एमपी में शहर से बाहर शिफ्ट होंगी 12 पुरानी जेल, सागर-रीवा की सेंट्रल जेल भी शामिल, सरकार को होगी हजार करोड़ की बचत

Aman Vaishnav | Oct 18, 2026, 08:59 IST
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​<strong>मध्यप्रदेश में 12 पुरानी जेलों को शहर से बाहर शिफ्ट करने की योजना</strong>​
​मध्यप्रदेश में 12 पुरानी जेलों को शहर से बाहर शिफ्ट करने की योजना​

मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों में घनी आबादी के बीच बनी पुरानी जेलों को अब शहर से बाहर शिफ्ट किया जा रहा है। इन जेलों की लगभग 106 एकड़ कीमती सरकारी जमीन निजी डेवलपर्स को दी जाएगी। इन जमीनों का तय बेस रेट 1971 करोड़ रुपए है। निर्माण पर होने वाला खर्च निकालने के बाद भी सरकार को एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत होगी।

शहर से बाहर शिफ्ट होंगी जेल

समय के साथ मध्यप्रदेश के शहर तेजी से फैल गए हैं। इसके चलते बरसों पहले बनी कई जेलें अब घनी आबादी के बीच आ गई हैं। यहां जगह की काफी कमी है। ऐसे में जेलों को बड़ा करना और कैदियों के लिए आधुनिक सुविधाएं जुटाना मुश्किल हो रहा है।

इस समस्या को दूर करने के लिए एमपी हाउसिंग बोर्ड पुनर्घनत्वीकरण नीति-2022 (Re-densification Policy 2022) के तहत काम कर रहा है। इसके तहत प्रदेश की 2 केंद्रीय जेलों, 7 जिला जेलों और 3 उप-जेलों को शहरों से दूर नई जगहों पर शिफ्ट किया जा रहा है।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में जेलों का विस्तार मुश्किल

हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष ओम जैन का कहना है कि बोर्ड घर बनाने के साथ-साथ विकास के नए कामों पर भी ध्यान दे रहा है। इसी के तहत इन 12 पुरानी जेलों का फिर से निर्माण कराया जा रहा है। वहीं जेल विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में जेलों का विस्तार करना मुश्किल हो रहा था। इसलिए रीडेंसिफिकेशन योजना लाकर इन्हें शहर से बाहर खुली जगह में बनाया जा रहा है।

मुरैना में 2000 नौकरियों की उम्मीद: सीएम मोहन यादव ने ग्लास फैक्ट्री और औद्योगिक पार्कों का किया निरीक्षण | 2000 Jobs Expected in Morena: CM Mohan Yadav Inspects Glass Factory and Industrial Parks
मुरैना ग्लास फैक्ट्री में 1500 करोड़ का निवेश, 2000 युवाओं को मिल सकती है नौकरी, सीएम मोहन यादव ने की समीक्षा
17 Oct 2026 ,
By Manya Jain
मुरैना ग्लास फैक्ट्री में करीब 1500 करोड़ रुपए के निवेश से 2000 युवाओं को रोजगार मिल सकता है। यह फैक्ट्री करीब 1500 करोड़ रुपए के निवेश से लगाई जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जिले के दौरे में विकास कार्यों की समीक्षा की। उद्योग, कृषि, शिक्षा और प्रशासन के मुद्दों पर चर्चा हुई।
मुरैना ग्लास फैक्ट्री में करीब 1500 करोड़ रुपए के निवेश से 2000 युवाओं को रोजगार मिल सकता है। यह फैक्ट्री करीब 1500 करोड़ रुपए के निवेश से लगाई जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जिले के दौरे में विकास कार्यों की समीक्षा की। उद्योग, कृषि, शिक्षा और प्रशासन के मुद्दों पर चर्चा हुई।

बिना बजट खर्च किए कैसे बनेगी नई जेल?

