MP हाईकोर्ट लौटा OBC आरक्षण मामला, अब रिव्यू के जरिए फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

ओबीसी आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को वापस भेज दिया है। ओबीसी के वकीलों ने फैसले में गलतियां होने का दावा करते हुए रिव्यू याचिका दायर की है।

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Neel Tiwari
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MP High Court returned OBC reservation case

Photograph: (the sootr)

News in Short

  • OBC आरक्षण के सभी केस सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर हुए थे।
  • अब ये मामले फिर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भेजे गए हैं।
  • OBC पक्ष आदेश में त्रुटि बताकर रिव्यू याचिका दायर कर रहा।
  • सामान्य वर्ग के छात्र इसे देरी की रणनीति बता रहे हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने तीन माह विशेष बेंच बना निपटारे को कहा था 

सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण से जुड़े मामले फिर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भेज दिए थे। OBC पक्ष का आरोप है फैसले में गलतियां है और अब आदेश में सुधार के लिए रिव्यू याचिका दायर की जा रही है। सामान्य वर्ग के छात्र इसे केस लटकाने की कोशिश बता रहे हैं।

News in detail

OBC आरक्षण से जुड़े कई मामले पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चल रहे थे। राज्य सरकार ने इन्हें सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर कराया था। इन मामलों को छत्तीसगढ़ के आरक्षण मामलों के साथ जोड़ा गया। 19 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया। कोर्ट ने सभी मामलों को फिर हाईकोर्ट भेज दिया। साथ ही विशेष अनुमति याचिकाएं भी वापस कर दी गईं। अब इन मामलों की सुनवाई फिर जबलपुर में होगी। लेकिन अब ओबीसी वर्ग के वकीलों ने इस फैसले को त्रुटिपूर्ण बताया है।

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OBC पक्ष की आपत्ति, दायर हो रही रिव्यू पिटिशन

OBC पक्ष के वरिष्ठ वकील रामेश्वर सिंह ठाकुर ने आपत्ति जताई है। उनके अनुसार आदेश में आधारभूत त्रुटि है। वकील का तर्क है कि SLP पर फैसला किए बिना वापसी गलत है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश निरस्त नहीं किए गए।

फिर भी मामले वापस भेज दिए गए। इसी आधार पर रिव्यू याचिका दायर होगी। OBC पक्ष का दावा है कि उन्हें पूरा अवसर नहीं मिला। उनका कहना है कि मामले हाईकोर्ट रिमांड करने से पहले सुनवाई जरूरी थी।

सामान्य वर्ग के छात्रों का आरोप

दूसरी ओर सामान्य वर्ग के छात्र नाराज दिख रहे हैं। वे रिव्यू को देरी की रणनीति बता रहे हैं। छात्रों का कहना है कि केस पहले ही लंबा खिंच चुका है। उनका आरोप है कि जानबूझकर समय बर्बाद किया जा रहा है। वे कहते हैं कि पहले सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया गया। छात्रों का दावा है कि 26 याचिकाओं पर स्टे लागू है। वे कहते हैं कि एक्ट पर स्टे नहीं बताना गलत था।

तीन महीने की समयसीमा और नई रणनीति

सुप्रीम कोर्ट ने तीन माह में विशेष बेंच बनाने को कहा है। कोर्ट ने जल्दी सुनवाई के निर्देश दिए थे। सामान्य वर्ग के छात्र इसे अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि अब रिव्यू लाकर देरी की कोशिश है। छात्रों का आरोप है कि 13 प्रतिशत होल्ड से राजनीति चल रही है। हालांकि OBC पक्ष इन आरोपों को गलत बता रहा है। उनका कहना है कि वे सिर्फ कानूनी अधिकार का उपयोग कर रहे हैं।

SC कोर्ट में क्या हुआ था सुनवाई के दौरान

सूत्रों के अनुसार सुनवाई के दौरान तीखी बहस हुई। बताया जा रहा है कि जजों ने कई बार सवाल पूछे। कुछ मौकों पर वकीलों को सावधान भी किया गया। कोर्ट ने साफ किया कि मामले का जल्द निपटारा जरूरी है।सबकी नजर हाईकोर्ट की विशेष बेंच पर थी लेकिन अब फिर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन के फैसले का इंतजार करना होगा।

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आगे क्या होगा, किसे है फायदा

अब मामला फिर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुना जाना था। हाईकोर्ट में विशेष बेंच भी गठित होनी है लेकिन रिव्यू याचिका दाखिल होने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। यह विवाद सिर्फ कानूनी नहीं है। इसका असर हजारों छात्रों पर पड़ रहा है। भर्ती और प्रवेश प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। आने वाले सप्ताह इस केस के लिए अहम होंगे। फैसला चाहे जो हो, असर बड़ा होगा।

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