नीति आयोग की रिपोर्ट: MP के स्कूल्स में 3.37 लाख से ज्यादा बच्चों ने बीच में छोड़ी पढ़ाई
MP News:नीति आयोग ने भारतीय स्कूली शिक्षा पर एक नई रिपोर्ट जारी की है। नीति आयोग की रिपोर्ट ने हमारी शिक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में भी सरकारी स्कूलों की हालत चिंताजनक है। हजारों स्कूलों में बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं मौजूद नहीं हैं।
कई जगहों पर छात्रों के लिए शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। यह रिपोर्ट केवल खराब बुनियादी ढांचे तक ही सीमित नहीं है। इसमें शिक्षकों की भारी कमी का भी जिक्र किया गया है। गिरता हुआ शैक्षणिक स्तर देश के लिए एक बड़ी चुनौती है। छात्रों के बीच बढ़ती 'ड्रॉप-आउट' दर भी डराने वाली है। आइए जानते हैं कि क्या कहती है रिपोर्ट...
स्कूल में बुनियादी सुविधाएं देने में MP का हाल
मध्यप्रदेश के स्कूलों की हालत को लेकर नए आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट बताती है कि राज्य में कुल 1 लाख 22 हजार120 स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें से 92 हजार 250 स्कूल पूरी तरह सरकारी हैं। बिजली की बात करें तो सरकारी स्कूलों की स्थिति खराब है। केवल 85.4% सरकारी स्कूलों में ही बिजली की सुविधा है। करीब 13 हजार 500 से ज्यादा स्कूल अंधेरे में चल रहे हैं।
लड़कियों के शौचालयों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। करीब 1 हजार 916 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं हैं। सरकारी स्कूलों में यह सुविधा केवल 86.8% ही है। दिव्यांग बच्चों के लिए भी स्कूल सुरक्षित नहीं हैं।
केवल 13.7% सरकारी स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय हैं। डिजिटल सुविधा के मामले में एमपी काफी पीछे है। माध्यमिक स्कूलों में 15% लैब की भारी कमी है। पिछले एक साल में 1 हजार 292 स्कूल बंद हो गए हैं। यह राज्य के शिक्षा तंत्र के लिए बड़ी चुनौती है।
ड्रॉप-आउट रेट- MP की चिंताजनक तस्वीर
मध्यप्रदेश में बच्चों की पढ़ाई बीच में छूटना एक बड़ी समस्या है। भारत में स्कूल छोड़ने की औसत दर 11.5% बनी हुई है। मध्यप्रदेश में सेकेंडरी स्तर पर लड़के लड़कियों से कहीं आगे हैं।
यहां लड़कों का ड्रॉपआउट रेट 18.9% और लड़कियों का 14.6% है। एसर (aser report) की रिपोर्ट के अनुसार 15-16 साल का उम्र वर्ग सबसे नाजुक है। इस आयु वर्ग में ड्रॉपआउट की दर बढ़कर 14.3% हो गई है। चिंता की बात यह है कि लड़कियां लड़कों से ज्यादा पढ़ाई छोड़ रही हैं। छोटी उम्र में लड़कियों का ड्रॉपआउट 15% और लड़कों का 11% है।
पूरे देश में एमपी बच्चों के ड्रॉपआउट के मामले में चौथे नंबर पर है। मध्यप्रदेश में कुल 3 लाख 37 हजार 265 बच्चों ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बीच में ही छोड़ दी। बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बाद मध्यप्रदेश की स्थिति सबसे गंभीर है।
पूरे स्कूल में केवल एक ही टीचर
- सिंगल टीचर स्कूल: देश में 1 लाख 4 हजार 125 स्कूल ऐसे हैं जो केवल एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इनमें से 89% स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं।
- बिहार: 2 लाख 8 हजार 784 पद खाली।
- झारखंड: 80 हजार 341 पद खाली।
- मध्य प्रदेश: 47 हजार 122 पद खाली।
- बिहार: 2 लाख 8 हजार 784 पद खाली।
- झारखंड: 80 हजार 341 पद खाली।
- मध्य प्रदेश: 47 हजार 122 पद खाली।
- योग्यता का स्तर: रिपोर्ट में शिक्षकों की एलिजिबिलिटी पर भी चिंता जताई गई है। गणित के केवल 2 प्रतिशत शिक्षक ही परीक्षा में 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर पाए, जबकि औसत अंक मात्र 46 प्रतिशत रहा।
छात्रों के ड्रॉप-आउट रेट में बढ़ोतरी
देश में माध्यमिक स्तर पर शिक्षा छोड़ने वाले बच्चों (dropout student) का राष्ट्रीय औसत 11.5% है। इन राज्यों में स्थिति बहुत बुरी है।
- पश्चिम बंगाल: 20% (सर्वाधिक)
- अरुणाचल प्रदेश और कर्नाटक: 18.3%
- असम: 17.5%
उत्तर प्रदेश और बिहार में भी यह ग्राफ बढ़ा है। इसके अलावा, देश में 7 हजार 993 ऐसे फर्जी या भूतिया स्कूल हैं जहां नामांकन (Enrollment) शून्य है। पश्चिम बंगाल में ऐसे स्कूलों की संख्या सबसे अधिक 3 हजार 812 है।
जीडीपी का हिस्सा और 'परख' इंडेक्स
भारत वर्तमान में अपनी जीडीपी का केवल 4.6 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करता है, जबकि विकसित देश जैसे अमेरिका और ब्रिटेन 5.9 प्रतिशत तक खर्च करते हैं।
रिपोर्ट में 'परख' (PARAKH) के अनुसार पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र का प्रदर्शन बेहतर रहा है, जबकि झारखंड और जम्मू-कश्मीर का प्रदर्शन खराब रहा है।
FAQ
- MP के स्कूलों में बिजली-पानी की क्या स्थिति है?
प्रदेश के 13,500 से ज्यादा स्कूलों में बिजली नहीं है। लगभग 1,916 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। - मध्य प्रदेश में ड्रॉप-आउट रेट कितना है?
ड्रॉप-आउट के मामले में MP देश में चौथे नंबर पर है। सेकेंडरी स्तर पर 18.9% लड़के और 14.6% लड़कियां पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। - शिक्षकों की कमी को लेकर क्या आंकड़े हैं?
MP में शिक्षकों के 47,122 पद खाली हैं। राज्य में हजारों स्कूल ऐसे हैं जो सिर्फ एक शिक्षक (Single Teacher) के भरोसे चल रहे हैं। - पढ़ाई प्रभावित होने का बड़ा कारण क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों का औसतन 14% समय चुनाव ड्यूटी और प्रशासनिक कार्यों जैसे गैर-शैक्षणिक कामों में चला जाता है। - शिक्षा पर भारत कितना खर्च करता है?
भारत अपनी जीडीपी (GDP) का 4.6% शिक्षा पर खर्च करता है, जबकि विकसित देश लगभग 5.9% तक खर्च करते हैं।
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