एमपी में बनेगा नया ओंकारेश्वर अभयारण्य, क्षेत्र में रोजगार और पर्यटन बढ़ेगा

Sandeep Kumar | May 25, 2026, 17:27 IST
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खंडवा में ओंकारेश्वर अभयारण्य बनने से सालाना 1700 करोड़ की नई अर्थव्यवस्था बढ़ेगी। रोजगार और पर्यटन के अवसर बढ़ेंगे। सिंहस्थ 2028 से पहले अभयारण्य शुरू होगा। वन्यजीवन, पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर में नया विकास सुनिश्चित होगा।

News in Short

  • ओंकारेश्वर अभयारण्य 61 हजार 406.09 हेक्टेयर में विकसित होगा।
  • सिंहस्थ 2028 से पहले अभयारण्य तैयार करने का लक्ष्य।
  • पर्यटकों के लिए होटल, रिसॉर्ट और क्रूज जैसी सुविधाएं विकसित होंगी।
  • स्थानीय रोजगार के अवसर जैसे गाइड, ड्राइवर और इलेक्ट्रिशियन बढ़ेंगे।
  • वन्यजीव संरक्षण और आर्थिक लाभ के लिए लकड़ी, बांस और तेंदूपत्ता का उपयोग।

News in Detail

मध्य प्रदेश के खंडवा में ओंकारेश्वर अभयारण्य बनने जा रहा है। सिंहस्थ 2028 से पहले इसे तैयार करने की योजना है। अभयारण्य में वन्यजीवन, पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। यह परियोजना सालाना 1700 करोड़ की नई अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसर सुनिश्चित करेगी।



अभयारण्य की योजना

खंडवा में प्रस्तावित ओंकारेश्वर अभयारण्य (Omkareshwar Sanctuary) करीब 61 हजार 406.09 हेक्टेयर में विकसित किया जाएगा। इसे सिंहस्थ 2028 से पहले तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। CM डॉ. मोहन यादव ने इसकी अधिसूचना जारी करने की घोषणा की है। वन विभाग ने अभयारण्य की तैयारियां शुरू कर दी हैं।



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पर्यटन और विकास बढ़ेगा

ओंकारेश्वर अभयारण्य धार्मिक पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम होगा। प्रतिदिन यहां 20 से 30 हजार पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इनके ठहरने, परिवहन, भोजन और अन्य सुविधाओं के लिए आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा। नए होटल, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट, जिप्सी सफारी और क्रूज संचालन की योजनाएं बनाई जा रही हैं।



रोजगार के अवसर

अभयारण्य से स्थानीय रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। होटल-रेस्टोरेंट व्यवसाय, पर्यटन गाइड, ड्राइवर, क्लीनर, मैकेनिक और इलेक्ट्रिशियन की मांग बढ़ेगी। स्थानीय कृषि और हस्तशिल्प उत्पादों की खपत और व्यापार में वृद्धि होगी। बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।



वन्यजीव संरक्षण

अभयारण्य में सागौन, सालई और धावड़ा वनस्पति पाई जाती है। यहां तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा और सियार के अलावा टाइगर का संरक्षण भी किया जाएगा। मूंदी और चांदगढ़ रेंज के 52 टापू पर्यटकों के लिए विकसित किए जाएंगे। इंदिरा सागर परियोजना के आसपास वन्यजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।



अभयारण्य बनने से 2784.60 घन मीटर इमारती लकड़ी, 2078.80 घन मीटर जलाऊ लकड़ी और 560.70 टन बांस मिलेगा। तेंदूपत्ता से हर वर्ष 1 करोड़ 21 लाख 46 हजार की आय प्राप्त होगी। इससे वन विभाग और राज्य सरकार को राजस्व लाभ होगा।



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जल्द जारी होगी अधिसूचना

ओंकारेश्वर अभयारण्य की अधिसूचना जल्द जारी होने की उम्मीद है। इससे खंडवा जिले की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। पर्यटन, रोजगार और प्राकृतिक संरक्षण के क्षेत्र में यह अभयारण्य नए मानक स्थापित करेगा।



FAQ

  1. ओंकारेश्वर अभयारण्य से क्या लाभ होंगे?
    अभयारण्य से खंडवा में पर्यटन, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। सालाना 1700 करोड़ की अर्थव्यवस्था तैयार होगी।
  2. अभयारण्य से पर्यटन और सुविधाएं क्या होंगी?
    होटल, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट, जिप्सी सफारी, क्रूज संचालन और होम-स्टे जैसी सुविधाएं पर्यटकों के लिए विकसित होंगी।

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