगर पालिका रिकॉर्ड, आरटीआई दस्तावेज, पारिवारिक वंशावली और सर्विस बुक जैसे कई साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए हैं। वहीं बचाव पक्ष ने वर्ष 2011 का एक प्रमाण पत्र पेश किया है, जिसमें जाति ‘मोची’ दर्ज है। याचिकाकर्ता ने इस प्रमाण पत्र को संदिग्ध बताया है। इस पूरे मामले में अब कोर्ट को तय करना है कि कौन सा दस्तावेज सही है। फिलहाल यह विवाद टेटवाल के लिए संकट बना हुआ है।
6. संजय पाठक: जज को फोन करना पड़ा भारी
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक के खिलाफ क्रिमिनल कंटेंप्ट की कार्रवाई के आदेश दिए हैं। मामला न्यायाधीश को फोन कर केस पर चर्चा करने की कोशिश से जुड़ा है, जिसे कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर हस्तक्षेप माना है।
हाईकोर्ट ने इस केस को अत्यंत गंभीर मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और साफ किया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। कोर्ट के आदेश के बाद अब विधायक संजय पाठक के खिलाफ विधिवत क्रिमिनल कंटेंप्ट का मामला दर्ज होगा।
यह मामला कटनी के सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष दीक्षित की याचिका से सामने आया है। याचिका माइनिंग से जुड़े आरोपों को लेकर दायर की गई थी, जिसमें विधायक पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
सुनवाई के दौरान जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि सुनवाई के बीच विधायक संजय पाठक ने संबंधित न्यायाधीश को फोन किया और केस पर चर्चा की इच्छा जताई। उन्होंने न्यायाधीश से मुलाकात कर मामले पर बात करने की बात कही। कोर्ट ने इस आचरण को न्यायिक मर्यादा के विपरीत माना है।
ये खबरें भी पढ़ें...
कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा, विधायकी खतरे में
विधायक संजय पाठक पर दर्ज होगा क्रिमिनल कंटेंप्ट केस, जज को फोन करने के मामले में हाईकोर्ट सख्त
निर्मला सप्रे का हाईकोर्ट में यू-टर्न: अब भी कांग्रेस में होने का किया दावा, केस में आया ट्विस्ट
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के कॉलेज की बीयू से मान्यता पर अब होगा एक्शन!
मंत्री गौतम टेटवाल पर सरकारी शिक्षक को जान से मारने का आरोप, ये है पूरा मामला