इस पूरे मॉडल की एक और सबसे बड़ी खास बात है। राज्य सरकार को नए निर्माण के लिए अपने खजाने से अलग से एक भी रुपया नहीं देना पड़ेगा। पूरा गणित इस तरह तैयार किया गया है...

  • पुरानी जमीनों की कुल कीमत करीब 1971 करोड़ रुपए आंकी गई है।
  • निजी डेवलपर्स 1228 करोड़ रुपए लगाकर नए ठिकानों पर हाई-टेक जेल और स्टाफ के लिए घर तैयार करेंगे।
  • हाउसिंग बोर्ड को पूरा भरोसा है कि जब इन जमीनों की बोली लगेगी, तो रिजर्व रेट से कहीं ज्यादा दाम मिलेंगे।
  • निर्माण का पूरा खर्च निकालने के बाद भी सरकार को कम से कम एक हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त मुनाफा हासिल होगा।

जमीन, आधार मूल्य और निर्माण लागत

सभी 12 प्रोजेक्ट्स में जमीन के आकार (हेक्टेयर में), उसकी तय कीमत और नए निर्माण के खर्च का पूरा हिसाब इस प्रकार है...

  • सागर केंद्रीय जेल: 14.91 हेक्टेयर जमीन है। इसका आधार मूल्य 653.27 करोड़ रुपए है। नई जेल बनाने में 325.00 करोड़ रुपए की लागत आएगी।
  • रीवा केंद्रीय जेल: 6.59 हेक्टेयर जमीन है। इसका आधार मूल्य 533.00 करोड़ रुपए रखा गया है। निर्माण पर 282.05 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
  • रतलाम जिला जेल: 1.70 हेक्टेयर जमीन है। इसका आधार मूल्य 153.50 करोड़ रुपए है। इस पर 108.03 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।
  • मंदसौर उप-जेल: 1.07 हेक्टेयर जमीन है। इसका बेस रेट 109.55 करोड़ रुपए है। 105.25 करोड़ रुपए की लागत से नया काम होगा।
  • छतरपुर जिला जेल: 3.73 हेक्टेयर जमीन है। इसका आधार मूल्य 86.94 करोड़ रुपए है। निर्माण में 116.45 करोड़ रुपए लगेंगे।
  • मंडला जिला जेल: 3.20 हेक्टेयर जमीन है। इसकी कीमत 85.93 करोड़ रुपए है। लागत 85.21 करोड़ रुपए आएगी।
  • दमोह जिला जेल: 3.87 हेक्टेयर जमीन है। इसका आधार मूल्य 83.00 करोड़ रुपए है। इस पर 78.00 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
  • बैतूल जिला जेल: 2.30 हेक्टेयर जमीन है। इसका आधार मूल्य 80.80 करोड़ रुपए है। निर्माण लागत 59.00 करोड़ रुपए है।
  • झाबुआ जिला जेल: 3.16 हेक्टेयर जमीन है। इसका बेस रेट 72.14 करोड़ रुपए है। नया काम 60.19 करोड़ रुपए में होगा।
  • मैहर उप-जेल: 0.75 हेक्टेयर जमीन है। इसका आधार मूल्य 51.43 करोड़ रुपए है और लागत 37.29 करोड़ रुपए है।
  • जावरा उप-जेल: 0.52 हेक्टेयर जमीन है। इसका आधार मूल्य 31.41 करोड़ रुपए है। निर्माण में 30.73 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
  • भिंड जिला जेल: 1.22 हेक्टेयर जमीन है। इसका आधार मूल्य 22.11 करोड़ रुपए रखा गया है। निर्माण पर 15.52 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

किन जेलों का काम कहां तक पहुंचा?

अलग-अलग शहरों में चल रहे प्रोजेक्ट्स की मौजूदा स्थिति इस प्रकार है...

