27% आरक्षण पर सरकार को घेरने की तैयारी, जबलपुर के भेड़ाघाट में दो दिन जुटेंगे OBC संगठन
हाई कोर्ट के फैसले और सरकार की पैरवी पर उठेंगे सवाल
आयोजकों ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आरक्षण संबंधी फैसले की समीक्षा को अधिवेशन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार, विधि विभाग और महाधिवक्ता कार्यालय की कमजोर पैरवी के कारण OBC वर्ग के आरक्षण को नुकसान पहुंचा है। अधिवेशन में इन आरोपों, सरकार की भूमिका और आरक्षण के कानूनी पक्ष पर चर्चा की जाएगी। ये आरोप आयोजकों के हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस प्रेस नोट में नहीं की गई है।
कई जातीय महासभाओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी
इस संगम में अखिल भारतीय तेली साहू महासभा, अखिल भारतीय लोधी महासभा, पिछड़ा वर्ग लोधी महासभा, कुशवाहा-मौर्य महासभा, यादव महासभा, कुर्मी महासभा और सेन महासभा के प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा OBC क्रांति सेना, सरदार पटेल सेना, कुश सेना, पिछड़ा वर्ग संयुक्त मोर्चा, OBC/SC/ST विकास समिति, OBC महासभा और अखिल भारतीय OBC महासभा सहित कई संगठनों को आमंत्रित किया गया है।
अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी रहेगी मौजूदगी
प्रेस नोट के अनुसार, अपाक्स संघ, अजाक्स संघ, अखिल भारतीय आदि सनातन महासभा और OBC फ्रंट ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। OBC एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन तथा हाई कोर्ट प्रोग्रेसिव एडवोकेट्स एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं की भागीदारी भी प्रस्तावित है। दलित, पिछड़ा और आदिवासी महासंघ (DPS महासंघ) के पदाधिकारी दामोदर यादव के भी विशेष रूप से शामिल होने की जानकारी दी गई है।
महाधिवक्ता की भूमिका और कानूनी रणनीति पर होगी चर्चा
आयोजकों ने महाधिवक्ता कार्यालय की कार्यप्रणाली और आरक्षण के मामले में सरकार की कानूनी रणनीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रभावित वर्ग के हितों की प्रभावी पैरवी नहीं होने से आरक्षण का मुद्दा गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। अधिवेशन में इस बात पर चर्चा होगी कि कानूनी स्तर पर आगे क्या कदम उठाए जाएं और OBC वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए किस तरह की रणनीति तैयार की जाए।
230 विधानसभा क्षेत्रों तक आंदोलन ले जाने की तैयारी
संगम का घोषित नारा ‘आरक्षण बचाओ, संविधान के अधिकार बचाओ’ रखा गया है। आयोजकों के मुताबिक, अधिवेशन में चर्चा के बाद मध्य प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाने की योजना है। इसके तहत भाजपा सरकार को आरक्षण के मुद्दे पर घेरने और लोगों के बीच अपना पक्ष रखने की तैयारी की जाएगी। इस तरह भेड़ाघाट का दो दिवसीय आयोजन आरक्षण पर चर्चा के साथ-साथ आगे की राजनीतिक और सामाजिक रणनीति तय करने का मंच भी बन सकता है।