मोहन सरकार में 'साइलेंट' हुए शिवराज के सूरमा, पूर्व मंत्रियों को निगम-मंडलों में कुर्सी नहीं

Ravi Kant Dixit | May 08, 2026, 16:57 IST
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Photograph: (THESOOTR)

BHOPAL, मोहन सरकार में हो रही नियुक्तियों में इन पूर्व मंत्रियों को जगह नहीं मिली है। संगठन में भी इनके पास कोई अहम जिम्मेदारी नहीं है। बीजेपी के कई पुराने और प्रभावशाली चेहरे आज राजनीतिक तौर पर हाशिए पर नजर आ रहे हैं।

मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में नियुक्तियों का दौर तेज है। नेताओं को जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। कई चेहरों पर खुशी है तो कई खेमों में मायूसी पसरी हुई है।

इस पूरी कवायद के बीच एक बड़ा सवाल राजनीतिक गलियारों में लगातार गूंज रहा है कि आखिर शिवराज सरकार के वे दिग्गज मंत्री कहां हैं, जिनकी कभी सत्ता और संगठन में तूती बोलती थी?

दरअसल, 2023 विधानसभा चुनाव में शिवराज सरकार के 12 मंत्री चुनाव हार गए थे। इनमें बीजेपी के कोर कैडर के बड़े चेहरे भी शामिल थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के नेता भी थे।

चुनाव हारने के बाद माना जा रहा था कि पार्टी इन नेताओं को निगम-मंडल, प्राधिकरण या संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर एडजस्ट करेगी, पर अब तक ऐसा होता दिखाई नहीं दिया है।

मोहन सरकार में हो रही नियुक्तियों में इन पूर्व मंत्रियों को जगह नहीं मिली है। संगठन में भी इनके पास कोई अहम जिम्मेदारी नहीं है। बीजेपी के कई पुराने और प्रभावशाली चेहरे आज राजनीतिक तौर पर एक तरह से हाशिए पर नजर आ रहे हैं।

60 नेताओं को मिले पद

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार के करीब ढाई साल के कार्यकाल के दौरान प्रदेश में निगम-मंडल-प्राधिकरणों में लगातार नियुक्तियां की जा रही हैं। अब तक 10 प्राधिकरण, 8 निगम-मंडल और 5 आयोगों में 60 से ज्यादा नेताओं को पद दिए जा चुके हैं। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह क्षेत्र उज्जैन से सबसे ज्यादा 9 नियुक्तियां हुई हैं। शिवराज सरकार के कई बड़े चेहरे अब तक अपने पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं।

2023 चुनाव में हारने वाले मंत्री, जिन्हें कुर्सी का इंतजार!

खांटी भाजपाई चेहरे

नरोत्तम मिश्रा, अरविंद भदौरिया, कमल पटेल, गौरीशंकर बिसेन, प्रेम सिंह पटेल, रामखेलावन पटेल, राहुल सिंह लोधी, रामकिशोर कांवरे 2023 में चुनाव हार गए थे। भारत सिंह कुशवाह भी शिवराज सरकार में मंत्री थे, पर चुनाव हार गए। बाद में उन्हें वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव का टिकट मिला और वे ग्वालियर से सांसद बन गए।

सिंधिया खेमे के नेता...

महेंद्र सिंह सिसौदिया, सुरेश धाकड़ और राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव।

इन सभी नेताओं को हाल ही में हुई निगम-मंडलों की नियुक्तियों में जगह नहीं मिली है। इतना ही नहीं, इनमें से ज्यादातर नेताओं को संगठनात्मक ढांचे में भी कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी गई है।

जानिए, इन दिनों क्या कर रहे पूर्व मंत्री...

नरोत्तम मिश्रा

शिवराज सरकार में कद्दावर गृह मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा इन दिनों दतिया की राजनीति में सक्रिय हैं। स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर उनकी नजर बनी हुई है। फिलहाल सरकार या संगठन में उनके पास कोई अहम जिम्मेदारी नहीं है, हालांकि वे बीजेपी की कोर कमेटी में हैं।

अरविंद भदौरिया

पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया के पास भी फिलहाल कोई संगठनात्मक पद नहीं हैं। वे बीजेपी की प्रदेश कोर टीम का हिस्सा जरूर हैं और हाल ही में भोपाल में हुई कोर कमेटी की बैठक में शामिल हुए थे।

रामखेलावन पटेल

शिवराज सरकार में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री रहे रामखेलावन पटेल इन दिनों अपने गृह क्षेत्र में सक्रिय नजर आते हैं। सरकार और संगठन दोनों में फिलहाल उनके पास कोई पद नहीं है।

प्रेम सिंह पटेल

पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेम सिंह पटेल अपने क्षेत्र बड़वानी में सक्रिय हैं। कुछ महीने पहले उन्होंने नर्मदा परिक्रमा की थी। मध्यप्रदेश की राजनीति और धार्मिक परंपरा में नर्मदा परिक्रमा का विशेष महत्व माना जाता है।

कमल पटेल

पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल इन दिनों हरदा में स्थानीय कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय हैं। हालांकि सरकार और संगठन में उनके पास अभी कोई उल्लेखनीय जिम्मेदारी नहीं है।

गौरीशंकर बिसेन

बीजेपी के वरिष्ठ नेता गौरीशंकर बिसेन भी फिलहाल सत्ता और संगठन दोनों से दूर नजर आ रहे हैं। वे अपने बयानों को लेकर चर्चा में जरूर रहते हैं। हालांकि गत वर्ष तक वे अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष थे।

ये पूर्व मंत्री भी सत्ता-संगठन से दूर

वहीं, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया, राहुल सिंह लोधी, रामकिशोर कांवरे, सुरेश धाकड़ और राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव के पास भी फिलहाल सत्ता और संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या बीजेपी आने वाले समय में इन पूर्व मंत्रियों को कोई नई भूमिका देगी या फिर शिवराज सरकार के ये बड़े चेहरे धीरे-धीरे सक्रिय सत्ता राजनीति से दूर होते जाएंगे।

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