1. बैतूल और भिंड में निर्माण जोरों पर

बैतूल: यहां जेल की जमीन का बेस प्राइस 80.80 करोड़ रुपए था, लेकिन बोली 90.51 करोड़ रुपए लगी। यहां 59 करोड़ रुपए से 480 कैदियों की क्षमता वाली जेल बन रही है। इसमें 21 बैरक, 11 हाई-सिक्योरिटी सेल, स्टाफ क्वार्टर और ट्रेनिंग सेंटर शामिल हैं। इसका 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। सरकार को 31.51 करोड़ रुपए का अतिरिक्त फायदा होगा।

भिंड: जमीन की रिजर्व कीमत 22.11 करोड़ रुपए थी, जबकि बोली 25 करोड़ रुपए मिली। यहां 15.52 करोड़ रुपए से ओपन जेल, गार्ड रूम, बाउंड्री वॉल और मेहगांव व गोहद उप-जेलों में बैरक और स्टाफ के घर बन रहे हैं। यहां भी 69 फीसदी काम निपट चुका है। सरकार को 9.48 करोड़ रुपए की अतिरिक्त कमाई होगी।

इन दोनों शहरों में तय कीमत से कुल 12.60 करोड़ रुपए ज्यादा की बोली मिली है।

2. तीन जेलों की डीपीआर (DPR) मंजूर

रतलाम: यहां 153.50 करोड़ रुपए की जमीन के बदले 108.03 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इससे 1000 कैदियों की क्षमता वाली जेल और स्टाफ के लिए 28 आवास बनाए जाएंगे।

दमोह: यहां 83 करोड़ रुपए की जमीन के बदले 78 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस रकम से 600 कैदियों की जेल और स्टाफ के लिए 76 घर बनेंगे।

मंदसौर: यहां 109.55 करोड़ रुपए की जमीन के बदले 105.25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इससे 1000 कैदियों की क्षमता वाली जेल और स्टाफ के लिए 41 आवास बनाए जाएंगे।

3. चार जेलों की शुरुआती रिपोर्ट पास

सागर: यहां 653.27 करोड़ रुपए की सबसे महंगी जमीन है। इसके बदले 325 करोड़ रुपए खर्च करके 4 हजार कैदियों की क्षमता वाली बड़ी केंद्रीय जेल बनाई जाएगी। साथ ही स्टाफ के लिए 38 आवास भी बनेंगे।

रीवा: यहां 533 करोड़ रुपए की जमीन के बदले 282.05 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इससे 2400 कैदियों की क्षमता वाली केंद्रीय जेल और स्टाफ के लिए 234 आवास बनेंगे। इसके अलावा बीहर रिवर फ्रंट भी तैयार होगा। इसकी डीपीआर जल्द ही अगली बैठक में पेश की जाएगी।

झाबुआ: यहां 72.14 करोड़ रुपए की जमीन के बदले 60.19 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इससे 500 कैदियों की क्षमता वाली जेल और स्टाफ के लिए 54 आवास बनाए जाएंगे।

छतरपुर: यहां 86.94 करोड़ रुपए की जमीन के बदले 116.45 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस रकम से 600 कैदियों की क्षमता वाली जेल और स्टाफ के लिए 76 आवास बनाए जाएंगे।

4. तीन जेलों के प्रस्ताव भेजे गए

जावरा: 31.41 करोड़ रुपए की जमीन के बदले 30.73 करोड़ रुपए खर्च करके 300 कैदियों की उप-जेल बनेगी।

मैहर: 51.43 करोड़ रुपए की जमीन के बदले 37.29 करोड़ रुपए लगाकर 300 कैदियों की उप-जेल का प्रस्ताव है।

मंडला: 85.93 करोड़ रुपए की जमीन के बदले 85.21 करोड़ रुपए की लागत से 600 कैदियों की जेल और 59 आवास बनाने की योजना भेजी गई है।

मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना का विस्तार: हार्ट, लिवर, फेफड़ों के ट्रांसप्लांट शामिल, इलाज की सीमा 10 लाख तक | Expansion of Ayushman Yojana in Madhya Pradesh: Heart, Liver, Lung Transplants Included, Treatment Limit Up to 10 Lakh
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