MP में नाम बदलने की सियासत तेज, RGPV बदला अब बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी समेत किन नामों पर नजर
समझें क्या है पूरा मामला
- MP सरकार ने RGPV का नाम बदलने का फैसला लिया।
- RGPV को तीन अलग विश्वविद्यालयों में बांटा जाएगा।
- भोपाल में मध्यभारत विश्वविद्यालय बनाया जाएगा।
- बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी नाम प्रस्ताव अभी लंबित है।
- सरकार ने प्रशासनिक सुविधा और कौशल विकास बताया कारण।
मशहूर अंग्रेजी साहित्यकार शेक्सपियर ने कहा था नाम में क्या रक्खा है। लेकिन मध्यप्रदेश आइए, यहां सब कुछ नाम में ही है। एक जगह या संस्थान का नाम बदलने का फैसला लागू भी नहीं हो पाता, कि सरकार दूसरा नाम बदल देती है। देखिए न पहले भोपाल की बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का फैसला लिया गया था। उसका क्या हुआ किसी को नहीं पता, और अब सरकार ने राजीव गांधी प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) का नाम बदलने का ऐलान कर दिया।
नाम बदलने की सियासत परवान चढ़ी
मध्यप्रदेश में एक बार फिर नाम बदलने की सियासत परवान चढ़ रही है। सरकार नाम बदलती जा रही है, विपक्ष हमला बोलता जा रहा है। हाल ही में 1 सितंबर 2026 को मोहन यादव कैबिनेट की बैठक हुई।
इस बैठक में भोपाल के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) का नाम बदलने और इसे तीन हिस्सों में बांटने का फैसला लिया गया। सरकार का कहना है कि प्रशासनिक बोझ को कम करने के लिए आरजीपीवी को तीन अलग अलग हिस्सों में बांटा जा रहा है। लेकिन नाम क्यों बदला इस पर सरकार चुप है।
भोपाल में जो कैंपस है उसका नाम अब मध्यभारत प्रौद्योगिकी और कौशल विश्वविद्यालय कर दिया गया है। जबकि उज्जैन में मालवा प्रौद्योगिकी और कौशल विश्वविद्यालय के साथ, जबलपुर में महाकौशल प्रौद्योगिकी और कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।
बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का बदलना था नाम
इसके पहले 3 जून 2026 को विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया गया था। परिषद ने विश्वविद्यालय का नाम मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय करने का प्रस्ताव दिया है।
हालांकि ये प्रस्ताव अब तक पास नहीं हो सका है। मामला उच्च शिक्षा विभाग के पास पेंडिंग है। उच्च शिक्षा से हरी झंडी मिलने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा जाएगा। यानी लगभग 4 महीने बाद भी ये तय नहीं हो सका है कि बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदला भी जाएगा या नहीं।
अब आरजीपीवी का नाम क्यों बदला ?
सरकार का कहना है कि RGPV मध्य प्रदेश की एकमात्र टेक्निकल यूनिवर्सिटी है। जिससे पूरे प्रदेश के 585 संस्थान और लगभग 3.83 लाख छात्र संबद्ध (affiliated) थे। इतने बड़े लेवल पर अकेले एक विश्वविद्यालय को प्रशासनिक लेवल पर काम करना, वक्त पर परीक्षाएं कराना और रिजल्ट जारी करना चुनौतीपूर्ण हो रहा था।
ये भी कहा जा रहा है कि क्योंकि मध्यप्रदेश का क्षेत्रफल बहुत बड़ा है। रीवा, जबलपुर, सागर या अलीराजपुर से छात्रों को छोटे मोटे काम के लिए भोपाल यूनिवर्सिटी के कैंपस आना पड़ता है। इससे छात्रों को परेशानी होती है। तीन हिस्सों में इसे बांटने से छात्रों को ही सुविधाएं मिलेंगी।
सरकार ये भी तर्क दे रही है कि उसका मकसद युवाओं को कौशल से जोड़ना है। अब विश्वविद्यालय में रोजगारन्मुखी कौशल का विकास किया जाएगा। इसलिए विश्वविद्यालय के नाम में प्रौद्योगिकी और कौशल शब्द जोड़ा गया है।
लगातार विवादों में रही है आरजीपीवी
साल 2024 में नियमों को ताक पर रखकर विश्वविद्यालय के फंड को निजी बैकों में ट्रांसफर करने के आरोप लगे थे। ये रकम लगभग 156 करोड़ की थी। पूरा मामला एफडी से जुड़ा था। जुलाई 2026 में परीक्षा से ठीक पहले परीक्षा के स्ट्रांग रूम से क्वेशन पेपर के 9 सील बंद लिफाफे चोरी होने के भी आरोप लगे थे।
कांग्रेस नाम बदलने पर हमलावर
आरजीपीवी का नाम बदलने पर कांग्रेस बीजेपी सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस इसे राजीव गांधी के नाम को मिटाने की कोशिश बता रही है। कमलनाथ ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “नाम बदलकर इतिहास नहीं बदल सकते। अच्छे और बुरे हर काम का हिसाब होता है, हम भी हिसाब करेंगे।”
