मालिनी के करीबी शानू दिघे ने HC में कहा-राजनीतिक दबाव में FIR, पुलिस की मिलीभगत
Sanjay Gupta | Jun 12, 2026, 15:43 IST
विधायक मालिनी विवाद
इंदौर विधानसभा चार में हुए बवाल के मामले में विधायक मालिनी गौड़ के करीबी सौरभ उर्फ शानू दिघे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। साथ ही एफआईआर को राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया है। शानू दिघे ने पुलिस पर मिलीभगत और निष्पक्ष जांच नहीं करने के आरोप लगाए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- इंदौर विधानसभा चार में 7 जून को हुए बवाल के मामले में शानू दिघे आरोपी बनाए गए हैं।
- शानू ने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- उन्होंने आरोप लगाया है कि राजनीतिक दबाव में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया।
- पुलिस पर उनकी पत्नी के आवेदन पर कार्रवाई नहीं करने और मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं।
- हाईकोर्ट ने मामले की केस डायरी तलब की है, अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
शनिवार और रविवार को हुए बवाल के बाद रविवार शाम पांच बजे अन्नपूर्णा पुलिस थाने में एफआईआर हुई। इसमें शानू भी आरोपी हैं। इसमें वीरेंद्र शेंडगे, विधायक के पीए प्रणय चित्तौड़ा के साथ मनीष ईमोलिया, अमित कोकाटे, प्रशांत सोनी गिरीश शेंडेगे भी आरोपी हैं। इन सभी पर हत्या के प्रयास की धारा, घर में जबरदस्ती घुसने और संगठित अपराध जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
शानू दिघे ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
सत्ता, पुलिस पर ये लगाए गंभीर आरोप
शानू ने कहा है कि व्यक्तिगत लड़ाई (कुत्तों को खाना खिलाने वाली बात) को राजनीतिक असर और ताकतवर लोगों ने दो राजनीतिक गुटों की लड़ाई बता दिया। इसे जानबूझकर भड़काया गया है।
शानू ने आगे कहा कि इसमें एक राजनीतिक गुट के दबाव में हम पर एफआईआर हो गई। जबकि मेरी पत्नी के आवेदन पर पुलिस ने कुछ नहीं किया। इस पूरे मामले में जो कुछ भी रविवार को हुआ, वह पुलिस अधिकारियों के सामने हुआ और उन्होंने कुछ नहीं किया। इस पूरे मामले में पुलिस की मिलीभगत रही है।
ये 7 लोग हैं जो घर में घुसे, इन्हें बचाया गया
दिघे ने कहा कि यह सभी रविवार शाम 4 से 5 बजे के बीच घर में घुसे। पत्नी का मंगलसूत्र तोड़ा, मेरी मां से झूमाझटकी कर धक्का दिया। साथ ही कार तोड़ी और घर में आग लगाने की धमकी देकर गए ।
इसके अलावा दिघे ने बताया कि 20-25 ग्राम सोने की चेन भी लूटकर ले गए। इसके बाद भी इन पर केस दर्ज नहीं किया गया। इन सभी को पुलिस ने बचाया और फिर दबाव में आकर हम पर केस भी कर लिया।
पुलिस राज्य सरकार के अधीन, इस पर भरोसा नहीं
शानू दिघे ने कहा कि यदि एफआईआर रद्द नहीं हो तो फिर पुलिस की कोर्सिव एक्शन पर रोक लगे। साथ ही एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाकर जांच कराई जाए। दिघे ने कहा कि संबंधित थाना और पुलिस अधिकारी राज्य सरकार के अधीन हैं। हमें उन पर भरोसा नहीं है कि वे इसमें निष्पक्ष जांच करेंगे। इस पूरे मामले में पुलिस की मिलीभगत रही है। इसलिए हाईकोर्ट इसमें अलग जांच के आदेश दे, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।
क्या विधायक गौड़ की नहीं चल रही है
इससे पहले उनके पति स्वर्गीय लक्ष्मण सिंह गौड़ 1993 से 2003 तक लगातार तीन बार चुनाव जीते थे। उनके समर्थकों के आवेदन पर पुलिस ने एफआईआर नहीं की। वहीं वीडियो में भी साफ है कि पुलिस की मौजूदगी में ही रविवार को भीड़ ने पथराव और तोड़फोड़ की। इसमें अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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