एमपी के निगम-मंडल प्रमुखों की पाठशाला आज, सीएम मोहन यादव लेंगे स्पेशल क्लास
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में निगम-मंडल प्रमुखों को आज भोपाल में ट्रेनिंग दी जाएगी।
- 63 नवनियुक्त अध्यक्ष-उपाध्यक्षों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
- सीएम मोहन यादव खुद कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।
- 18 विभागों के वरिष्ठ अफसर अधिकार और जिम्मेदारियां बताएंगे।
- पदभार रैलियों के विवाद के बाद यह ट्रेनिंग आयोजित की जा रही है।
MP निगम-मंडल प्रमुखों को ट्रेनिंग
मध्य प्रदेश में नए निगम-मंडल प्रमुखों के लिए आज यानी 18 मई को एक खास ट्रेनिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह कार्यक्रम भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में आयोजित किया जाएगा। सुबह 9 बजे पंजीयन और स्वल्पाहार के साथ इसकी शुरुआत होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुबह 10 बजे इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन सत्र 11 बजे तक चलेगा। इसके बाद दोपहर 12 से 1 बजे के बीच विभागवार अलग-अलग सत्र आयोजित किए जाएंगे। ट्रेनिंग दोपहर 2 बजे तक चलेगी।
63 पदाधिकारी होंगे शामिल
इस ट्रेनिंग में कुल 63 नवनियुक्त गैर-सरकारी पदाधिकारी भाग लेंगे। ये सभी निगम, मंडल, बोर्ड, प्राधिकरण और आयोगों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हैं। इन्हें मंत्री का दर्जा मिला हुआ है। राज्य के कई अहम संस्थानों के प्रमुख इस कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।
नियुक्त नेताओं में रामकृष्ण कुसमरिया (अध्यक्ष, मप्र पिछड़ा वर्ग आयोग), जयभान सिंह पवैया (अध्यक्ष, राज्य वित्त आयोग), रामलाल रौतेल (अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति आयोग), रेखा यादव (अध्यक्ष, महिला आयोग), प्रवीण शर्मा (अध्यक्ष, मप्र युवा आयोग), और संजय नगाइच (अध्यक्ष, मप्र वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन) जैसे कई चर्चित नाम शामिल होंगे। विकास प्राधिकरणों, बोर्डों और आयोगों के दर्जनों पदाधिकारी इस प्रशिक्षण में पहुंचेंगे।
18 विभागों के अफसर रहेंगे मौजूद
सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश पर 18 विभागों के वरिष्ठ अफसर इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। इनमें अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। ये नवनियुक्त अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को निगम-मंडलों के कामकाज की पूरी जानकारी देंगे।
वित्तीय प्रबंधन, शासन प्रक्रियाएं, नीतियां, दायित्व और अधिकार जैसे विषयों पर प्रजेंटेशन दिए जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग, वित्त विभाग और अटल बिहारी वाजपेयी संस्थान के अफसरों द्वारा भी अलग-अलग सत्रों में जानकारी साझा की जाएगी।
रैली विवाद से शुरू होगी बात
दरअसल इस ट्रेनिंग की पृष्ठभूमि में एक बड़ा विवाद है। हाल ही में कई निगम-मंडल प्रमुखों ने पदभार ग्रहण करते वक्त बड़ी-बड़ी वाहन रैलियां निकालीं थीं। इस पर बीजेपी (BJP - Bharatiya Janata Party) के केंद्रीय नेतृत्व ने नाराजगी जाहिर की और मप्र बीजेपी को फटकार पड़ी थी।
पार्टी ने इसके बाद सख्त कदम उठाए हैं। भिंड किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह ठाकुर को पद से हटा दिया गया है। पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर को नोटिस जारी करते हुए उनके अधिकार अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिए गए हैं।
मंत्रियों से टकराव न हो, इसलिए भी ट्रेनिंग
यह ट्रेनिंग सिर्फ रैली विवाद तक सीमित नहीं है। निगम-मंडल प्रमुखों और विभागीय मंत्रियों या अफसरों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बन जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन पदाधिकारियों को अपने अधिकारों और सीमाओं की पूरी जानकारी नहीं होती।
इसी वजह से इस ट्रेनिंग में खासतौर पर यह बताया जाएगा कि अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के अधिकार क्या हैं और उनकी सीमाएं कहां तक हैं।
अटल संस्थान बना ट्रेनिंग का केंद्र
भोपाल का अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान राज्य सरकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का प्रमुख केंद्र है। इस संस्थान की इमारत पर सुशासन सदन लिखा हुआ है। यहां सरकारी अफसरों और जन-प्रतिनिधियों के लिए कई तरह के प्रशिक्षण आयोजित होते हैं। इस बार भी यही संस्थान ट्रेनिंग की मेजबानी का जरिया बन रहा है।
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