OBC आरक्षण पर अगले 2 महीने में आ जाएगा फैसला, अंतिम दौर की सुनवाई शुरू, 6 साल का इंतजार होगा खत्म
News in Short
- अगले दो महीनो के भीतर आ जाएगा ओबीसी आरक्षण का फैसला
- चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने जल्द सुनवाई पूरी करने के संकेत दिए
- 2 अप्रैल तक सभी पक्षों को डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर जवाब दाखिल करने के निर्देश
- 16 अप्रैल से शुरू होगी मामले की अंतिम सुनवाई
- लगातार दायर हस्तक्षेप याचिकाओं पर कोर्ट सख्त, देरी की कोशिशें नहीं होंगी स्वीकार
- 14% से 27% OBC आरक्षण और 87-13 फॉर्मूला ही विवाद की जड़
News in details
मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि अब इस मामले को और लंबा नहीं खींचा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की 90 दिन की समयसीमा के भीतर ही अगले दो महीने में बड़ा फैसला आने की हाईकोर्ट ने पुष्टि कर है।
OBC आरक्षण का मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो वहां से इसे स्पष्ट निर्देशों के साथ वापस हाईकोर्ट भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला वर्षों से “पिंग-पोंग” की तरह घूम रहा है, इसलिए अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ही इसकी वैधानिकता पर अंतिम निर्णय करेगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के 90 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी करने की सख्त समयसीमा का पालन भी हाईकोर्ट कर रहा है। अब अगले दो महीने में इस मामले में अंतिम फैसला आना तय है। 16 अप्रैल से मामले की फाइनल हियरिंग भी तय कर दी गई है।
चीफ जस्टिस की बेंच ने दिए साफ संकेत, अब नहीं होगी देरी
सोमवार 23 मार्च 2026 को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कर दिया कि अब इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाएगा। कोर्ट ने माना कि मामला लंबे समय से लंबित है और अब जल्द से जल्द आदेश पारित किया जाएगा।
इस मामले में सभी पक्षों को 2 अप्रैल तक अपने जवाब को कोर्ट में सबमिट करने का समय दिया गया है। रजिस्ट्रार को भी निर्देश दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट से जो मामले अभी ट्रांसफर नहीं हुए हैं वह भी इस दिन लिस्ट कर दिए जाएं। इसके बाद भी सभी पक्षों को अपना पक्ष सबमिट करने के लिए एक सप्ताह का समय मिलेगा और इसके बाद इस मामले की अंतिम सुनवाई 16 अप्रैल से शुरू होगी।
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6 साल से लंबित मामला, देरी पर कोर्ट भी संजीदा
सामान्य वर्ग की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट को बताया कि यह मामला पिछले 6 वर्षों से लंबित है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद लिस्टिंग में ही समय निकल गया। इस पर कोर्ट ने सहमति जताते हुए स्पष्ट किया कि अब समय बर्बाद नहीं किया जाएगा और तय सीमा में ही सुनवाई पूरी होगी।
हस्तक्षेप याचिकाओं पर सख्ती, अब नहीं चलेगा टालमटोल
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि बार-बार इंटरवेंशन एप्लिकेशन दाखिल कर मामले को टाला जाता रहा है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि अंतिम सुनवाई में सभी पक्षों को सुना जाएगा, लेकिन केवल देरी के उद्देश्य से दायर याचिकाओं को अब एंटरटेन नहीं किया जाएगा।
2 अप्रैल तक जवाब, 16 अप्रैल से शुरू होगी निर्णायक सुनवाई
हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि 2 अप्रैल तक सभी पक्ष अपने जवाब डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर दाखिल करें। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट से ट्रांसफर की गई जो पेटीशन अब तक लिस्ट नहीं हुई है वह भी 2 अप्रैल को लिस्ट हो जाएंगी। इसके बाद इस मामले की नियमित और अंतिम सुनवाई 16 अप्रैल से शुरू होगी। कुछ याचिकाएं अभी सुप्रीम कोर्ट से दस्तावेज न आने के कारण लिस्ट नहीं हो पाई हैं, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी।
90 दिनों का समय, अब बचे 60 दिन
सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद लगभग एक महीना बीत गया है जिसके बाद यह मामला हाईकोर्ट में लिस्ट हुआ है। इसलिए 90 दिनों की समय सीमा में से अब लगभग 60 दिन ही बचे हैं और हाई कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट की समय सीमा में ही यह फैसला आएगा यानी अगले दो महीनो में अंतिम फैसला आना तय है।
मुख्य याचिका’ पर विवाद, कोर्ट ने कहा दोनों साथ सुनेंगे
मामले में यह भी बड़ा विवाद सामने आया कि कौन सी याचिका मुख्य मानी जाए। अनारक्षित वर्ग ने WP 5901/2021 को मुख्य याचिका बताया। जबकि आरक्षित वर्ग ने शिवम गुप्ता की याचिका को मुख्य बताया। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि दोनों याचिकाओं को साथ में सुना जाएगा, जिससे किसी पक्ष को नुकसान न हो।
14% से 27% OBC आरक्षण और 87-13 फॉर्मूला बना विवाद की जड़
मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% किया गया था, जिसके बाद 87-13 फॉर्मूला लागू किया गया। इसमें 13% पदों को होल्ड पर रखा गया। इसी को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और 50% सीमा के आधार पर अंतरिम आदेश भी दिए गए। यही कारण है कि हजारों भर्तियां और उम्मीदवार वर्षों से अटके हुए हैं।
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अब सबकी नजर हाईकोर्ट पर, जल्द खत्म होगा इंतजार
अब स्थिति साफ है कि हाईकोर्ट इस मामले को प्राथमिकता से सुनते हुए जल्द फैसला देगा। सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा और हाईकोर्ट की सख्ती को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है कि अगले 60 दिनों में OBC आरक्षण पर अंतिम निर्णय आ जाएगा।
ऐसे में लाखों अभ्यर्थियों और पूरे प्रदेश की नजर अब इस फैसले पर टिकी है, जो भर्ती, आरक्षण और भविष्य की नीतियों को पूरी तरह बदल सकता है।