सिंगरौली उप पंजीयक की सेवा समाप्त, तीसरी संतान बनी वजह, जानें मामला
समझें क्या है पूरा मामला...
- तीसरी संतान निकली नौकरी जाने की वजह।
- दो बच्चों के नियम ने ले ली सरकारी कुर्सी।
- सिंगरौली के अफसर की सेवा हुई समाप्त।
- 2003 में जन्मी संतान बनी बर्खास्तगी का आधार।
- मध्यप्रदेश में बड़ी कार्रवाई, अधिकारी बर्खास्त।
मध्यप्रदेश में सरकारी सेवा से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। सिंगरौली के उप पंजीयक ( Deputy Registrar) अशोक सिंह परिहार की सेवा दो बच्चों के नियम के उल्लंघन पर समाप्त कर दी गई है।
अशोक सिंह की तीसरी संतान का जन्म 2003 में हुआ था। महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय ने यह आदेश 11 जून 2026 को जारी किया। पूरा मामला विभागीय जांच के बाद सामने आया।
क्या है मामला
सिंगरौली के उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार पर विभागीय जांच हुई थी। आरोप था कि उनकी तीन संतान हैं। तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। जांच अधिकारी ने आरोप को सही पाया। इसके बाद उनकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई।
क्या था पूरा आरोप
श्री परिहार पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 14 के तहत विभागीय जांच शुरू हुई थी। आरोप पत्र अगस्त 2025 में जारी हुआ था।
आरोप था कि शासकीय सेवा के दौरान उनकी तीन संतानें हुईं। तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ। इसकी पुष्टि कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट से भी हुई थी।
जांच में क्या सामने आया
जांच अधिकारी वरिष्ठ जिला पंजीयक पवन अहिरवार को बनाया गया था। उन्होंने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में आरोप पूरी तरह सही पाया गया। इसके बाद श्री परिहार को जवाब देने का मौका दिया गया। उन्होंने मार्च 2026 में अपना उत्तर दिया।
अपने जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें तीसरी संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग ने कभी इस बारे में कोई पत्राचार नहीं किया।
अधिकारी की दलील क्यों नहीं चली
जांच में पाया गया कि श्री परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में हैं। जबकि तीसरी संतान का जन्म 2003 में हुआ। इतने लंबे सेवाकाल में नियम की जानकारी न होना तर्कसंगत नहीं माना गया।
विभाग ने कहा कि किसी शासकीय सेवक को अपने हित से जुड़े नियम की जानकारी न होना स्वीकार योग्य नहीं है। बचाव में दिए गए समाचार पत्र की कटिंग को भी सबूत के तौर पर मान्य नहीं माना गया। कारण था कि उससे जुड़े शासन के आदेश साफ नहीं थे।
कौन सा नियम बना आधार
मध्यप्रदेश राजपत्र में 10 मार्च 2000 को एक संशोधन प्रकाशित हुआ था। यह मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1961 के नियम 6 से जुड़ा था। इस नियम के अनुसार, अगर किसी उम्मीदवार की दो से ज्यादा जीवित संतान हैं, और उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, तो वह व्यक्ति किसी भी सेवा या पद के लिए पात्र नहीं होगा। जांच में यह नियम पूरी तरह लागू पाया गया।
अंतिम आदेश में क्या कहा गया
जांच रिपोर्ट और सभी सबूतों की समीक्षा के बाद आरोप प्रमाणित माना गया। इसके आधार पर महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय ने आदेश जारी किया।
आदेश में कहा गया कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1961 के नियम 6 और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 10(8) में अशोक सिंह परिहार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाती हैं। यह आदेश 11 जून 2026 को भोपाल से जारी हुआ। इस पर महानिरीक्षक पंजीयन मध्यप्रदेश के हस्ताक्षर हैं।
आदेश की प्रतिलिपि किन्हें भेजी गई
इस आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर सिंगरौली को भेजी गई है। साथ ही उप महानिरीक्षक पंजीयन जबलपुर को भी सूचित किया गया है। जिला पंजीयक सिंगरौली को आदेश की एंट्री सेवा पुस्तिका में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
संबंधित अधिकारी से प्राप्ति की पुष्टि भी मांगी गई है। संपदा प्रभारी अधिकारी और स्थापना शाखा को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचित किया गया है।
एमपी में दो बच्चों का नियम क्यों अहम
मध्यप्रदेश में सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए दो बच्चों की सीमा का नियम लंबे समय से लागू है। यह नियम 26 जनवरी 2001 के बाद जन्मी संतानों पर लागू होता है। इस मामले में यही नियम बर्खास्तगी का मुख्य आधार बना।
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