MP OBC Reservation: ओबीसी महासभा का सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम, 28 अक्टूबर को प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी
मुख्यमंत्री से मुलाकात में क्या हुआ?
ओबीसी महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। इस दौरान 27 प्रतिशत आरक्षण, लंबित भर्तियों और 13 प्रतिशत होल्ड पदों का मुद्दा उठाया। संगठन ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में लंबे समय से फंसे अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए सरकार जल्द निर्णय ले।
महासभा के अनुसार, मुख्यमंत्री ने बताया कि मामले की कानूनी समीक्षा की जा रही है। साथ ही, अतिरिक्त पदों के माध्यम से भर्ती की संभावनाएं तलाशने का आश्वासन दिया। हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया कि वह केवल आश्वासन के बजाय ठोस निर्णय चाहता है।
क्या है 13 प्रतिशत होल्ड पदों का मामला?
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर विवाद के बीच वर्ष 2022 में भर्ती प्रक्रिया के लिए 87:13 का फॉर्मूला अपनाया गया था। इसके तहत 87 प्रतिशत पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों को विवाद के अंतिम समाधान तक होल्ड रखा गया। इन पदों से जुड़ी नियुक्तियों का इंतजार कर रहे अभ्यर्थी अब स्पष्ट निर्णय चाहते हैं। ओबीसी महासभा ने मांग की है कि प्रभावित उम्मीदवारों को राहत देने के लिए अतिरिक्त पद सृजित करने सहित सभी वैधानिक विकल्पों पर विचार किया जाए।
हाईकोर्ट के फैसले का भर्ती पर क्या असर पड़ा?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों में फैसला सुनाते हुए वर्ष 2019 के उस संशोधन को असंवैधानिक ठहराया, जिसके जरिए राज्य में ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था। फैसले के बाद राज्य में 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू रहने की स्थिति बनी है।
महाधिवक्ता के अनुसार, अदालत ने लंबित पदों को अनारक्षित चयन सूची से भरने और संबंधित भर्ती संस्थाओं को तीन महीने के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) और कर्मचारी चयन मंडल शामिल हैं।
हालांकि, होल्ड पदों पर नियुक्तियों को लेकर अभ्यर्थियों की चिंताएं बनी हुई हैं। महासभा अतिरिक्त पदों के जरिए भर्ती का रास्ता निकालने और प्रभावित उम्मीदवारों को राहत देने की मांग कर रही है।
हजारों पदों पर भर्ती प्रभावित
ओबीसी आरक्षण विवाद के कारण विभिन्न सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पद लंबित बताए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कर्मचारी चयन मंडल की भर्तियों में करीब 9,500 पद और MPPSC की विभिन्न परीक्षाओं में लगभग 1,300 पद प्रभावित बताए गए हैं।
इनमें राज्य सेवा, इंजीनियरिंग और आयुष से संबंधित भर्तियां शामिल हैं। हालांकि, इन आंकड़ों का आधिकारिक विभागवार सत्यापन और लंबित नियुक्तियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
28 अक्टूबर को ज्ञापन, फिर आंदोलन की तैयारी
ओबीसी महासभा ने सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए दो से तीन दिन का समय दिया है। संगठन के मुताबिक, 28 अक्टूबर को संभागीय स्तर पर ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके बाद सरकार की प्रतिक्रिया के आधार पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
महासभा ने मुख्यमंत्री को 14 सूत्रीय मांगपत्र भी सौंपा है। इसमें आरक्षण विवाद पर कानूनी विशेषज्ञों का पैनल बनाने, सुप्रीम कोर्ट में अपील की संभावनाओं पर विचार करने और लंबित भर्तियों की समीक्षा कराने जैसी मांगें शामिल हैं।
सामाजिक-आर्थिक सर्वे और नए कानून की मांग
महासभा ने ओबीसी वर्ग की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का आकलन करने के लिए सर्वे कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि शिक्षा, रोजगार और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा की जानी चाहिए।
इसके अलावा, महासभा ने आरक्षण से संबंधित कानूनी विकल्पों पर विचार करने और लंबित भर्तियों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने की मांग भी रखी है। हालांकि, किसी नए कानून या अतिरिक्त पदों के जरिए भर्ती का प्रस्ताव संवैधानिक और कानूनी कसौटियों पर खरा उतरना जरूरी होगा।
अब सरकार के अगले कदम पर नजर
ओबीसी आरक्षण विवाद में अब सरकार की कानूनी समीक्षा और लंबित भर्तियों को लेकर प्रस्तावित कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। महासभा ने 13 प्रतिशत होल्ड पदों से प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत देने की मांग दोहराई है।
फिलहाल, अभ्यर्थियों को सरकार के आधिकारिक निर्णय का इंतजार है। यदि तय समय में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो संगठन 28 अक्टूबर से आंदोलन का अगला चरण शुरू करने की तैयारी में है।