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BHOPAL. मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही लंबी कानूनी जंग में नया मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट का विस्तृत आदेश अब अपलोड हो चुका है। इसके तहत सभी याचिकाओं, विशेष अनुमति याचिकाओं (SLPs) और ट्रांसफर मामलों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट वापस भेज दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस पूरे मामले का अंतिम निर्णय तीन महीने के भीतर करे।
न्यायमूर्ति पामिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने आदेश दिया कि राज्य के 2019 संशोधन अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर हाईकोर्ट ने अभी तक अंतिम निर्णय नहीं दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से विशेष पीठ बनाने का अनुरोध किया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह मामला लंब समय से इधर-उधर घूम रहा है, जिससे भर्तियां और अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
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कई भर्तियां अधर में लटकी
मध्यप्रदेश में 1994 के अधिनियम के तहत ओबीसी को 14% आरक्षण प्राप्त था, जिसे 2019 में बढ़ाकर 27% कर दिया गया। इस वृद्धि को 50% आरक्षण सीमा (इंदिरा साहनी प्रकरण) के उल्लंघन के आधार पर चुनौती दी गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई और कई भर्तियां अधर में लटक गईं।
फिलहाल राज्य सरकार 87-13 फॉर्मूले के तहत 13% पद होल्ड पर रखे हुए है। अब सुप्रीम कोर्ट की तीन महीने की समय-सीमा के साथ, सभी की नजरें हाईकोर्ट की प्रस्तावित विशेष पीठ पर हैं। यह पीठ तय करेगी कि प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण संवैधानिक रूप से लागू रहेगा या नहीं।
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