द सूत्र से बोले आरिफ मसूद
द सूत्र से बातचीत में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि तीन हिस्सों में यूनिवर्सिटी को बांटना ही था तो भोपाल वाले का नाम क्यों बदला ? तीन हिस्सों में बांट देते कोई दिक्कत नहीं थी। बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम फ्रीडम फाइटर के नाम पर है। इसलिए अभी सरकार चुप है। अब जो करना है उच्च शिक्षा विभाग को करना है।
उज्जैन से की थी नाम बदलने की शुरुआत
सीएम मोहन यादव कहते हैं, सरकार ऐसे स्थानों के नाम बदलने का काम करेगी, जिनका नाम लेने में जुबान अटकती है या कलम अटक जाती है। अपने इसी स्टेटमेंट के तहत उन्होंने सबसे पहले उज्जैन जिले के तीन गांवों के नाम बदलने का ऐलान किया था। बड़नगर में हुई जनसभा में सीएम ने कहा था बड़नगर के गजनीखेड़ी गांव का नाम चामुंडा माता नगर होगा। मौलाना गांव का नाम विक्रम नगर और जहांगीरपुर का नाम जगदीशपुर किया जाएगा।
सड़कों के नाम भी बदल डाले
उज्जैन के तीन गांवों का नाम बदलने के बाद सरकार ने शाजापुर जिले के 11 गांवों के नाम बदले। शाजापुर जिले के कालापीपल का मोहम्मदपुर मछनाई गांव मोहनपुर हो गया। इन गांवों को जोड़ने वाली 15 सड़कों के नाम भी बदले गए। अब राज्य में आधा सैकड़ा से ज्यादा गांवों और शहरों के नाम बदलने की मांग जोर पकड़ रही है। इनमें भोपाल, रायसेन, उज्जैन, विदिशा, सीहोर और मंदसौर के कई स्थान शामिल हैं।
भोपाल में यहां के नाम बदलने की मांग
जहांगीराबाद, शाहजहांनाबाद, नजीराबाद, मुबारकपुर, हबीबगंज, आदमपुर छावनी, पिपलिया बाजखां आदि। इतना ही नहीं भोपाल का नाम बदलकर भोजपाल करने की मांग तो काफी पुरानी है। हालांकि राज्य सरकार सिर्फ प्रस्ताव भेज सकती है। अंतिम फैसला केंद्र सरकार को ही करना है।
इंदौर 3 विधायक ने महापौर को लिखी थी चिट्ठी
इंदौर 3 से बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला ने महापौर को चिट्ठी लिखकर अपनी विधानसभा में आने वाले पांच मोहल्लों-कॉलोनियों के नाम बदलने की मांग उठाई थी। वैसे इंदौर में नाम बदलने की सियासत पुरानी है। यहां कई स्थानों का नाम बदला गया है, लेकिन चलन में नहीं हैं।
जैसे राजेंद्र नगर रेलवे ओवर ब्रिज का नाम प्रतीक सेतु रखा गया था। अभी इसे राजेंद्र नगर ब्रिज के नाम से ही पहचाना जाता है। फूटी कोठी चौराहा ब्रिज का नाम संत सेवालाल के नाम किया।
इसे फूटी कोठी फ्लायओवर से ही जानते हैं। केसरबाग ब्रिज का नाम पूर्व महापौर नारायण राव धर्म के नाम है, लेकिन पहचान केसरबाग ब्रिज के नाम से ही है। पत्राचार भी इसी नाम से होता है। बंगाली चौराहा ब्रिज का नाम माधवराव सिंधिया के नाम से है। जुबां पर बंगाली चौराहा ही है।
शिवराज सरकार में बदले गए चार जगहों के नाम
शिवराज सरकार में वर्ष 2018 से 2022 के बीच चार इलाकों के नाम बदले गए थे। इनमें 29 अगस्त 2018 को बिरसिंहपुर पाली का नाम मां बिरासिनी धाम किया गया।
5 नवम्बर 2021 को होशंगाबाद का नाम नर्मदापुरम और बाबई का नाम माखननगर किया गया था। इसके बाद 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर के नसरूल्लागंज कस्बे का नाम बदलकर भैरूंदा किया गया।
इसी अवधि में ही भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन किया गया। भोपाल के मिंटो हॉल का नाम बदलकर कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर किया। जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर किया गया।
इन स्थानों के नाम भी बदलने की भी उठती रही मांग
- वर्तमान नाम संभावित नया नाम
- भोपाल भू-पाल या भोजपाल
- जबलपुर त्रिपुरी या जबालिपुरम
- ग्वालियर गोपांचल
- विदिशा भेलसा या विदावती
- सीहोर सीधापुर
- ओंकारेश्वर मांधाता
- दतिया दिलीप नगर
- महेश्वर महिष्मति
FAQ
- RGPV का नया नाम क्या रखा गया है?
RGPV के भोपाल कैंपस का नाम मध्यभारत प्रौद्योगिकी और कौशल विश्वविद्यालय रखा गया है। - RGPV को कितने हिस्सों में बांटा गया है?
RGPV को तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों में बांटने का फैसला लिया गया है। - मध्यप्रदेश में किन बड़े स्थानों के नाम बदले गए हैं?
होशंगाबाद, बाबई, नसरुल्लागंज, हबीबगंज रेलवे स्टेशन समेत कई स्थानों के नाम बदले गए हैं।
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