शराब ठेकेदारों की मोनोपोली होगी खत्म, तस्करों की भी टूटेगी कमर, आबकारी नीति में यह बदलाव

Sanjay Gupta | Feb 10, 2026, 11:02 IST
liquor monopoly ends smuggling curbed
मध्यप्रदेश सरकार नई आबकारी नीति के माध्यम से शराब सिंडिकेट और तस्करी पर नकेल कसने जा रही है। शराब ठेकेदारों की मोनोपोली खत्म करने के लिए टेंडर प्रक्रिया और तस्करी रोकने हेतु क्यूआर कोड सिस्टम लागू होगा।

INDORE. मध्यप्रदेश की आबकारी नीति इस बार शराब ठेकेदारों की मोनोपोली तोड़ देगी। साथ ही शराब की गुजरात और अन्य राज्यों में तस्करी करने वालों की भी कमर तोड़ी जाएगी। इसके लिए कई अहम बदलाव पर काम किया गया है।



इसमें मुख्य सचिव अनुराग जैन की अहम भूमिका है। उन्होंने आबकारी विभाग को कई अहम निर्देश दिए थे। कैबिनेट में ये नीति आ सकती है। अभी मध्यप्रदेश सरकार की आबकारी ठेकों से सालाना 16 हजार करोड़ की कमाई है।



शराब ठेकेदारों की मोनोपोली तोड़ने के लिए ये अहम बदलाव

शराब ठेकेदारों की मोनोपोली तोड़ने के लिए इस बार सीएस ने आबकारी विभाग को अहम सुझाव दिया है। इसके तहत रिन्यू पॉलिसी खत्म की जाए और पूरी प्रक्रिया टेंडर से की जाए। अभी पुराने ठेकेदार ही शासन की नीति के तहत अधिक दाम पर यह ठेका रिन्यू कर लेते हैं। वही, अब इसमें बदलाव पर विचार हो रहा है, ताकि सभी दुकानें टेंडर से ही जाएं और ठेकेदारों की मोनोपोली खत्म हो जाए।



दूसरा अहम बदलाव ग्रुपिंग को लेकर विचाराधीन है। इसमें ग्रुप को छोटा किया जाए या अभी के अनुसार ही बड़ा रखा जाए, इस पर चर्चा हो रही है। इसमें राजस्व पर पड़ने वाले असर का आंकलन किया जा रहा है। ग्रुप छोटा करने से भी ठेकेदारों की मोनोपोली पर खासा असर होगा।



तस्करों को रोकने के लिए 'ट्रेस एंड ट्रैक' नीति

वहीं शराब तस्करों में अब सीधे शराब ठेकेदारों, डिस्टलरीज की भूमिका तय करने का अहम कदम आ रहा है। यह नीति ट्रेस एंड ट्रैक है, जिसे लाइसेंसधारक ठेकेदारों के दबाव में दो साल से रोका जा रहा था। इसके तहत अब हर शराब पर क्यूआर कोड होगा।



इससे पता रहेगा कि यह किस शराब ठेकेदार की दुकान से निकली है या फिर डिस्टलरी से है। अभी शराब तस्करी पकड़े जाने पर ही बड़ी मछली बच जाती है। साथ ही, केवल ड्राइवर, क्लीनर पर केस बनता है। वहीं, नई नीति में बड़े लोग सीधे धराएंगे।



ठेकेदारों की मांग- प्रॉफिट मार्जिन बढ़े

उधर शराब ठेकेदार दुकान अलॉट होने के लिए 20 फीसदी की बढ़ोतरी के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि लगातार घाटा बढ़ रहा है, वहीं प्रॉफिट मार्जिन 25 फीसदी से भी कम रह गया है। इसलिए इसे बढ़ाकर पूर्ववत किया जाए, जो पहले करीब 37 फीसदी होता था।



15-20 फीसदी बढ़ोतरी पर ही होगा ठेका

वहीं यह भी तय है कि जो भी शराब ठेका होगा, वह अभी के ठेका राशि से 15 से 20 फीसदी अधिक ही होगा। बीती नीति में 20 फीसदी रखा गया था। वहीं इस बार ठेकेदार इसे बहुत ज्यादा बता रहे हैं।



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